​कृषि कानून के बाद अब उत्तराखंड में गन्ने के दाम पर सियासी महाभारत, कांग्रेस ने बनाई रणनीति

उत्तराखंड में गन्ने के दाम घोषित न होने को लेकर कांग्रेस मुखर

देहरादून, 12 अक्टूबर। उत्तराखंड में चुनावी साल में किसानों की समस्या राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा रही है। पहले कृषि कानून और अब गन्ने के दाम को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। किसानों के मुद्दे भाजपा के लिए केन्द्र, यूपी और उत्तराखंड तीनों जगह चेलेंज साबित हो रहा है। तीनों जगह भाजपा की सरकार हैं। ऐसे में उत्‍तराखंड में कांग्रेस और हरीश रावत किसानों की समस्‍याएं को पुरजोर तरीके से उठा रही हैा

After the agriculture law, now the political Mahabharata on the price of sugarcane in Uttarakhand, Congress has made a strategy

सानों की समस्याएं बन रहे चुनावी मुद्दे

चुनावी साल में किसानों की समस्याएं विपक्ष के लिए चुनावी मुद्दे बनते जा रहे हैं। पहले तराई क्षेत्र में किसानों के आंदोलन को लेकर विपक्ष एकजुट नजर आया। अब गन्ने के दाम को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री औ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने गन्ने के दाम घोषित न होने पर चीनी मिलों पर धरना देने का ऐलान किया है। सोमवार को इसकी शुरूआत भी हरीश रावत ने कर दी। दिल्ली से लौटते समय हरीश रावत ने लिब्बरहेड़ी चीनी मिल पर करीब आधे घंटे तक मौन धारण कर धरना दिया। धरना देते समय हरीश रावत के साथ बड़ी संख्या में उनके समर्थक चीनी मिल पर मौजूद रहे। धरने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर जल्द गन्ने का दाम घोषित नहीं किया तो प्रदेश का किसान चीनी मिलों पर धरना देगा। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास किसानों के लिए कोई योजना और नीति नहीं है।

चीनी मिल पर धरना
दिल्ली में यशपाल आर्य को कांग्रेस ज्वाइन कराने के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत सोमवार को देहरादून लौट आए। देहरादून लौटते समय उन्होंने कहा कि वह दिल्ली से देहरादून जाते समय रास्ते में मंगलौर के पास उत्तम चीनी मिल लिब्बरहेड़ी पर धरना देंगे। इसकी जानकारी मिलते ही विधायक काजी निजामुद्दीन और उनके समर्थक चीनी मिल पर पहुंच गए। शाम में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत चीनी मिल पर पहुंचे और गेट पर धरना देकर बैठ गए। धरने के बाद उन्होंने कहा कि चीनी मिलें पेराई सत्र शुरू करने वाली हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक गन्ने का मूल्य घोषित नहीं किया है, जबकि पंजाब और उत्तर प्रदेश सरकारों ने गन्ने का मूल्य घोषित कर दिया है।
पहले कृषि कानून बिल और अब गन्ने का दाम राज्य सरकार के लिए तराई क्षेत्र में बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है। तराई सीटों पर पहले ही भाजपा को किसानों का विरोध झेलना पड़ रहा है। ऐसे में अब गन्ना मूल्य धामी सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर रहा है। इस मुद्दे को हरीश रावत ने सियासी हथियार बनाकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।

खुद को किसानों का हितेषी बता रही कांग्रेस

कांग्रेस किसानों के मुद्दों को लगातार चुनावी मुद्दे बनाने में जुटी हैा कांग्रेस को इस बार तराई क्षेत्र में किसानों के विरोध का राजनैतिक लाभ मिलने की उम्मीद है। पहले से देशभर में किसान भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल हुए हैं। ऐसे में 20 से ज्यादा तराई सीटों कांग्रेस खुद को किसानों का हितेषी पेश कर रही है। जिससे चुनाव में इसका फायदा मिल सके। ऐसे में गन्ना किसानों का समर्थन कांग्रेस को संजीवनी दे सकता है। जिसकी लड़ाई हरीश रावत लड़ने का ऐलान कर चुके हैं।

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