बड़ा फैसला: वाराणसी कोर्ट ने काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद में खुदाई के लिए ASI को दी मंजूरी
लखनऊ। वाराणसी की एक अदालत ने गुरुवार को काशी विश्वनाथ मंदिर और उससे सटे ज्ञानवापी मस्जिद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा रिसर्च के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने एएसआई को मंदिर और मस्जिद में खुदाई की अनुमति दे दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही एएसआई की पांच सदस्यीय टीम धार्मिक स्थलों का दौरा करेगी। बता दें कि वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश आशुतोष तिवारी ने यह फैसला सुनाया।

गौरतलब है कि दो साल पहले 10 दिसंबर 2019 को मंदिर पक्ष के पक्षकार विजय शंकर रस्तोगी ने सिविल जज की अदालत में इस मामले में याचिका दायर की थी। तब से इस मामले पर कोर्ट में बहस चली आ रही थी, लेकिन आज यानी 8 अप्रैल को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। विजय शंकर की याचिका को स्वीकार करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज आशुतोष तिवारी ने एएसआई को विवादित स्थल के पुरातात्विक सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी है।
विजय शंकर रस्तोगी अपनी याचिका में कोर्ट से ज्ञानवापी मस्जिद के पूरे परिसर में एएसआई द्वारा सर्वेक्षण के लिए अनुरोध किया था। विजय शंकर ने यह याचिका स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर के 'अगले मित्र' के तौर पर कोर्ट में यह याचिका दायर की थी। इस याचिका पर जनवरी 2020 में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने आपत्ति जताई थी।
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गुरुवार को काशी विश्वनाथ मंदिर पक्ष के वकील विजय शंकर रस्तोगी ने न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि पुरातात्विक सर्वेक्षण के बाद यह साफ हो जाएगा कि विवादित स्थान पर मस्जिद नहीं बल्कि आदि विशेश्वर महादेव का मंदिर है। बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण औरंगजेब ने करवाया था, ऐसा दावा किया जाता है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर तोड़कर किया गया था। इसे लेकर ही पूरा विवाद जारी है।
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