• search
उत्तर प्रदेश न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

सहारनपुर: बवाल के पीछे की अब तक की पूरी कहानी और उसका असर

By Rajeevkumar Singh
|

दिल्ली। सहारनपुर में एक महीने के अंदर तीन बड़े बवाल का होना किसी अनहोनी का संकेत है। इन तीनों बवालों के केंद्र में दलित है। 20 अप्रैल को सड़क दूधली में अंबेडकर शोभायात्रा बवाल हो या 5 मई को शब्बीरपुर में राजपूतों से हुआ संघर्ष या फिर 9 मई को सहारनपुर में दलितों की भीम सेना का हिंसक उपद्रव, तीनों बवालों में दलित शामिल रहे। इन बवालों को रोकने में पुलिस और प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। मंगलवार को हुए उपद्रव के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भले ही सहारनपुर से दो एएसपी को हटाकर एक्शन लिया हो लेकिन यह नाकाफी है। चिंगारी अभी भड़की है, अगर सरकार समय पर न चेती तो पूरे प्रदेश का माहौल बिगड़ सकता है।

Read Also: सुलगता सहारनपुर, बवाल के लिए जिम्मेदार कौन, क्या प्लान्ड है सबकुछ?

सांप्रदायिक संघर्ष के बजाय दलित-ऊंची जाति संघर्ष

सांप्रदायिक संघर्ष के बजाय दलित-ऊंची जाति संघर्ष

सहारनपुर से अक्सर साप्रदायिक संघर्ष की खबरें आती रही हैं लेकिन यूपी में भाजपा की योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद पिछले एक महीने से यहां दलितों का उग्र संघर्ष देखने को मिल रहा है। 20 अप्रैल को सड़क दूधली में अंबेडकर की शोभायात्रा के दौरान दलितों का मुसलमानों के साथ संघर्ष हुआ। 5 मई को शब्बीरपुर में दलितों और राजपूतों के बीच हिंसक बवाल हुआ। शब्बीरपुर में हुई घटना के विरोध में 9 मई को दलितों की भीम सेना ने पूरे सहारनपुर को बवाल की आग में झोंक दिया।

सड़क दूधली में सांप्रदायिक संघर्ष में एक पक्ष दलित

सड़क दूधली में सांप्रदायिक संघर्ष में एक पक्ष दलित

सड़क दूधली में भाजपाइयों के साथ दलितों ने अंबेडकर शोभायात्रा निकाली जिसे पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो सांसद राघव लखनपाल समेत कई भाजपा नेता मौके पर पहुंच गए। पुलिस से नोंकझोंक के बाद शोभायात्रा आगे बढ़ी तो मुस्लिम मोहल्ले में कहीं से जुलूस पर किसी ने पत्थर फेंक दिया जिसके बाद बवाल हो गया। दोनों पक्ष बवाल करते रहे और पुलिस-प्रशासन इसको रोकने में नाकाम साबित हुआ जबकि वह मौके पर मौजूद था। भाजपा नेताओं ने पुलिस पर मुस्लिमों का साथ देने का आरोप लगाया। शोभायात्रा निकालनेवाले ज्यादातर युवा थे और इसको रोकने की कोशिश में लगी पुलिस के खिलाफ उनमें गुस्सा था।

शब्बीरपुर में महाराणा प्रताप जयंती पर राजपूत-दलित संघर्ष

शब्बीरपुर में महाराणा प्रताप जयंती पर राजपूत-दलित संघर्ष

महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर बड़गांव थानाक्षेत्र के शामिलाना गांव में एक आयोजन किया गया था। जयंती मनाने के लिए दूसरे गांवों से भी ठाकुर समाज के लोगों को आमंत्रित किया गया था जिस पर गांव शब्बीरपुर के कुछ ठाकुर युवक डीजे आदि लेकर जा रहे थे। इन युवकों का पहला दल तो गांव शब्बीरपुर से निकल गया था लेकिन जैसे ही दूसरा दल निकला तो थानाध्यक्ष बड़गांव ने इन युवकों को रोक दिया। दलितों ने भी ठाकुरों का विरोध किया। ठाकुरों के झुंड पर तब तक किसी ने पत्थर फेंक दिया जिसके बाद भारी बवाल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भारी संख्या में राजपूत पहुंचे और दलितों की बस्ती को जला दिया। इस बवाल में गोली लगने से एक की मौत हो गई।

9 मई को पूरे सहारनपुर में भीम सेना का भारी बवाल

9 मई को पूरे सहारनपुर में भीम सेना का भारी बवाल

शब्बीरपुर में राजपूतों ने दलितों की बस्ती जला दी। इसके विरोध में भीम आर्मी ने सहारनपुर के गांधी पार्क में सभा की जिसे पुलिस ने खदेड़ दिया। पुलिस की इस कार्रवाई पर दलित भड़क उठे और सहारनपुर के हर कोने से बवाल और आगजनी की खबरें आईं। पुलिस पर दलित युवाओं की भीड़ ने जमकर पथराव किया और वाहनों में आग लगा दी। एक पुलिस चौकी भी फूंक दी गई।

पुलिस-प्रशासन की बड़ी लापरवाई आई सामने

पुलिस-प्रशासन की बड़ी लापरवाई आई सामने

यूपी में भाजपा सरकार के आने के बाद सहारनपुर में जातीय संघर्ष और पुलिस बनाम दलित विवाद सामने आया। बवाल की साजिशों का पता लगाने में खुफिया विभाग नाकाम रहा। सहारनपुर के खराब हालात का जायजा लेने के लिए प्रमुख गृह सचिव और डीजीपी गए भी तो उन्होंने पीड़ित दलितों से जाकर कोई बात नहीं की। इस वजह से मंगलवार को हुए दलितों के बवाल में पुलिस के खिलाफ गुस्सा साफ दिखा।

सहारनपुर में दलितों की आर्थिक-राजनीतिक स्थिति बेहतर

सहारनपुर में दलितों की आर्थिक-राजनीतिक स्थिति बेहतर

सहारनपुर में दलितों की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति मजबूत है। जिस शब्बीरपुर गांव में महाराणा प्रताप जयंती को लेकर ठाकुरों और दलितों का बवाल हुआ, वहां के गांववालों का कहना है कि यहां दलित की प्रधानी की वजह से ठाकुर चिढ़ गए और पिछले कुछ महीनों से यहां तनाव है। दलितों ने इस गांव में जब अंबेडकर की मूर्ति लगानी चाही थी तो उसे भी राजपूतों ने लगाने नहीं दिया। ठाकुरों की वर्चस्व की राजनीति के खिलाफ अब दलित भी उठ खड़े हुए हैं और वो दबने को तैयार नहीं हैं। यह भी वजह है कि दलितों का जातीय संघर्ष उग्र रूप ले रहा है।

सहारनपुर में दलित संघर्ष में शामिल युवा

सहारनपुर में दलित संघर्ष में शामिल युवा

सहारनपुर में मंगलवार को हुए भारी बवाल में जो तस्वीरें सामने आईं, उनमें दलित युवाओं की संख्या काफी ज्यादा थी। ये दलित युवा सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं और ये काफी जागरूक हैं। इनको पता है कि कैसे चेहरा छिपाकर बवाल को अंजाम देना है। सहारनपुर में दलित युवाओं का गुस्सा साफ दिखा। यह आक्रोश और उग्र रूप ले सकता है। पूरे सहारनपुर में एक साथ दलितों ने जिस तरह से बवाल किया, उससे यह लगता है कि यह सुनियोजित था और इसमें फेसबुक व वाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया।

दलितों के गुस्से का बसपा उठा सकती है फायदा

दलितों के गुस्से का बसपा उठा सकती है फायदा

मंगलवार को हुए बवाल में दलितों का जो गुस्सा दिखा, उसका फायदा बहुजन समाज पार्टी जैसे राजनीतिक दल उठा सकते हैं जिनको इस बार के यूपी चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। अपनी खोई हुई जमीन पाने के लिए राजनीतिक पार्टियां इस गुस्से का इस्तेमाल कर सकती हैं। अगर सरकार, पुलिस और प्रशासन समय रहते नहीं जागी तो पूरे यूपी में यह जातीय संघर्ष बड़ा रूप ले सकता है।

Read Also: सहारनपुर में दलितों ने किया भारी बवाल, जलाई पुलिस चौकी, तस्वीरें

{promotion-urls}

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Why dalit became violent in Saharanpur?
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more