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YEIDA News: 4450 करोड़ वापस लाने के लिए one-time settlement Scheme चलाएगा प्राधिकरण

उत्तर प्रदेश के नोएडा में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है। इस निवेश को धरातल पर उतारने में ईडा जुटा हुआ है। इडा अब यहां बिल्डरों के लिए वन टाइम सेटलमंट स्कीम चलाने जा रही है।

योगी आदित्यनाथ

The Yamuna Expressway Industrial Development Authority: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे यूपी में निवेश को लेकर अभियान छेड़े हुए हैं। इस अभियान में प्राधिकरण भी उनकी मदद कर रहे हैं। ईडा के अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही अथॉरिटी की तरफ से one-time settlement की योजना चलाई जाएगी। प्राधिकरण की कोशिश 14 बिल्डरों के यहां बकाया 4450 करोड़ की रकम रिकवर करने की है। इस योजना के तहत कम से कम 10,000 पंजीकरणों का निराकरण होगा।

बकाए की वसूली के लिए ईडा चलाएगी ये स्कीम

अधिकारियों की माने तो YEIDA करीब 4,457 करोड़ बकाए की रकम को वापस पाना चाहता है। उसमें से 2,753 करोड़ रुपये भूमि प्रीमियम, 1,408 करोड़ रुपये किसानों के लिए अतिरिक्त मुआवजे और 296 करोड़ रुपये लीज रेंट के थे। ऐसा माना जा रहा है कि इस स्कीम के लागू होने के बाद बिल्डरों को करीब एक हजार करोड़ रुपये बचाने में मदद मिलेगी।

ईडा की स्कीम से मिलेगी खरीददारों को मदद

अधिकारियों ने बताया कि प्राधिकरण के इस कदम से मुख्य रूप से परियोजनाओं को पूरा करने, कब्जा जारी करने और पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने और रजिस्ट्रियों के निष्पादन में मदद मिलेगी। बिल्डरों की निष्क्रियता की वजह से एनसीआर में हजारों होमबॉयर्स की चिंता बढ़ गई थी। अधकारी बताते हैं कि बिल्डरों और खरीददारों के बीच मुद्दों को हल करने के लिए ईडा नए विकल्पों को आजम रही है। इसी दिशा में एकमुश्त भुगतान योजना के साथ आगे बढ़ने की योजना बनाई है।

जल्द शुरू करेंगे OTS स्कीम

इस योजना को लेकर नोएडा के सीईओ अरुणवीर सिंह कहते हैं कि बिल्डरों से बकाया रकम की वापसी के लिए हम एक मुश्त समाधान योजना शुरू कर रहे हैं। लेकिन इस योजना को शुरू होने से पहले हम डेवलपर्स से बातचीत ताकि अधिक से अधिक लोग इस समाधान का लाभ उठा सकें। इस योजना के माध्यम से हम योजनाओं को पूरा होने में आ रही अड़चने को दूर करना चाहते हैं।

इन नामी कम्पनियों में अटकी है फ्लैटों की रजिस्ट्री

अधिकारियों ने बताया कि YEIDA की सूची में बड़े डिफॉल्टर्स में सुपरटेक, एसडीएस इंफ्राकॉन, सनवर्ल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑरिस डेवलपर्स, लॉजिक्स, एटीएस रियल्टी ग्रीन बे डेवलपर्स और सेक्टर 22डी, 22ए और 26ए में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, जहां फ्लैटों की रजिस्ट्री अटकी हुई है।

डेवलपर्स के बकाए की वजह से प्रोजेक्ट लंबित

दरअसल नोएडा में डेवलपर्स के बढ़ते बकाये की वजह से कई प्रोजेक्ट लंबित पड़े हैं। कुछ आवास परियोजनों में खरीददारों को उनके फ्लैटों का कब्जा भी सौंप दिया गया है लेकिन पंजीकरण की प्रक्रिया अभी भी लंबित है। इसको देखते हुए बिल्डर्स एसोसिएशन ने यूपी सरकार से मांग की थी कि हरियाणा सरकार की तरह यहां भी योजना चलाई जाए जिससे बिल्डर्स अपने बकाये के मुद्दों को हल कर सकें।

उन परियोजनाओं का क्या जो दिवालियापन का शिकार हैं?

सुपरटेक अपकंट्री बायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश चंद्रा के मुताबिक, "ऐसा लगता है कि डेवलपर्स किसी भी बकाया को चुकाने में दिलचस्पी नहीं रखते हैं। अगर दंडात्मक ब्याज का हिस्सा काट दिया जाता है तो कई बिल्डरों को राशि का भुगतान करना होगा। लेकिन दूसरी चिंता ये है कि उन परियोजनाओं का क्या होगा जो दिवालिएपन में हैं?

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