UP:बिजली (संशोधन) विधेयक को लेकर सरकार की बढ़ेगी टेंशन, दिल्ली में 23 नवंबर को धरना देंगे बिजली कर्मचारी

उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के बिजली कर्मचारी बुधवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार ने बिजली (संशोधन) विधेयक, 2022 को पारित करने के लिए एकतरफा प्रयास किया तो देश भर के सभी बिजली कर्मचारी और इंजीनियर हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इस आंदोलन में शामिल होने के लिए यूपी समेत कई राज्यों से लाखों कर्मचारी दिल्ली पहुंचेंगे।

योगी आदित्यनाथ

जंतर-मंतर पर धरना देंगे बिजली कर्मचारी

गुरुवार को जंतर-मंतर पर सुबह 11 बजे से प्रदर्शन शुरू होगा, जिसमें कई बिजली कर्मचारी संघ हिस्सा लेंगे। 23 नवंबर को रैली में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को आगाह किया जाएगा कि अगर बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 को पारित करने की कोई एकतरफा प्रक्रिया शुरू की गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन होगा। इस बीच, यूपी में बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों ने समयबद्ध वेतनमान और पुरानी पेंशन योजना की बहाली सहित अपनी मांगों को लेकर 29 नवंबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू करने से पहले यह कदम काफी अहम माना जा रहा है।

बिजली संसोशन विधेयक को लेकर प्रदर्शन

बिजली (संशोधन) विधेयक, 2022 और बिजली वितरण क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में देश भर के लाखों बिजली कर्मचारी और इंजीनियर 23 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक विशाल प्रदर्शन करेंगे। एआईपीईएफ के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि बिजली (संशोधन) विधेयक, 2022 जनविरोधी और कर्मचारी विरोधी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की किसी भी एकतरफा कार्रवाई के विरोध में बिजली कर्मचारियों के पास राष्ट्रव्यापी हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि 23 नवंबर को दिल्ली में एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा।

बिजली क्षेत्र का निजिकरण करना चाहती है सरकार

दुबे ने आरोप लगाया कि बिजली (संशोधन) विधेयक, 2022 के जरिए केंद्र सरकार पूरे बिजली क्षेत्र का निजीकरण करने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम डिस्कॉम के नेटवर्क का उपयोग कर बिजली की आपूर्ति का अधिकार दिया जाएगा और निजी कंपनियां सरकारी कंपनियों के नेटवर्क का उपयोग करके केवल लाभदायक क्षेत्र यानी औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को ही बिजली देकर भारी लाभ कमाएंगी।

लंबित विधेयक उपभोक्ताओं के हित में नहीं

उन्होंने कहा कि बिजली (संशोधन) विधेयक, 2022 न तो उपभोक्ताओं के हित में है और न ही बिजली कर्मचारियों के हित में, इसलिए इसके खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर जन आंदोलन चलाया जाएगा। घाटे में चल रहे गरीब घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के पास छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे पीएसयू डिस्कॉम आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगी।

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