काम की बात: योगी सरकार ने पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर किया बड़ा फैसला, जानिए किसे होगा लाभ?
UP family property Division: उत्तर प्रदेश में पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिससे लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 2 सितंबर (मंगलवार) को योगी मंत्रिमंडल ने संपत्ति बंटवारे से जुड़े दस्तावेजों पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन शुल्क की अधिकतम सीमा 5,000 रुपये निर्धारित करने को मंजूरी दे दी है।
पहले, पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे पर संपत्ति के कुल मूल्य का चार प्रतिशत स्टाम्प शुल्क और एक प्रतिशत पंजीकरण शुल्क देना पड़ता था। इस भारी-भरकम शुल्क के कारण कई परिवार अपनी संपत्ति का आधिकारिक पंजीकरण कराने से हिचकिचाते थे, जिससे दीवानी और राजस्व अदालतों में संपत्ति विवादों की संख्या बढ़ रही थी।

राज्य सरकार के बयान के अनुसार, इस नए प्रावधान से मुकदमों में कमी आने, पारिवारिक विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान होने और भूमि व राजस्व रिकॉर्ड के अद्यतनीकरण में आसानी होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, बाजार में संपत्तियों की उपलब्धता भी बढ़ेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, इस बदलाव से सरकार को राजस्व का प्रारंभिक नुकसान होने की संभावना है। स्टाम्प शुल्क में 5.58 करोड़ रुपये और पंजीकरण शुल्क में 80.67 लाख रुपये का नुकसान अनुमानित है। फिर भी, सरकार को विश्वास है कि पंजीकरण की संख्या में वृद्धि से यह नुकसान भर जाएगा और समय के साथ राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से ही ऐसी व्यवस्थाएं लागू हैं। अब उत्तर प्रदेश में भी ऐसी ही प्रणाली लागू होने से लोगों को संपत्ति के बंटवारे में कम परेशानियों का सामना करना पड़ेगा और कानूनी जटिलताएं कम होंगी।












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