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पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के लगे थे आरोप, अब जज बनेगे प्रदीप कुमार, जानिए पूरा मामला

UP News: उत्तर प्रदेश में एक ऐसे व्यक्ति को न्यायाधीश (एचजेएस कैडर) के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जिन पर पहले पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप था। हालांकि, इस मामले में वह 'बाइज्जत बरी' हो चुके हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह प्रदीप कुमार को 15 जनवरी 2025 तक एडीजे (अधीनस्थ न्यायिक सेवा) के रूप में नियुक्ति पत्र जारी करें।

जासूसी के आरोपों के कारण लगी थी नियुक्ति पर रोक

प्रदीप कुमार ने 2017 में यूपी उच्च न्यायिक सेवा की परीक्षा पास की थी, लेकिन जासूसी के आरोपों के कारण उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी गई थी। 2002 में उन पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया था, हालांकि 2014 में उन्हें मुकदमे से बरी कर दिया गया था। मुकदमा 2004 में शुरू हुआ था, और इस दौरान उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला था।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश देते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि प्रदीप कुमार ने किसी विदेशी खुफिया एजेंसी के लिए काम किया था। कोर्ट ने यह भी माना कि मुकदमे में बरी किए जाने के बाद प्रदीप को सम्मानजनक स्थिति में होना चाहिए था। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए दो आपराधिक मुकदमे में कोई सच्चाई नहीं पाई गई थी।

राज्य सरकार का तर्क था कि प्रदीप पर पाकिस्तान के लिए जासूस बनने का गंभीर आरोप था और उन्हें सैन्य खुफिया और एसटीएफ के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उन्हें बरी करने से यह साबित हो गया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार थे।

परिवार के लिए राहत की सांस

कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदीप कुमार के पिता के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं था और उनका मूल्यांकन उनके व्यक्तिगत कार्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। इस निर्णय के बाद प्रदीप कुमार को अपने जीवन और करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। इस फैसले से प्रदीप कुमार के परिवार के लिए राहत की सांस है, जिन्होंने 22 वर्षों तक संघर्ष किया और समाज से भयभीत महसूस किया। प्रदीप ने कहा कि वह अब सफल हुए हैं, लेकिन समाज का सामना करने में उन्हें कुछ समय और लगेगा।

एसटीएफ ने किया था गिरफ्तार

प्रदीप कुमार को 13 जून 2002 को एसटीएफ और खुफिया विभाग के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि वह पैसा कमाने के लिए पाकिस्तान को संवेदनशील जानकारियां भेजते थे, लेकिन 2014 में उन्हें बरी कर दिया गया।

वर्ष 2016 में प्रदीप ने यूपी उच्च न्यायिक सेवा (सीधी भर्ती) परीक्षा पास की, लेकिन जासूसी के आरोपों के चलते उनका नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया। इसके बाद, उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सरकारी वकील ने दलील दी थी कि प्रदीप पर जासूसी का गंभीर आरोप था और उनके पिता को भी रिश्वतखोरी के आरोप में बर्खास्त किया गया था। लेकिन, अदालत ने कहा कि राज्य सरकार के पास प्रदीप के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, और मुकदमे में बरी होने के बाद उन्हें अपनी जिंदगी और करियर में आगे बढ़ने की पूरी आज़ादी होनी चाहिए।

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