उत्तराखंड कांग्रेस में बदलाव के बाद भाजपा संगठन में भी बदलाव की चर्चा तेज, हाईकमान कर सकती है बड़ा फैसला
पूर्व सीएम निशंक को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने की चर्चा तेज
देहरादून, 13 अप्रैल। उत्तराखंड कांग्रेस में बदलाव के बीच अब भाजपा में भी बदलाव को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। हारी हुई 23 सीटों पर भाजपा हाईकमान ने अपनी रिपोर्ट भी बनाई है। जिसके बाद बदलाव होने के संकेत मिल रहे हैं। जिसमें पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक का नाम एक बार फिर तेजी से लिया जा रहा है। जो कि सभी समीकरणों में फिट बैठते हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि अभी हाईकमान की ओर से इस बाबत कोई संकेत नहीं मिले हैं। लेकिन चुनाव के बाद से ही भाजपा के अंदरखाने मदन कौशिक के खिलाफ लगातार एक गुट दबाव बनाने में जुटा है।

जीत के बाद संगठन पर उठे सवाल
भाजपा ने प्रदेश में भले ही सरकार बनाई है लेकिन भितरघात के आरोपों से भाजपा भी नहीं बची है। चुनाव निपटते ही सबसे ज्यादा विरोध के सुर भाजपा में उठे, जो कि चुनाव के बाद से शांत तो हो गए लेकिन अंदरखाने उस पर चर्चा जोरों पर है। भाजपा में चुनाव में 6 से ज्यादा विधायकों ने भितरघात का आरोप लगाया था। जो कि संगठन पर सीधा आरोप लगा चुके हैं। पार्टी ने 23 ऐसी सीटों पर समीक्षा भी कराई जहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इन सीटों पर भितरघात की सबसे ज्यादा कंप्लेन आई। जिसके बाद संगठन पर सवाल खड़े किए गए। इसमें प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक पर भी आरोप लगे। जो कि सबसे गंभीर माने गए। ऐसे में मदन कौशिक की कुर्सी भी खतरे में मानी गई। चुनाव परिणाम में भी मदन कौशिक अपनी सीट तो बचा ले आए लेकिन हरिद्वार जिले में भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। इस वजह से मदन कौशिक का नाम मंत्रिमंडल की लिस्ट से बाहर हो गया। अब उनकी अध्यक्ष की कुर्सी भी खतरे में है।
क्षेत्रीय संतुलन बिठाना जरुरी
भाजपा हाईकमान को अब प्रदेश में क्षेत्रीय संतुलन बिठाना है। जिस वजह से कांग्रेस में बगावत हो रही है, उसी कारण को ठीक करने की चुनौती अब भाजपा के लिए भी है।भाजपा हाईकमान नहीं चाहेगा कि जिस तरह का विरोध कांग्रेस में हो रहा है उस तरह की आवाज भाजपा के अंदरखाने सुनाई दे। इसका असर उपचुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक दिखाई पड़ सकता है। प्रदेश की राजनीति हमेशा गढ़वाल और कुमाऊं के संतुलन के साथ ही फिट बैठाई जाती है। लेकिन इस बार कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही गढ़वाल की अनदेखी की है। जिससे गढ़वाल के विधायक और सांसदों में नाराजगी साफ देखी जा रही है। कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य , उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी तीनों कुमाऊं को दे दिए जबकि भाजपा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केन्द्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट भी कुमाऊं से है। प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक तराई से आते हैं। जिस वजह से अब गढ़वाल से प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग तेज हो गई है। जिस वजह से पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक का नाम तेजी से लिया जा रहा है। निशंक संगठन और सरकार दोनों में ही अहम भूमिका निभा चुके हैं। गढ़वाल से प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर निशंक का ही दावा मजबूत माना जा रहा है। जो कि लोकसभा चुनाव के लिहाज से अहम है।












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