चुनाव बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को आई राज्य गीत की याद, जानिए उत्तराखंड के राज्य गीत के बारे में सबकुछ
2016 में हरीश रावत सरकार में तैयार हुआ था राज्य गीत
देहरादून, 22 फरवरी। उत्तराखंड में चुनाव निपटने के बाद भी कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की घोषणाएं जारी हैं। अब हरीश रावत ने राज्य गीत को सरकार आने पर आगे लाने का वादा किया है। जो पिछले कुछ सालों से खो गया है। हरीश रावत सरकार में बना राज्य गीत सिर्फ एक ही कार्यक्रम में सार्वजनिक रुप से स्वीकार किया गया। लेकिन इसके बाद राज्य गीत पर किसी सरकार या जनप्रतिनिधि ने सुध नहीं ली है।

2016 में हुई थी राज्य गीत की घोषणा
प्रदेश की संस्कृति, बोली, भाषा और भौगोलिक संरचना को समझने के लिए राज्य की अपनी पहचान होनी जरुरी है। इसके लिए 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार ने राज्य गीत बनाने का निर्णय लिया था। हरीश रावत की सरकार ने फरवरी 2016 के प्रथम सप्ताह में एक सार्वजनिक सभा में राज्यगीत की घोषणा की थी। इसके बाद 4 मार्च को राज्यपाल की ओर से भी सहमति मिल गई। जो कि पहली बार हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में 15 अगस्त के मौके पर गीत बजाया भी गया, लेकिन नई सरकार के आने के बाद से राज्य गीत नहीं बजा। राज्य गीत को तैयार करने के लिए हरीश रावत सरकार ने ने संस्कृति विभाग को राज्यगीत चयन का काम सौंपा था। इसके बाद संस्कृति विभाग ने गीत के चयन के लिए कमेटी बनाई और विज्ञापन के माध्यम से देशभर से प्रविष्टियां मांगीं।
नरेद्र सिंह नेगी और अनुराधा निराला ने दी है आवाज
करीब 13 लोगों की कमेटी के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह बटरोही और उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी थे। कमेटी को 203 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। इनमें से कुमाऊं के हेमंत बिष्ट का गीत चुना गया। इस दौरान बिष्ट से गीत में कुछ संशोधन कराए गए। इसके बाद कमेटी ने गीत की धुन तैयार करने की जिम्मेदारी लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को दी। नेगी ने दिल्ली के एक स्टूडियो में गीत कंपोज कर तैयार किया। जिसे नरेंद्र सिंह नेगी और अनुराधा निराला ने आवाज दी है। इसके बाद गीत सरकार को सौंप दिया गया। कैबिनेट की सहमति के बाद हेमंत बिष्ट के गीत को राज्यगीत का दर्जा मिला। लेकिन एक बार 15 अगस्त को राज्य गीत बनने के बाद दोबारा नहीं सुनाई दिया। इसके पीछे राजनीतिक कारण रहे हों या कोई और कारण। ये भी सामने नहीं आ पाया है। हालांकि तब ये भी बात सामने आई थी कि राज्य गीत करीब 10 मिनट का है, जिसे थोड़ा छोटा किया जा सकता है। लेकिन जिस तरह राज्य गीत में उत्तराखंड की संस्कृति, रीति रिवाज, इतिहास, भौगोलिक परिस्थियां सभी बिंदुओं का समावेश किया गया था, जो कि काफी पसंद किया गया। अब हरीश रावत ने कांग्रेस सरकार आने पर राज्य गीत को दोबारा से सम्मान दिलाने का दावा किया है।
हरीश रावत ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि-
राज्य गीत, हमारा राज्यगीत अपने आप में अद्भुत प्रेरणादायक है। मगर राजनीतिक गहमा गहमी में पिछले 5 वर्षों में राज्य गीत कहीं खो गया है उसको फिर से आगे लाना है। कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति में प्रत्येक शासकीय समारोहों में जहां राष्ट्रगान बजता है, वहां राज्य गीत भी अनिवार्य रूप से बजना चाहिये। राज्य के स्कूलों में भी राज्य वंदना के रूप में इस गीत का गायन प्रातः कालीन प्रार्थना का अंग होना चाहिए।












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