बागेश्वर उपचुनाव: कांग्रेस से बसंत कुमार आजमा रहे किस्मत, आसान नहीं चुनौती, ये हैं चुनावी मुद्दे
बागेश्वर उपचुनाव को जीतना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। कांग्रेस ने बागेश्वर उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले बसंत कुमार पर दांव खेला है।
बागेश्वर उपचुनाव को जीतना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। कांग्रेस ने बागेश्वर उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले बसंत कुमार पर दांव खेला है। बसंत कुमार के कांग्रेस में आने की आहट लगते ही कांग्रेस के पिछले चुनाव में प्रत्याशी रहे रणजीत दास ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद प्रत्याशी के ऐलान से ठीक पहले बसंत कुमार और 2022 के चुनाव में बगावत कर निर्दलीय ताल ठोकने वाले भैरव नाथ टम्टा कांग्रेस में शामिल हुए थे।

कांग्रेस ने बागेश्वर में होने वाले चुनाव को लेकर पूरा जोर लगा दिया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बागेश्वर की बागडोर अपने हाथ में ली हुई है। अब प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव भी बागेश्वर पहुंचकर अपने प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करेंगे। इसके साथ ही कांग्रेस ने अपने 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट भी जारी की है। कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत मतदान से पहले बागेश्वर पहुंचकर पूरी ताकत झौंकेंगे।
कांग्रेस के प्रत्याशी बसंत कुमार इससे पहले चुनावों में बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। वर्ष 2017 का चुनाव बसंत कुमार ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर लड़ा। वर्ष 2022 का चुनाव आम आदमी पार्टी के टिकट पर लड़ा। इस बार उपचुनाव में वह कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। बागेश्वर सीट पर 17 साल से भाजपा के दिवंगत विधायक चंदन राम दास चुनाव जीतते आए, अब उनकी पत्नी पार्वती दास चुनावी मैदान में है। ऐसे में बसंत के लिए चुनाव आसान नहीं है।
बसंत कुमार ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में कहा कि बागेश्वर में रोजगार, चिकित्सा, जल निकासी समेत कई बड़े मुद्दे हैं। जिनको केंद्र में रखकर वे चुनाव लड़ रहे हैं। 17 सालों तक एक ही व्यक्ति के विधायक और मंत्री रहते हुए भी विकास कार्य नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि अगर वे विधायक चुनकर आए तो संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करते हुए वे बागेश्वर के विकास कार्यों को लेकर लगातार प्रयास करेंगे। चुनाव के दौरान दलबदल पर उन्होंने कहा कि भाजपा में जो भी लोग ज्वाइन कर रहे हैं, वे बाहरी नेता हैं और इससे चुनाव पर कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।












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