योगी के नए मंत्रिमंडल पर दिल्ली में मंथन: जानिए कितने मंत्री लेंगे शपथ, कौन बन सकता है डिप्टी CM
लखनऊ, 16 मार्च: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार दोबारा बनने जा रही है। सरकार बनने से पहले योगी ने दिल्ली जाकर पीएम मोदी समेत तमाम वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद जैसे ही वह लखनऊ पहुंचे वैसे ही बीजेपी ने देश के गृहमंत्री अमित शाह को यूपी का पर्यवक्षक बनाने की घोषणा की। अब अमित शाह की अगुवाई में ही योगी के मंत्रिमंडल का खाका खींचा जा रहा है। इसको लेकर सीएम आदित्यनाथ अब सुबह ही दिल्ली पहुंच गए हैं। बीजेपी के सूत्रों की माने तो सबसे ज्यादा माथापच्ची यूपी में डिप्टी सीएम के नामों को लेकर है क्योंकि केशव प्रसाद मौर्य चुनाव हार गए हैं।

डिप्टी सीएम पद को लेकर दबाव में संगठन
योगी कैबिनेट में नामों को लेकर एक तरफ दिल्ली में मंथन चल रहा है वहीं दूसरी ओर लखनऊ के सियासी गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है। सूत्रों की माने तो इस बार दोनों डिप्टी सीएम डॉ दिनेश शर्मा और केशव मौर्य का पत्ता कट सकता है। शर्मा को संगठन में ले जाए जाने की बात हो रही है कि जबकि केशव को लेकर संगठन पर दोहरा दबाव है। पहला दबाव ये है कि हारने के बाद भी यादि केशव को डिप्टी सीएम जैसा भारी भरकम पद मिलता है तो इससे पार्टी के भीतर एक नई परिपाटी शुरू होगी और कई लोग इसका विरोध करेंगे। दूसरा यह कि केशव जैसे चेहरे को साइडलाइन करना भी इतना आसान नहीं है क्योंकि वह ओबीसी वर्ग के एक बड़े चेहरा हैं और मोदी सरकार को दो साल बाद ही चुनाव में जाना है।

दिनेश शर्मा को संगठन मिल सकती है जगह
संगठन के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती सरकार में डिप्टी सीएम डॉ दिनेश शर्मा की है। संगठन से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि दिनेश शर्मा को संगठन में अहम भूमिका दी जा सकती है। उनकी जगह मोदी के खास और वर्तमान में एमएलसी एके शर्मा को जगह दी जा सकती है। योगी की पिछली सरकार में भी उनके कैबिनेट में आने की चर्चाएं थी लेकिन वह सरकार में आने में असफल रहे थे जिसके बाद उन्हें प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया गया था। शर्मा के अलावा चार नाम और हैं जो डिप्टी सीएम की रेस में हैं।

दलित चेहरे को मिल सकता है डिप्टी सीएम का पद
संगठन से जुड़े लोगों का दावा है कि पार्टी ने यदि दलित चेहरे को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला किया तो बेबीरानी मोर्या और असीम अरूण के बीच तगड़ी टक्कर मानी जा रही है। चूंकि दोनों जाटव समाज से ही आते हैं इसलिए इनकी दावेदारी भी तगड़ी है। बताया जा रहा है कि असीम अरूण योगी के खास अफसर रहे हैं। उन्हें कानपुर का कमिश्नर बनाया गया था लेकिन योगी के कहने पर उन्होंने इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। उस समय वह एडीजी रैंक के अधिकारी थे।

ब्राह्मण चेहरों में ब्रजेश पाठक और लक्ष्मीकांत वाजपेयी दावेदार
यूपी में पार्टी ने अगर किसी ब्राह्मण चेहरे को डिप्टी सीएम बनाया तो ब्रजेश पाठक और लक्ष्मीकांत वाजेपयी के नाम पर जरूर विचार होगा। ब्रजेश पाठक योगी की पिछली सरकार में भी मंत्री थे लेकिन उनका परफार्मेंस उतना सही नहीं था। योगी की सरकार में उन्हें कानून मंत्री बनाया गया था। वहीं दूसरी ओर लक्ष्मीकांत वाजपेयी का नाम इस सूची में चौंका सकता है। वाजपेयी को योगी का खास भी माना जाता है और जिस तरह से उन्हें ज्वाइनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया गया उससे ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस बार वाजपेयी का सितारा चमक सकता है। वाजपेयी यूपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं और उनकी अगुवाई में बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया था।

दिल्ली में मंत्रिमंडल पर चल रहा मंथन
उत्तर प्रदेश में दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे योगी आदित्यनाथ दिल्ली में हैं। बीजेपी ने गृहमंत्री अमित शाह को यूपी का पर्यवेक्षक बनाया है। सूत्रों की माने तो दिल्ली में अगली सरकार के कैबिनेट का पूरा खाका तैयार किया जा रहा है। लखनऊ की जीत के बाद दिल्ली में आलाकमान के साथ मंथन का दौर चल रहा है। अगले 5 साल तक सरकार चलाने का रोडमैप बनाने के लिए बड़े नेताओं के साथ दिल्ली में योगी आदित्यनाथ की बैठक चल रही है।

होली के बाद शपथ ग्रहण!
योगी आदित्यनाथ का शपथ ग्रहण होली के बाद 20 या 21 मार्च को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में होगा जिसको लेकर तैयारियां शुरू हो गईं हैं। सरकार और बीजेपी से जुड़े सूत्रों की माने तो योगी के साथ 57 मंत्री ले सकते हैं शपथ जिसमें 22-24 कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं। इस मंत्रिमंडल में 7-9 स्वतंत्र प्रभार मंत्री बन सकते हैं। शपथ लेने के बाद योगी सरकार के सामने बड़ी जनादेश के साथ आई बड़ी उम्मीदों को पूरा करने की चुनौती भी होगी। इसलिए माना जा रहा है कि योगी ने आलाकमान के साथ बैठक में चुनाव प्रचार में किए गए कई अहम वादों और मुद्दों पर भी चर्चा होगी।












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