UP में अबकी बार कौन बनेगा डिप्टी सीएम, जानिए इन दो नामों पर क्यों हो रही चर्चा

लखनऊ, 11 मार्च: उत्तर प्रदेश में चुनाव सम्पन्न हो चुका है और नतीजे भी आ चुके हैं। कुछ ही दिनों में नई सरकार शपथ लेने वाली है लेकिन क्या आपको पता है कि इस बार यूपी का डिप्टी सीएम कौन होगा। क्या केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा को दोबारा दोबारा योगी मंत्रिमंडल में मिलेगी जगह या इनकी जगह दो नए चेहरे तलाशे जा रहे हैं जो इनकी जगह ले सकते हैं। बीजेपी के आला कमान ने इस बारे में भी सोचना शुरू कर दिया है। यूपी में बीजेपी में प्रचंड जीत मिलने के बाद दो ऐसे चेहरे सामने आए हैं जिन्हें बतौर डिप्टी सीएम योगी कैबिनेट में जगह मिल सकती है।

स्वतंत्रदेव

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह को मिल सकता है इनाम

उत्तर प्रदेश में जिस तरह से बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की है उससे बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह का कद बढ़ना पूरी तरह से तय है। अब सवाल इस बात का है कि उन्हें योगी कैबिनेट में जगह मिलेगी तो किस रूप में। बीजेपी के सूत्रों का दावा है कि प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते स्वतंत्रदेव सिंह को बतौर डिप्टी सीएम अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। स्वतंत्रदेव सिंह एक तो ओबीसी चेहरा हैं और दूसरे बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। पिछले कुछ समीकरणों पर गौर करें तो ये तस्वीर साफ होती नजर आ रही है। 2017 में जब बीजेपी की सरकार बनी थी तब केशव मौर्य बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे। तब बीजेपी को प्रचंड जीत का इनाम उनको मिला था। उन्हें एक ओबीसी चेहरे के तौर पर सरकार में जगह दी गई थी वही स्थिति स्वतंत्रदेव के साथ दोहरायी जा सकती है।

बीजेपी

बेबीरानी मौर्य की खुल सकती है किस्मत

यूपी में आगरा से चुनाव जीतने वाली बेबीरानी मौर्य भी यूपी की डिप्टी सीएम के तौर पर सरकार में दिखायी दे सकती हैं। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड की राज्यपाल रहीं बेबीरानी मौर्य को रणनीति के तौर पर यूपी ले आया गया था। यूपी लाने के बाद उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था और बाद में उन्हें बीजेपी ने एक दलित चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट किया था। बेबीरानी मौर्य भी उसी जाटव समाज से आती हैं जिससे मायावती ताल्लुक रखती हैं। बीजेपी की रणनीति बेबीरानी को एक दलित चेहरे को आगे करके मायावती के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने की है। इस बार के नतीजे बता रहे हैं कि बीजेपी ने दलित वोट बैंक में अच्छी सेंधमारी की है। लिहाजा 2024 चुनाव से पहले इसमें और धार देने के लिए बेबीरानी को बतौर डिप्टी सीएम सरकार में शामिल किया जा सकता है। ऐसा करके बीजेपी जाटव और खासतौर से दलित समाज को आसानी से साध सकती है।

केशव

वर्तमान डिप्टी सीएम डॉ दिनेश शर्मा और केशव मौर्य का दावा हुआ कमजोर

वर्तमान में योगी सरकार में दो डिप्टी सीएम काम कर रहे हैं। एक केशव मौर्य तो दूसरे डॉ दिनेश शर्मा। शर्मा को यूपी में एक ब्राह़मण चेहरे के तौर पर सरकार में शामिल किया गया था। लेकिन पिछले पांच साल के कामकाज पर नजर डालें तो उनको लेकर संगठन के पास फीडबैक अच्छी नहीं है। जनता के बीच उनको लेकर एक निगेटिव छवि बनी है। इसीलिए बहुत कम संभावना है कि नए मंत्रिमंडल में उनके नाम पर विचार किया जाए। इसी तरह दूसरे डिप्टी सीएम का दावा तो बेहद खराब हो चुका है। मौर्य तो सिराथू से चुनाव ही हार चुके हैं। चुनाव हारने के बाद वैसे भी उनपर दबाव ज्यादा है और सरकार में रहने या न रहने का फैसला पूरी तरह से आलाकमान ही तय करेगा। केशव मौर्य एक बड़े नेता हैं ऐसे में बीजेपी उनके लिए विकल्प तलाश सकती है और उन्हें राज्यसभा भी भेजा सकता है। वहां रहकर वो अपने समाज का प्रतिनिधित्व भी कर सकते हैं।

दिनेश शर्मा

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