हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर खिले ब्रह्मकमल, धार्मिक मान्यताओं से भी खास है उत्तराखंड का राजकीय फूल, जानिए
ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राजकीय फूल है, जो कि इन दिनों हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर खिले हुए हैं। इसके अलावा फूलों की घाटी में भी ब्रह्मकमल खिल चुके हैं। जो कि पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राजकीय फूल है, जो कि इन दिनों हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर खिले हुए हैं। इसके अलावा फूलों की घाटी में भी ब्रह्मकमल खिल चुके हैं। जो कि पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह फूल मॉनसून के महीनों में खिलता है और अक्टूबर के महीने तक दिखाई देता है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मकमल को देखने मात्र से ही मनुष्य का कल्याण होता है, साथ ही ये फूल समृद्धि का प्रतीक भी है। उत्तराखंड राज्य पुष्प ब्रह्मकमल 13 हजार फीट की ऊंचाई पर खिलता है। ब्रह्मकमल का जितना धार्मिक महत्व है, उतना ही ये चिकित्सीय गुणीय को समेटे हुए है। इसका इस्तेमाल जड़ी बूटियों में भी होता है, जिसका कई बीमारियों के उपचार में उपयोग किया जाता है।
इन दिनों ब्रह्मकमल हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर अटलाकोटी से हेमकुंड साहिब तक जगह-जगह पर खिला हुआ है। जो कि पर्यटकों के लिए किसी सपने जैसा पूरा होने वाला है। ब्रह्मकमल का अपना धार्मिक महत्व है। हिंदू पुराणों के अनुसार ब्रह्म कमल एक बहुत ही दुर्लभ फूल है। मान्यता है कि यदि ब्रह्म कमल भगवान शिव पर चढ़ाया जाए तो इससे वे प्रसन्न होते हैं।
हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म कमल ही वह पुष्प था जिस पर भगवान शिव ने जल छिड़क कर भगवान गणेश को जीवित किया था। इसलिए इस फूल को जीवन देने वाला फूल भी माना जाता है। इसे समृद्धि का प्रतीक माना गया है। ब्रह्मकमल फूल अगस्त के महीने में खिलता है। सितम्बर, अक्टूबर में इसमें फल बनने लगते हैं। इसका जीवन 5 या 6 महीने का होता है।
ब्रह्मकमल माँ नंदा का प्रिय पुष्प हैं, इसलिए इसे नंदा अष्टमी में तोड़ा जाता है। ब्रह्मकमल साल में एक बार खिलता है जोकि सिर्फ रात के समय खिलता है। जले-कटे में, सर्दी-जुकाम, हड्डी के दर्द आदि में इसका उपयोग किया जाता है। इसे सुखाकर कैंसर रोग की दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इससे निकलने वाले पानी को पीने से थकान मिट जाती है। पुरानी खांसी भी काबू हो जाती है।












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