देहरादून की कैंट सीट पर कब्जा करने को भाजपा को बनानी होगी नई रणनीति, परिवार या नया चेहरा किस पर खेलेंगे दांव
देहरादून की कैंट सीट पर कब्जा करने को भाजपा को बनानी होगी नई रणनीति, आसान नहीं उ्रत्तराधिकारी चुनना
देहरादून, 14 दिसंबर। उत्तराखंड में मिशन 60 प्लस में जुटी भाजपा के लिए चुनाव से पहले सबसे वरिष्ठ विधायक हरबंस कपूर का जाना बड़ी क्षति मानी जा रही है। हरबंस कपूर कैंट विधानसभा से उत्तराखंड बनने के बाद से लगातार 4 बार विधायक चुनकर आए थे, जिससे इस सीट पर भाजपा के लिए 20 साल में किसी तरह की कभी भी कोई चुनौती खड़ी नहीं हो पाई। जिस तरह के पार्टी सूत्र संकेत दे रहे हैं, उससे साफ है कि इस बार भी भाजपा हरबंस कपूर पर दांव खेलने की तैयारी में थी। लेकिन चुनाव से ठीक पहले कपूर के निधन से पार्टी को नए स्तर से होमवर्क करना होगा। सबसे बड़ा सवाल अब ये उठ रहा है कि हरबंस कपूर का कैंट क्षेत्र से उत्तराधिकारी कौन होगा। भाजपा परिवार के ही किसी सदस्य पर विश्वास जताती है, या फिर कोई नया चेहरा मैदान में उतरता है। आने वाले दिनों में इसकी तस्वीर साफ हो सकती है।

परिवार के किसी सदस्य को मिल सकती है विरासत
देहरादून कैंट सीट भाजपा के लिए आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती साबित होने जा रही है। हरबंस कपूर की छवि और उनकी सादगी जनता में इस तरह अपनी छाप छोड़ चुकी थी कि भाजपा को उनकी जगह दूसरा विकल्प तलाशना आसान नहीं होगा। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि पार्टी को अगर कैंट सीट पर कोई मजबूत चेहरा नहीं मिला तो परिवार के किसी सदस्य को ही चुनाव में उतारा जा सकता है। जिसमें हरबंस कपूर की पत्नी सविता कपूर का नाम सबसे पहले लिया जा रहा है जो कि हर समय उनके साथ ही रहती थी। हरबंस कपूर जब भी सामाजिक कार्यों या क्षेत्र में किसी कार्यक्रम में जाते थे, तब उनकी पत्नी अकसर साथ दिखती थी। ऐसे में पार्टी सविता कपूर की राजनीतिक इच्छा को जरुर जानने की कोशिश करेगी। इसके बाद हरबंस कपूर के पुत्र अमित कपूर भी पार्टी के लिए परिवार से मजबूत दावेदार हो सकते हैं। जो कि कई समय से राजनीति में एक्टिव हैं। इस तरह पार्टी पहले विकल्प के तौर पर हरबंस कपूर के परिजनों के नाम पर विचार कर सकती है। परिवार के बाहर अगर पार्टी ने विकल्प तलाशा तो पार्टी को सबसे पहले किसी पंजाबी समुदाय के चेहरे की तलाश होगी।
पंजाबी वोटर ही जीत का फेक्टर
कैंट विधानसभा सीट पर पंजाबी वोटर ही जीत का फेक्टर नजर आता है। 2017 और 2012 के विधानसभा चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो तस्वीर साफ होती दिखती है। 2017 में देहरादून कैंट में हरबंस कपूर को 41,142 वोट के साथ 56.48 प्रतिशत वोट पड़े। जबकि कांग्रेस के सूर्यकांत धस्माना को 24,472 वोट यानि 33.60 प्रतिशत वोट पड़े। चुनाव में कपूर ने सूर्यकांत धस्माना को 16670 वोटों के मार्जिन से हराया था। 2012 के विधानसभा चुनाव में हरबंस कपूर को 29,719 वोट यानि 47% वोट पड़े। जबकि कांग्रेस के देवेंद्र सिंह सेठी 24,624 यानि 39% वोट मिले। इस तरह कपूर 5 हजार वोटों के मार्जिन से चुनाव जीते। इस चुनाव में कांग्रेस ने पंजाबी समुदाय से प्रत्याशी मैदान में उतारा तो वोट शेयर भाजपा, कांग्रेस में बंट गया। साफ है कि कैंट सीट पर पंजाबी फेक्टर ही काम करता है।
सादगी और बेदाग छवि का विकल्प तलाशना नहीं आसान
भाजपा विधायक हरबंस कपूर यूपी के समय से वर्ष 1989 से लगातार विधायक निर्वाचित होते आए। वे चार बार यूपी में भी विधायक रहे हैं। यूपी के समय राज्यमंत्री और फिर उत्तराखंड में कैबिनेट मंत्री के साथ ही विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके कपूर अपनी सादगी को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। भाजपा में वरिष्ठ विधायक होने के बाद भी वे कई कार्यक्रम में सामान्य कार्यकर्ता की तरह बैठे नजर आते थे। स्कूटर और छोटी कार से ही कपूर देहरादून में किसी भी कार्यक्रम में पहुंच जाते थे। ऐसे में भाजपा के लिए कपूर की छवि और सादगी की तरह का विकल्प तलाशना आसान नहीं है। जो उनके राजनीति की विरासत को आगे बढ़ाए।












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