लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती के सामने ये सीट बचाने की चुनौती
लोकसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन करने के बाद अब बहुजन समाज पार्टी के लिए उत्तराखंड में होने वाले उपचुनाव में अपनी साख बचाने की चुनौती है।
मंगलौर सीट पर अब तक बसपा का कब्जा रहा। साथ ही अब तक हुए पांच विधानसभा चुनावों में चार बार बसपा ने ही जीत दर्ज की। ऐसे में अब बसपा के लिए इस सीट को बचाने की चुनौती है।

दिवंगत विधायक सरवत करीम अंसारी के बेटे उबेर्दुरहमान चुनाव लड़ने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी उनके परिवार को ही टिकट देने पर सहमति जता दी है। कांग्रेस भी इस सीट को लेकर काफी सक्रिय नजर आ रही है। कांग्रेस के पूर्व विधायक काजी निजामुद्दीन उपचुनाव लड़ सकते हैं।
हरिद्वार के अंदर आने वाली मंगलौर सीट पर अब तक पांच चुनाव हुए हैं, जिनमें से चार बार बसपा प्रत्याशी को जीत मिली है। 2002 के पहले चुनाव में 21,155 वोट के साथ बसपा के काजी निजामुद्दीन ने जीत दर्ज की और कांग्रेस के सरवत करीम को 14,561 वोट मिले। 2007 के चुनाव में बसपा से निजामुद्दीन 25,559 के साथ विधायक बने।
रालोद के चौधरी कुलवीर सिंह 22,166 के साथ दूसरे और कांग्रेस के सरवत करीम 18,629 वोटों के साथ तीसरे पायदान पर रहे। 2012 के चुनाव में बसपा से सरवत करीम ने 24,706 वोटों के साथ जीत दर्ज की। कांग्रेस से काजी निजामुद्दीन ने 24,008 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
2017 के चुनाव में कांग्रेस से काजी निजामुद्दीन 31,352 वोटों के साथ विधायक बने। जबकि बसपा के सरवत करीम ने 28,684 वोट हासिल किए। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के सरवत करीम 32,660 वोटों के साथ चुनाव जीतकर विधायक बने। कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन को 32,062 वोट मिले।
इस तरह हार जीत का अंतर मात्र 598 वोट रहा। लोकसभा चुनाव में मंगलौर सीट पर बसपा के प्रत्याशी जमील अहमद को महज 5,507 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के वीरेंद्र रावत को यहां 44,101 वोट मिले। भाजपा के वोटबैंक में भी करीब तीन हजार का इजाफा हुआ। इस तरह अब इस सीट पर समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं। मंगलौर सीट पर बसपा, कांग्रेस और भाजपा तीनों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है। सबसे बड़ी चुनौती बसपा के लिए है।












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