Vaccine shortage:कैसे दिल्ली-एनसीआर वालों ने यूपी में खोज लिया आसान जुगाड़ ? जानिए

मेरठ, 6 जून: देश के कई इलाकों में लोगों को इस समय कोरोना वैक्सीन की डोज सही समय पर लगवाने में दिक्कत हो रही है। खासकर दिल्ली में जिन्होंने पहली खुराक के तौर पर कोवैक्सिन लगवाई है, उनके सामने चुनौती बड़ी है। उनकी दूसरी डोज की मियाद 28 दिन में ही शुरू हो जाती है, लेकिन राजधानी में कोवैक्सिन के कई सेंटर वैक्सीन नहीं होने के चलते बंद किए जा चुके हैं। लेकिन, जहां चाह-वहां राह की तर्ज पर दिल्ली-एनसीआर वालों ने इसका भी जुगाड़ निकाल लिया है। उन्हें यूपी के आसपास के जिलों में आसानी से स्लॉट मिल जा रहा है और वह दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का फायदा उठाकर कुछ घंटों में वैक्सीन लगवाकर वापस आ जा रहे हैं।

दिल्ली वालों को यूपी में मिल गया है वैक्सीन का जुगाड़

दिल्ली वालों को यूपी में मिल गया है वैक्सीन का जुगाड़

देश की राजधानी दिल्ली इस वक्त खासकर भारत बायोटेक की कोवैक्सिन की भारी किल्लत झेल रही है। लेकिन, राजधानी से सटे उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इसकी डोज पड़ी ही रह जाती है और लगवाने वाले नहीं पहुंच पाते। खासकर ग्रामीण इलाकों में यह स्थिति बहुत ही आम है। यूपी ही नहीं हरियाणा के मेवात के नूंह जिले में भी यही स्थिति है। वैक्सीनेशन करने वाले स्टाफ सेंटर पर बैठे रह जाते हैं, लेकिन उनके लिए कोवैक्सिन की वायल खोलना टेंशन की बात हो जाती है कि कहीं पूरे लोग नहीं जुटने पर वह बर्बाद न हो जाए। बस दिल्ली वालों को इसी में जुगाड़ दिख गया है। वह कोविन पर स्लॉट ढूंढ़ते हैं और गाड़ी उठाकर उत्तर प्रदेश के मेरठ, शामली और यहां तक कि मथुरा जाकर टीका लगवा आ रहे हैं।

'मेरठ में बहुत ही आसानी से हो गया'

'मेरठ में बहुत ही आसानी से हो गया'

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे जिलों के '80 फीसदी' तक स्लॉट का इस्तेमाल यही लोग कर रहे हैं। पूर्वी दिल्ली में रहने वाले 33 वर्षीय इंजीनियर विकास माथुर ने इसके बारे में अपनी मजबूरी बताई है। उन्होंने कहा है कि 'मैंने कई दिनों तक कोशिश की लेकिन कोवैक्सिन की दूसरी डोज के लिए कहीं कोई उपाय नजर नहीं आया।' उन्होंने कहा, 'एक दोस्त ने कहा कि तुम यूपी के कुछ शहरों में कोशिश करके देखो। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे बनने से वहां जाना और भी आसान हो गया है। इसलिए मैंने मेरठ चुना।' को-विन पर वहां कई स्लॉट खुले थे। मिनटों में बुकिंग हो गई और जिस दिन का स्लॉट मिला, गाड़ी उठाई और मेरठ के सरदार वल्लभभाई कृषि विश्वविद्यालय पहुंच गए और सही समय पर दूसरी डोज लगवा ली। उन्होंने कहा, 'बहुत ही आसानी से हो गया।'

वैक्सीन के लिए सोनीपत टू शामली

वैक्सीन के लिए सोनीपत टू शामली

इसी तरह हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले 20 साल के विजय धनकड़ का भी कोवैक्सिन की दूसरी डोज लगवाने का समय निकलता जा रहा था। जब उन्होंने वहां काफी कोशिशें कर लीं और नाकाम रहे तो उन्होंने भी दिल्ली के विकास की तरह ही इधर-उधर नजर दौड़ाना शुरू किया और यूपी के शामली में उन्हें उम्मीद की नई किरण नजर आई। वो भी समय पर दूसरी डोज लगवाने के लिए 80 किलोमीटर की यात्रा पर निकल लिए। उन्होंने कहा, 'वैक्सीन ड्राइव एक राष्ट्रीय अभियान है। इसमें कोई भी समस्या नहीं होनी चाहिए कि कोई कहां लगवा रहा है।' वैक्सीन की दूसरी डोज के लिए ऐसी बेताबी ट्विटर पर भी दिखाई दे रही है। मसलन, जेएस दुग्गल ने लिखा, 'मुझे कोवैक्सिन की दूसरी डोज के लिए स्लॉट मेरठ में मिला और मैंने बुक कर लिया......मेरे पास सिर्फ 36 घंटे थे यह फैसला करने के लिए कि दिल्ली में वैक्सीन के लिए इंतजार करूं क्या ? क्योंकि दूसरी डोज बुक करने के लिए मेरे पास अंतिम तारीख 16 जून तक की ही थी।'

राजस्थान के लोगों को भी दिख गया है ये रास्ता

राजस्थान के लोगों को भी दिख गया है ये रास्ता

दिल्ली वालों के यूपी की ओर इस तरह से भागने के बारे में मेरठ के जिला टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर प्रवीण गौतम ने बताया कि, '18 से 44 की उम्र के लोगों में कम से कम 70 से 80 फीसदी स्लॉट दिल्ली और हरियाणा के लोग ही बुक कर रहे हैं।' मथुरा के एडिश्नल सीएमओ डॉक्टर राजीव गुप्ता ने कहा कि 'दिल्ली और राजस्थान से हर दिन कम से कम 60 से 70 लोग वैक्सीनेशन के लिए आ रहे हैं।' उन्होंने ये भी कहा कि 'हम बाहरी को टीका नहीं देने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य सरकार ने वैक्सीन खरीदी है और हमारी प्राथमिकता हमारे प्रदेश के लोगों के लिए है।'

वैक्सीन के इस जुगाड़ के पीछे ये भी हैं कारण

वैक्सीन के इस जुगाड़ के पीछे ये भी हैं कारण

यूपी में डोज की उपलब्धता को लेकर मेरठ के जिला निगरानी अधिकारी डॉक्टर अशोक तालियान ग्रामीण-शहरी इलाकों में अंतर की ओर इशारा करते हैं। उनका कहना है, 'उनके (दिल्ली वालों के ) पास हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा है। ग्रामीण इलाकों में नहीं है और उनमें वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट भी है।' वहीं बुलंदशहर के सीएमओ डॉक्टर अवतोश इसकी एक वजब और बताते हैं। वो कहते हैं, 'ग्रामीण इलाकों में बहुत बड़ी संख्या में स्लॉट खाली इसलिए भी रह जाते हैं कि उन्हें नहीं पता कि को-विन कैसे इस्तेमाल करना है और कई के पास स्मार्टफोन भी नहीं हैं।'

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