जब मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश के लिए कहा, उसने मेरा अपमान किया, जो बेटा बाप का वफादार नहीं, वह किसी का नहीं

नेताजी के नाम से लोकप्रिय मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का आज निधन हो गया। मुलायम सिंह के निधन के बाद उनके बेटे अखिलेश यादव ने पिता की पार्थिव शरीर की तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा, मेरे आदरणीय पिता जी और सबके नेता जी नहीं रहे। मुलायम सिंह के अंतिम समय में अखिलेश उनके साथ रहे। मुलायम सिंह यादव का गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में पिछले कुछ दिनों से इलाज चल रहा था, वह आईसीयू में भर्ती थे और उन्हें जीवन रक्षक दवाएं दी जा रही थीं।

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2012 में अखिलेश को बनाया मुख्यमंत्री

मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश यादव को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी मानते थे, यही वजह है कि जब 2012 में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश के चुनाव में जीत दर्ज की तो मुलायम सिंह यादव ने सबको चौंकाते हुए अखिलेश यादव को प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान सौंप दी। अहम बात यह है कि मुलायम सिंह के इस फैसले के खिलाफ ना सिर्फ पार्टी के बड़े नेता बल्कि उनके परिवार के ही कई करीबी सहमत नहीं थे। मुलायम सिंह इस बात को जानते थे कि अगर अखिलेश को पहले से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करेंगे तो शायद आसानी से राजनीतिक विरासत का हस्तांतरण नहीं हो पाएगा, यही वजह है कि मुलायम सिंह यादव ने अंतिम समय में चुनाव में जीत के बाद अखिलेश यादव को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया।

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लोगों के विरोध के बाद भी सौंपी सत्ता

अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के बाद जिस तरह से कुछ सालों के बाद अखिलेश यादव की अपने पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ विवाद हुआ उसने ना सिर्फ पार्टी की बल्कि मुलायम परिवार की काफी फजीयत हुई। यहां तक कि मुलायम सिंह यादव ने यह तक कह दिया कि जो बेटा अपने पिता के प्रति वफादार नहीं है, वह किसी का भी नहीं हो सकता है। यादव परिवार के भीतर की कलह उस वक्त खुलकर सामने आई जब पार्टी के निजी कार्यक्रम में अखिलेश यादव की मुलायम सिंह यादव के साथ कहासुनी देखने को मिली, वह उनके सामने से माइक छीन लेते हैं, यहां तक कि अपने चाचा शिवपाल यादव से भी उनकी कहासुनी हो जाती है।

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अखिलेश ने पिता को अध्यक्ष पद से हटाया

दरअसल 2012 में जब सपा की सरकार बनी तो ऐसे आरोप लगने लगे कि अखिलेश यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री जरूर हैं लेकिन सरकार का रिमोट कंट्रोल मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के हाथ में है। पार्टी के भीतर की कलह अक्सर सामने आती थी। अखिलेश पार्टी की कमान को अपने हाथ में लेना चाहते थे। यही वजह है कि पहले अखिलेश यादव ने ना सिर्फ मुलायम सिंह को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाया बल्कि खुद को पार्टी का अध्यक्ष घोषित कर दिया। चुनाव से ठीक पहले जिस तरह से अखिलेश ने मुलायम सिंह को अध्यक्ष पद से हटाया उसके बाद मुलायम सिंह ने अखिलेश के समर्थन में चुनाव प्रचार करने से भी इनकार कर दिया। 2017 में सपा की हार का ठीकरा मुलायम सिंह ने अखिलेश यादव पर फोड़ा था और कहा था अखिलेश ने मुझे अपमानित किया है, अगर बेटा पिता का वफादार नहीं हो सकता तो किसी का नहीं हो सकता।

चाचा शिवपाल ने अलग की राह

अखिलेश की पिता के साथ अनबन सार्वजनिक हो चुकी थी। पिता के अलावा चाचा शिवपाल यादव के साथ भी अखिलेश का छत्तीस का आंकड़ा हर किसी को देखने को मिला। यहां तक अखिलेश के बर्ताव से नाराज होकर शिवपाल ने अपनी राहें सपा से जुदा कर लीं और अपनी अलग पार्टी का गठन किया। शिवपाल हमेशा यह कहते रहे कि मेरे बड़े भाई और सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का जो भी आदेश होगा मैं उनके साथ हमेशा रहूंगा। जब शिवपाल और अखिलेश अलग हुए तो शिवपाल के लिए जसवंत नगर रैली करने के लिए मुलायम सिंह यादव गए थे, जोकि अखिलेश यादव को नागवार गुजरा था।

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