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सुंदरढुंगा ग्लेशियर में 15 हजार फीट ऊंचे कनाकटा दर्रे को 9 साल के केविन साहा ने पार कर ऐसे बनाया रिकॉर्ड

बागेश्वर जिले के सुंदरढुंगा ग्लेशियर क्षेत्र में 15,000 फीट ऊंचे कनाकटा दर्रे को बेंगलुरु से आए ट्रैकिंग दल ने पार कर इतिहास रच दिया है। इसमें एक खास रिकॉर्ड 9 साल के केविन साहा ने बनाया है। केविन इस ट्रैकिंग दल में शामिल थे। जिन्होंने अपनी छोटी उम्र के बावजूद बड़े-बड़े पर्वतों को चुनौती दी।

सात दिन के इस दुर्गम अभियान में बेंगलुरू के नौ सदस्य शामिल रहे। कनाकटा दर्रा पार करने का इस वर्ष का यह पहला सफल अभियान है। बागेश्वर जिले में सुंदरढूंगा घाटी में स्थित 15,000 फीट ऊंचे कनाकटा दर्रे को नौ वर्षीय बालक ने अपनी ट्रैकिंग टीम के साथ पार कर एक अनोखा कीर्तिमान स्थापित किया है।

9-year-old Kevin Saha record crossing 15 thousand feet high Kanakata pass Sundardhunga Glacier

सात दिवसीय अभियान ट्रेकिंग समूह "ट्रेक विद दानू" के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस अभियान के गाइड जीतू दानू रहे, जो वर्षों से हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग करा रहे हैं। दल के गाईड जीतू दानू ने बताया कि, केविन की लगन और हिम्मत देखकर हम सब हैरान रह गए। इतनी कम उम्र में इतनी ऊंचाई और मुश्किल रास्ता पार करना बहुत बड़ी बात है। बर्फीले रास्ते, कठिन चढ़ाइयां और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियों को मात देते हुए केविन ने साबित कर दिया कि जज्बा और धैर्य से हर लक्ष्य को पाया जा सकता है। केविन की यह यात्रा प्रेरणा बन गई है उन सभी के लिए, जो रोमांच और प्रकृति से प्रेम रखते हैं।

बागेश्वर जिले में कनाकटा, सुंदरढुंगा, पिंडारी और मैकतोली जैसे ट्रेक्स अब विश्वभर के ट्रैकरों को आकर्षित कर रहे हैं। यह उपलब्धि न केवल 9 साल के केविन की जीत है, बल्कि यह उत्तराखंड को साहसिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान भी देती है। नौ साल की उम्र में इस स्तर का साहस और समर्पण सचमुच प्रेरणादायक है। केविन ने यह दिखा दिया कि पर्वतों की ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए उम्र नहीं, हौसला चाहिए।

उधर रूद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि ब्लॉक के उप तहसील बसुकेदार के क्यार्क गांव निवासी और राजकीय जूनियर हाईस्कूल सेमी-गुप्तकाशी के शिक्षक नवीन जोंटी सजवाण ने चार सदस्यीय दल के साथ दुनिया के सबसे ऊंचे और कठिन दर्रों में शामिल बाली पास दर्रा सफलतापूर्वक पार करते हुए तिरंगा लहराया। उन्होंने चार दिन में यह कठिन अभियान पूरा करते हुए नई उपलब्धि हासिल की है। शिक्षक सजवाण पूर्व में भी कई सहासिक यात्राएं कर चुके हैं। उनकी इस उपलब्धि पर केदारनाथ विस की विधायक सहित विभागीय अधिकारियों के साथ ही शिक्षक संगठन और अन्य क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने बधाई दी है।

26 मई को समुद्रतल से 16200 फीट की ऊंचाई पर स्थित बाली दर्रा को फतह करने के लिए शिक्षक नवीन जोंटी ने अपने तीन साथियों के साथ उत्तरकाशी जनपद के गंगाड गांव से बाली दर्रा के लिए रवाना हुये। ओसला गांव से देवसू बुग्याल होते हुए रुइनसारा झील के निकट रात्रि प्रवास किया। दल अगली सुबह 27 मई को अपने अभियान पर आगे बढ़ते हुए थांगा बुग्याल से उड्यारी कैंप पहुंचा। यहां रात्रि प्रवास करते हुए दल 28 की रात्रि को बेस कैंप पहुंचा। थककर चूर होने के बावजूद 29 मई की सुबह 5.20 बजे शिक्षक नवीन जोंटी सजवाण और उनके साथ अपने मिशन को फतह करने के लिए आगे बढ़े। शिक्षक सजवाण ने सबसे पहले सिर्फ 45 मिनट में बेस कैंप से बाली दर्रा की चोटी पर पहुंचकर 6.05 बजे तिरंगा फहराया। उनके साथ के मुकेश मंजूल शर्मा ने यह दूरी 55 मिनट में पूरी की। शिक्षक सजवाण ने बताया कि 60 किमी ट्रैक जोखिमभरा है। यहां, विशालकाय हिमखंडों के साथ ही गहरी घाटी, ऊंची-ऊंची चट्टानी पहाड़ियां और कई जलधराएं हैं। बताया कि बाली दर्रा हर की दून घाटी को यमुनोत्री धाम से जोड़ता है। साथ ही यहां से काला नाग, बंदर पूंछ, स्वर्गारोहिणी आदि कई दुर्गम हिमच्छादित चोटियां नजर आती हैं। एक जून को चार सदस्यीय दल वापस देहरादून पहुंच गया है।

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