चुनाव जीतने के लिए साधनी पड़ेगी SC-ST सीटों की गणित, जानिए 'जय भीम' की जगह जय अंबेडकर क्यों बोल रही BJP
लखनऊ, 30 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी हर समुदाय को साधने की कवायद में जुटी है। मिशन 2022 में जुटी बीजेपी अब अपने गेम प्लान के हिसाब से आगे बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि बीजेपी हर समुदाय को साधने में जुटी है क्योंकि उसे पता है कि हर वर्ग को साधे बिना चुनाव वैतरणी को पार कर पाना मुश्किल है। विपक्ष भी इन जातियों से जुड़े वोट बैंक को सहेजने में पूरी तरह से जुटा हुआ है। इसी को देखते हुए बीजेपी ने विधानसभा और वार्ड स्तर पर अब दलितों में पैठ बनाने के उद्देश्य से अभियान चलाया है। इसके तहत अब छोटी छोटी बैठकों में भी प्रदेश स्तर के नेताओं के कार्यक्रम लगाए जाएंगे। सबसे रोचक है कि बीजेपी ने जय भीम को काउंटर करने के लिए जय अंबेडकर का नारा दिया है।

भाजपा पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने दलितों में पैठ बनाने की जिम्मेदारी सूबे के पूर्व डीजीपी व एससी-एसटी आयोग के चेयरमैन बृजलाल को जिम्मेदारी सौपी है। दलितों में पैठ बनाने की कवायद के तहत एससी-एसटी बाहुल्य सीटों पर बड़े दलित नेताओं को उतारने की तैयारी है। ये विधानसभाओं में छोटे-छोटे कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। कानपुर में भाजपा की 3 सीट सीसामऊ, कैंट और आर्य नगर में दलित वोट बैंक निर्णायक भूमिका अदा करता है।
वार्ड स्तर और विधानसभा स्तर पर हो रही हैं बैठकें
अभी तक भाजपा प्रदेश लेवल पर सामाजिक बैठकें कर रही है। इसके बाद अब भाजपा सभी जिले और प्रत्येक विधानसभा व वार्ड स्तर पर टोली, सामाजिक व छोटी-छोटी बैठकें करेगी। इसमें बस्तियों और दलित के बीच में होने वाली छोटी-छोटी बैठकों में बड़े नेता भी शामिल होने के लिए आएंगे। इन बैठकों में भाजपा के सांसद, मंत्री, विधायक और बड़े पदाधिकारी भी शामिल होंगे। सभी वर्गों का सम्मेलन भाजपा प्रदेश स्तर पर कर रही है। जिलों में भी सभी वर्गों के सम्मेलन किए जाएंगे।

लखनऊ के मोहनलालगंज निर्वाचन क्षेत्र के दलित सांसद, कौशल किशोर कहते हैं कि,
''भाजपा 'जय भीम' के बजाय 'जय अंबेडकर' के नारे के तहत प्रचार करेगी क्योंकि पूर्व अधिक समावेशी है और किसी भी पार्टी से संबंधित नहीं है। वे 'जय भीम' का नारा लगाते रहते हैं और लोगों से जाति के आधार पर वोट करने के लिए कहते हैं। वह (मायावती) 'जय भीम' कहती हैं, लेकिन उनके विचारों से उनका कोई लेना-देना नहीं है। वे सिर्फ सत्ता हासिल करना चाहते हैं। डॉ अम्बेडकर जाति के खिलाफ थे लेकिन जय भीम को एक विशेष पार्टी का नारा बना दिया गया है।''
मायावती व अखिलेश ने बहुत वादे किए
बीजेपी के एक पदाधिकारी ने कहा कि मायावती और अखिलेश यादव दोनों ने बड़े-बड़े वादे किए हैं, लेकिन यह हमारी मोदी सरकार है जिसने नीट परीक्षा में ओबीसी छात्रों को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया है। इसी तरह, हमारी आवास योजनाओं, उज्ज्वला योजना (एलपीजी कनेक्शन के लिए) ने लाखों दलित परिवारों को लाभान्वित किया है। हम खोखले वादे नहीं करते। सभी सांसद राशन वितरण की जांच करने और व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता का आकलन करने के लिए राशन की दुकानों का भी दौरा करेंगे।

दलितों में भी जाटव वोट पर बीजेपी का ज्यादा फोकस
दरअसल बीजेपी ने अपनी रणनीति के तहत ही दलितों में पैठ बनाने के लिए ही बेबीरानी मौर्या को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। एक तरफ जहां कौशल किशोर दलित समाज से आते हैं वहीं बेबीरानी मौर्य दलितों उपजाति जाटव समाज से आती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यूपी की 403 सीटों में से 86 सीटें आरक्षित कोटे में थीं जिसमें बीजेपी ने 76 सीटों पर कब्जा जमाया था। बसपा के खाते में 2 महज सीट ही आईं थीं। यूपी में ओबीसी के बाद 20-21 फीसदी संख्या दलितों की है। इसमें भी बड़ी संख्या में जाटव हैं जिसपर बीजेपी फोकस कर रही है।
जाटवों के विकास और समृद्धि का आश्वासन दे रही बीजेपी
बेबीरानी मौर्य कहती हैं कि, "मैं इस जाति में पैदा हुई थी। मेरा परिवार चमड़े और जूतों के काम में था और अब भी है। जाटव के तौर पर मैं करीब तीन दशक से बीजेपी के साथ हूं।'' यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा को जाटव वोट दिलाने के लिए आश्वस्त हैं, मौर्य ने कहा, '' मायावती ने उनको एक वोट बैँक के तौर पर इस्तेमाल किया। इस समुदाय के गरीब अंततः उस पार्टी के साथ होंगे जिसने उन्हें शिक्षा, विकास और समृद्धि का आश्वासन देगा।''
उन्होंने कहा कि,
''कैडर बेस वोट (बसपा के) के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकती, लेकिन यह एक सच्चाई है कि हम चाहते हैं कि वे (जाटव) भाजपा के साथ आएं। आखिरकार, जो लोग अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा या रोजगार चाहते हैं, वे निश्चित रूप से कहीं न कहीं जाएंगे और हमारी सरकार जो अच्छे काम कर रही है, उसके आधार पर हम निश्चित रूप से उन्हें अपने पक्ष में करना चाहेंगे।''












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