चुनाव से पहले हरीश रावत ने की अपने उत्तराखंडियत मॉडल की तारीफ, गुजरात, दिल्ली मॉडल बताया फेल

हरीश रावत ने बीजेपी के गुजरात मॉडल और आम आदमी पार्टी के दिल्ली मॉडल को लेकर कई तरह के सवाल भी खड़े किए

देहरादून, 13 सितंबर। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी त्रिकोणीय मुकाबले में मानी जा रही हैं। ऐसे में तीनों दल एक दूसरे दलों की कमियां और अपनी खूबियां जनता के सामने रखने लगे हैं। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की और से पूर्व सीएम हरीश रावत ने चुनाव की कमान संभाली हुई है। इसके लिए हरीश रावत लगातार जनता के बीच कांग्रेस का​ विजन रख रहे हैं। हरीश रावत ने ​2022 विधानसभा चुनाव में उत्तराखंडियत मॉडल को चुनावी कैंपेन का हिस्सा बनाया है। इतना ही नहीं हरीश रावत ने बीजेपी के गुजरात मॉडल और आम आदमी पार्टी के दिल्ली मॉडल को लेकर कई तरह के सवाल भी खड़े किए हैं।

Before the elections, Harish Rawat praised his Uttarakhandiyat model, said Gujarat, Delhi model failed

हरीश रावत ने कहा, गुजरात मॉडल फेल
सत्ताधारी बीजेपी डबल इंजन की सरकार और पीएम मोदी के गुजरात मॉडल को लेकर जनता से आशीर्वाद मांग रही है। लेकिन पूर्व सीएम हरीश रावत ने बीजेपी के ​गुजरात मॉडल को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि गुजरात मॉडल, डबल इंजन की सरकार के विफलताओं को उत्तराखंड में 2017 से अभी तक भुगत रहा है। हरीश रावत का कहना है विकास शून्य, केवल बयानबाजी, महंगाई, बेलगाम अर्थव्यवस्था व रोजगार सृजन रसातल की ओर, महिलाओं की पेंशन बंद, अंबानी-अडानी मॉडल पर काम, जमीन पूंजीपतियों को बेच दो, कोविड काल में जनता को अपने भाग्य पर छोड़ दो, कोई व्यवस्था नहीं, न ऑक्सीजन न बेड, मुख्यमंत्री बदलो और हो सके तो चुनाव के समय में विधायकों के टिकट काटकर जनता के सवालों से बचो, यह है गुजरात मॉडल। इस तरह से हरीश रावत ने बीजेपी के गुजरात मॉडल पर सवाल खड़े करते हुए गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

दिल्ली मॉडल में चली आ रही पुरानी योजनाएं
आम आदमी पार्टी की दिल्ली में सरकार है, और आप दिल्ली मॉडल को लेकर चुनाव में जनता के बीच में जा रही है। हरीश रावत का कहना है कि दिल्ली मॉडल में न कृषि, न बागवानी, न राजस्व, पुलिस सहित कई विभाग नदारद हैं। उन्होंने आगे कहा कि केवल कुछ कमाऊ विभाग आबकारी, टैक्सेशन आदि दुधारू भैंसें हैं। हरीश रावत ने आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के अधीन साढे़ 600 के करीब स्कूल हैं, पिछले 7 वर्षों से दिल्ली में कोई नया डिग्री कॉलेज, विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, पैरामेडिकल कॉलेज, पॉलिटेक्निक, आई.टी.आई. सरकार ने नहीं खोला। पानी की योजना भी जो पहले बनी है वही चली आ रही है, न कोई नया फ्लाईओवर बना है, न कोई सड़क बनी है, बल्कि पानी की निकासी भी नहीं हो रही है, बारिश हो रही है तो कई इलाके कमर-कमर तक पानी से डूब जा रहे हैं, यह दिल्ली मॉडल है। साढे़ 7 साल के दिल्ली मॉडल में केवल साढे़ 6 हजार लोगों को नौकरियां मिली हैं, जिनमें से कुछ अंशकालीन शिक्षक हैं।

अपने कार्यकाल को बताया उत्तराखंडियत आधारित मॉडल
हरीश रावत का दावा है कि जब वे मुख्यमंत्री बनें तो 2014 से 2017 तक एक उत्तराखंडियत आधारित मॉडल बनना शुरू हुआ। उनकी सरकार के कार्यकाल के दौरान एक लाख की संख्या से 3 वर्ष में वृद्ध, विधवा, दिव्यजन पेंशनों की संख्या बढ़कर सवा 7 लाख पहुंची। 400 रुपए मासिक से बढ़कर हजार रुपए पहुंची। बौना, परित्यक्ता, अक्षम महिलाओं, अविवाहित उम्रदराज महिलाएं, शिल्पियों, जगरियों, कलाकारों, पत्रकारों, किसानों, पुरोहितों सभी सृजकों को पेंशन योजना में लाया गया। कन्यादान, गौरा देवी, नंदा देवी जैसी दलित गरीब पोषण योजनाएं, बाल गर्भवती महिला व वृद्ध महिला पोषण आहार योजना लागू की गई। हरीश रावत ने अपनी सरकार के कामकाज गिनाते हुए दावा किया​ कि उनकी सरकार ने सार्वभौम, स्वास्थ्य बीमा, ए.पी.एल. कार्ड धारकों को भी सस्ता अनाज, महिला संगठनों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक पोषण तथा दुग्ध, जल, वृक्ष बोनस योजनाएं, 1400 सड़कों पर काम पूर्ण या प्रारंभ, 25 नये डिग्री कॉलेज, 23 नये पॉलिटेक्निक, 8 इंजीनियरिंग, 8 नर्सिंग, 5 मेडिकल, पैरामेडिकल, 40 नये आई.टी.आई., 32 बहुग्राम, पेयजल योजनाएं, फ्लाईओवर, अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्टेडियमों का निर्माण, 24 घंटे स्वस्थ व सबसे सस्ती बिजली, भाषा-बोली व शिल्प सर्वधन, पर्वतारोहण के नये संस्थान, 32 हजार लड़के-लड़कियों को सरकारी नौकरियां, शिक्षा में आरक्षण का बैकलॉग समाप्त, 500 से अधिक मॉडल स्कूल आदि कई काम किए हैं। हरीश रावत का दावा है कि 2014 में राज्य के प्रति व्यक्ति औसत आय 73 हजार रुपए थी और वो 2016 में बढ़कर 1 लाख 75 हजार रुपये पहुंची। राज्य की वार्षिक राजस्व वृद्धि दर 7 प्रतिशत से बढ़कर साढे़ 19 प्रतिशत पहुंची। इस तरह से हरीश रावत ने जनता से उत्तराखंडियत मॉडल को की तुलना गुजरात और दिल्ली मॉडल से करने की अपील की है।

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