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Rizwan Ahmed कौन है? ISIS से जुड़े तार, UP-दिल्ली में मुंबई जैसे ब्लास्ट की थी साजिश! पुलिस के सामने ये 3 सवाल

Who Is Kushinagar Rizwan Ahmed: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में शनिवार देर रात हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर पूरे देश को चौंका दिया है। रिजवान अहमद नाम का यह युवक न सिर्फ पुराने आतंकी नेटवर्क से जुड़ा है, बल्कि जांच एजेंसियों को अब पता चला है कि वह दिल्ली और उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में IED धमाकों की साजिश रच रहा था। ISIS से उसके सीधे तार जुड़े हैं और वह विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में था।

यह उसकी दूसरी गिरफ्तारी है। पहली बार जनवरी 2016 में यूपी ATS ने उसे आतंकी गतिविधियों के आरोप में पकड़ा था। अब सात साल जेल काटने के बाद बाहर आने के महज कुछ महीनों में वह फिर पुरानी राह पर लौट आया।

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2014-2016: स्कूल से शुरू हुआ कट्टरपंथ का सफर

रिजवान अहमद का जन्म कुशीनगर जिले में हुआ। साल 2014 में उसने कुशीनगर के एक इंटर कॉलेज में कक्षा 11वीं में नामांकन कराया। पढ़ाई के दौरान ही उसकी मुलाकात उन लोगों से हुई जो देश-विरोधी गतिविधियों में सक्रिय थे।

धीरे-धीरे इंटरनेट और सोशल मीडिया ने उसे पूरी तरह जकड़ लिया। वह कट्टरपंथी वीडियो, पोस्ट और चैट ग्रुप्स के जरिए ISIS की विचारधारा से प्रभावित हुआ। 2016 में ATS की टीम ने जब उसे गिरफ्तार किया तो जांच में खुलासा हुआ कि रिजवान ISIS चीफ अबू बकर अल-बगदादी से जुड़े नेटवर्क तक पहुंच चुका था। उस समय की जांच रिपोर्ट में कई अहम कड़ियां मिली थीं जो साफ संकेत दे रही थीं कि वह देश में ISIS मॉड्यूल का हिस्सा बन चुका था।

2017-2023: मुंबई जेल में सात साल

गिरफ्तारी के बाद रिजवान को मुंबई की जेल भेज दिया गया। 2017 से 2023 तक वह वहां बंद रहा। सुरक्षा एजेंसियां उम्मीद कर रही थीं कि लंबी सजा और जेल की निगरानी के बाद वह मुख्यधारा में वापस आ जाएगा। लेकिन जेल से छूटने के बाद शुरुआती कुछ समय सामान्य रहने के बावजूद वह फिर सक्रिय हो गया।

दूसरी गिरफ्तारी: पुरानी साजिश फिर से सक्रिय

शनिवार की देर रात कुशीनगर पुलिस और ATS की संयुक्त टीम ने रिजवान को फिर से गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि वह दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बड़े मंदिरों में IED ब्लास्ट करने की साजिश रच रहा था। उसके पास ISIS से जुड़े विदेशी हैंडलर्स के संपर्क थे और वह उनके निर्देश पर काम कर रहा था।

एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि:

  • जेल से छूटने के बाद रिजवान ने किन-किन लोगों से संपर्क साधा?
  • उसने कितना नया नेटवर्क तैयार किया?
  • किस-किस को फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट मिल रहा था?

गोवा-हैदराबाद-चेन्नई कनेक्शन फिर सक्रिय

2016 की पहली जांच में ही रिजवान का गोवा, हैदराबाद और चेन्नई से लिंक सामने आ चुका था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना था कि इन शहरों में सक्रिय ISIS सपोर्टर नेटवर्क ने उसे पैसे, उपकरण और संसाधन मुहैया कराए थे। अब दूसरी गिरफ्तारी के बाद एजेंसियां इन पुराने कनेक्शनों को फिर से खंगाल रही हैं।

क्यों है यह मामला गंभीर?

रिजवान अहमद का केस युवाओं के ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन का सबसे साफ उदाहरण है। एक स्कूली छात्र जो 2014 में सामान्य जीवन जी रहा था, 2016 तक ISIS मॉड्यूल का हिस्सा बन गया। जेल से छूटने के बाद भी वह नहीं सुधरा। यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चेतावनी है कि जेल सुधार कार्यक्रम और निगरानी के बावजूद कुछ लोग फिर से पुरानी राह पर लौट सकते हैं।

अभी जांच जारी है। एजेंसियां रिजवान के फोन, सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट हिस्ट्री और संपर्कों की गहन छानबीन कर रही हैं। देश के प्रमुख मंदिरों को निशाना बनाने की साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया है, लेकिन सवाल अब यह है कि ऐसे कितने और रिजवान तैयार हो रहे हैं? सुरक्षा एजेंसियों की अगली बड़ी खुलासे का इंतजार है।

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