सपा और सहयोगी दलों के बीच सीटों को लेकर नहीं बन पा रही सहमति, जानिए कहां फंस रहा पेंच
लखनऊ, 4 फरवरी: उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल के बीच सभी दल अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव गठबंधन को लेकर एक एक कदम संभलकर उठा रहे हैं वहीं दूसरी ओर सीटों को लेकर सुभासपा और अपना दल के बीच अब तक सबकुछ सही नहीं हो पाया है। मनमाफिक सीटों के चक्कर में ये दल अखिलेश की परेशानियां बढ़ा रहे हैं। अखिलेश ने अपना दल के लिए सिराथू विधानसभा छोड़ी थी और वहां से उम्मीदवार भी उतार दिया था लेकिन अब उम्मीदवार ही चुनाव लड़ने से मना कर रहा है। उनका आरोप है कि उनको वो सीट दी जाए जहां वो जीतने की स्थिति में है। यही स्थिति कई अन्य सीटों पर भी है जिसका हल अब तक अखिलेश नहीं निकाल पाए हैं।

सुभासपा और अपना दल से सीटों का लेकर नहीं निकला हल
विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और अपना दल (कमेरावादी) के साथ इस समय कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इन दलों के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी से खींचतान चल रही है। यही कारण है कि शुरू में हर मुद्दे पर बयान में अग्रणी रहने वाले सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर की आवाज धीमी पड़ गयी है। इसका कारण है कि दोनों दल अपनी कुछ चुनिंदा सीटों को ही चाहते हैं, लेकिन सपा उन्हें नहीं दे रही है। अभी भी दोनों दल अखिलेश यादव पर सीटों को लेकर दबाव बनाये हुए हैं।

बेटे को टिकट नहीं दिला पाए स्वामी, खुद की सीट बदली
उधर भाजपा को छोड़कर समाजवादी पार्टी में गए स्वामी प्रसाद मौर्य भी सहज नहीं हैं। इसका कारण है कि लड़के को टिकट को लेकर ही वे समाजवादी पार्टी में गये थे, लेकिन उनकी यह इच्छा समाजवादी पार्टी ने भी नहीं पूरी की। इससे वे असहज हो गये हैं। सूत्रों की मानें तो स्वामी प्रसाद मौर्य की समाजवादी पार्टी में कोई बात सुनी नहीं जा रही है। यहां तक की स्वामी की सीट को भी दबल दिया गया। हालांकि सपा के नेता यह दलील दे रहे हैं कि स्वामी के बड़े लीडर हैं इसलिए उन्हें एक सीट तक समेटना ठीक नहीं है। सपा मुखिया ने उनके लिए पूरी प्लानिंग की है।

जहां जीतने की स्थिति हो वहीं मांग रहे हैं टिकट
समाजवादी पार्टी के दोनों सहयोगी दल अपनी-अपनी बिरादरी की बहुलता वाले विधानसभा सीटों से ही अपने प्रत्याशी उतारना चाहते हैं। इन लोगों ने जातिगत समीकरण वाले सीटों की सूची भी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को बहुत पहले ही सौंप दी थी, लेकिन समाजवादी पार्टी ने कई सीटें ऐसी दी हैं, जिन पर न तो इनके जातिगत समीकरण ठीक बैठते हैं और न ही उनके किसी नेता का वहां वर्चस्व है। सूत्रों की मानें तो सुभासपा की मांग है कि उसे अवध की लखीमपुर, सीतापुर के अलावा अधिक से अधिक सीट पूर्वांचल में दी जाएं। खासतौर पर वाराणसी, बलिया, गाजीपुर, मऊ और देवरिया की सीटों पर उन्हें लड़ाया जाय।

कृष्णा पटेल ने मनमाफिक सीटों पर की है दावेदारी
इसी प्रकार अपना दल (कमेरावादी) की अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने भी वाराणसी, प्रयागराज और प्रतापगढ़ की उन सीटों पर ही दावेदारी कर रखी थी, जिन पर कुर्मी मतदाताओं की संख्या अधिक है, लेकिन सपा ने पल्लवी पटेल को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ कौशांबी की सिराथू सीट पर उतार दिया। इसे लेकर अपना दल के नेता असहज महसूस कर रहे हैं। इस सीट की घोषणा के तत्काल बाद ही पार्टी महासचिव पंकज पटेल निरंजन ने अपनी मंशा से अवगत करा दिया था।

पिंडरा सीट और रोहनियां सीट मांग रही अपना दल
पार्टी सूत्रों के अनुसार कृष्णा पटेल का सबसे अधिक जोर वाराणसी की रोहनिया या पिंडरा सीट को लेकर है, लेकिन समाजवादी पार्टी इन सीटों को अपने लिए सबसे अधिक उपयुक्त मान रही है। इसलिए सपा उन्हें किसी और जिले में सीटें देने की बात पर अड़ी है। ऐसे में दोनों दलों के बीच वाराणसी की किसी एक सीट को लेकर रस्साकसी चल रही है। उधर, अखिलेश यादव सुभासपा को 16 सीटें दिए जाने के पक्ष में हैं। सुभासपा अभी तक पांच सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार चुकी है। सपा और सुभासपा के बीच अब भी कुछ सीटों पर सहमति नहीं बन पा रही है। संभावित है कि एक-दो दिन में आपसी तालमेल बना ली जाएगी।
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