'मंदिर की दीवार वाली बात गलत, हमारी तो 2 मजारें मिली हैं...', ज्ञानवापी ASI सर्वे पर क्या बोला मुस्लिम पक्ष
Gyanvapi Masjid ASI Survey: वाराणसी जिला अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। एएसआई रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा ढांचा यानी ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण एक हिंदू मंदिर की जगह पर किया गया है।
वाराणसी कोर्ट ने जुलाई-2023 में एएसआई को मस्जिद परिसर का सर्वे करने का निर्देश दिया था। इस रिपोर्ट के आने के बाद हिंदू पक्ष का दावा है कि इससे साबित होता है कि यहां हिंदू मंदिर ही था। लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इन दावों का खंडन किया है।

आइए जानें ASI रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्ष ने क्या कहा?
- मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि ASI सर्वे रिपोर्ट में कुछ भी नया नहीं है। उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद में मिली मूर्तियों की पौराणिकता पर भी सवाए उठाए हैं।
- मुस्लिम पक्ष के वकील अखलाक अहमद ने कहा है कि जो भी फोटो मिले हैं, वो पुराने हैं। ये पहले ही एडवोकेट कमीशन के वक्त में ही सामने आ गए थे। इस बार बस फर्क इतना है कि पहले सिर्फ फोटो खींचकर दिखाए गए थे। लेकिन अब इनको नाप-जोख करके लिख दिया गया है। इसमें कोई भी नया सबूत नहीं है।
- अखलाक अहमद ने कहा, एएसआई को खुदाई के लिए मना किया गया था। एएसआई के डायरेक्टर ने भी हलफनामे में कहा था कि खुदाई नहीं की जाएगी। लेकिन फिर उन्होंने मंदिर के पश्चिमी हिस्से में जो मलबा था उसकी सफाई करवाई है।
- उन्होंने ये भी कहा है कि जो मूर्तियां और शिवलिंग पाई गई है, वो कोई नई बात नहीं है। हमारी इमारत (नॉर्थ गेट या छत्ता) में पांच किराएदार थे। वे लोग मूर्तियां बनाते थे...उसी का ये मलबा था।
- अखलाक अहमद ने आगे कहा, लेकिन उसमें भी हमारा फायदा हो गया है। हमें फायदा ये हुआ है कि वहां हमारी जमीन पर दो मजारें थीं, जो अब खुल गई हैं। इतना ही नहीं उन्होंने दक्खिनी तहखाने में से कुछ मिट्टी भी निकाली है, जब वहां कुछ नहीं मिला तो उन्होंने उसे वैसे ही छोड़ दिया।
- 'पश्चिमी दीवार मंदिर की दीवार है...' इस दावे पर अखलाक अहमद ने कहा है कि, ये बिल्कुल गलत बात है। पश्चिमी दीवार में ऐसी कोई मूर्ति नहीं लगी है...जिससे ये साबित हो कि वहां मंदिर थी या वो मंदिर की दीवार है।












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