OPINION: यूपी के शहरों की बदल रही तस्वीर, वाराणसी को लेकर योगी सरकार का एक और बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश के कई शहरों की तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है। प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद योगी सरकार ने प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, मथुरा,कानपुर सहित कई शहरों का कायाकल्प हो रहा है। इन शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर को नया स्वरूप देने का काम किया गया है।
इसी कड़ी में वाराणसी शहर को अब एक और सुविधा से लैस करने की शुरुआत होने जा रही है। वाराणसी में दुनिया का सबसे आधुनिक घाट बनकर तैयार होने वाला है। नमो घाट के नाम से मशहूर इस हाई-टेक घाट में एक हेलीपैड, एक मिनी मल्टीमॉडल टर्मिनल और एक फ्लोटिंग सीएनजी स्टेशन होगा।

इसके अलावा जल्द ही घाट पर देश का पहला सीएनजी बोट सर्विस स्टेशन भी यहां बनाया जाएगा। वाराणसी नगर निगम ने इस अनूठी परियोजना के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने बताया कि गंगा में प्रदूषण कम करने के लिए नावों में सीएनजी किट लगाई गई हैं।
हालांकि तकनीकी समस्याओं के कारण इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण नाविक इन्हें हटा रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए नमो घाट पर सीएनजी बोट सर्विस स्टेशन बनाया जाएगा। सरकार के इस कम से यहां नाविकों को काफी सुविधा होने वाली है।
इस नए सर्विस स्टेशन में चार अलग-अलग कंपनियों के स्टॉल शामिल होंगे। नमो घाट का दूसरा चरण पूरा होने के बाद, स्टेशन पूरी तरह से चालू हो जाएगा। सर्विस सेंटर तीन घाटों की सेवा प्रदान करेगा, जिससे नाविक अपनी सीएनजी नावों की सर्विस आसानी से कर सकेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर गेल इंडिया की सहायता से नावों में सीएनजी किट लगाई गई है। 590 से ज्यादा नावों को पहले ही सीएनजी में बदला जा चुका है। इस रूपांतरण से न केवल गंगा में प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है, बल्कि डीजल की तुलना में सीएनजी की कम लागत के कारण नाविकों को आर्थिक लाभ भी होता है।
नाविकों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए सर्विस स्टेशन पर एक दर सूची प्रदर्शित की जाएगी। इसका उद्देश्य किसी भी तरह की अधिक कीमत वसूलने से रोकना और स्टेशन पर दी जाने वाली सेवाओं में पारदर्शिता लाना है।
नमो घाट के अलावा वाराणसी के दो अन्य घाटों पर भी सीएनजी नावों के लिए इसी तरह के सर्विस स्टेशन बनाए जाएंगे। ये प्रयास गंगा को भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक स्वच्छ और अधिक टिकाऊ बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
इन सुविधाओं की शुरूआत पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, साथ ही स्थानीय नाविकों को आर्थिक रूप से सहायता भी प्रदान करती है। डीजल की तुलना में सीएनजी नावों के संचालन की कम लागत नाविकों को पैसे बचाने और पर्यावरण संरक्षण में सकारात्मक योगदान करने में मदद करती है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इनसे न केवल तकनीकी प्रगति होगी, बल्कि वाराणसी और इसकी प्रतिष्ठित नदी के लिए पर्याप्त पर्यावरणीय लाभ भी होगा।












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