कांग्रेस अखिलेश यादव के साथ आई तो पलट जाएगी यूपी चुनाव की बाजी, सर्वे के आंकड़े दे रहे गवाही

नई दिल्ली, 13 नवंबर: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल अब बज चुका है। सभी दल अगले साल होने वाले इस इलेक्शन की तैयारियों में लगे हुए हैं। इस बीच एबीपी-सीवोटर ने चुनाव को लेकर अपना सर्वे दिया है। उत्तर प्रदेश को लेकर जो सर्वे आया है, उसमें भारतीय जनता पार्टी बहुमत के करीब है। हालांकि दूसरे दलों खासतौर से सपा के बारे में जो सर्वे में जो मूड जनता का दिख रहा है वो काफी दिलचस्प है। अखिलेश यादव की पार्टी काफी फायदे में हैं और कुछ दल उनके साथ जुड़े तो वो जीत के करीब पहुंच सकते हैं।

2017 से जुदा है माहौल

2017 से जुदा है माहौल

403 सीटों वाली उत्तर प्रदेश की विधानसभा में 2017 में बीजेपी को भारी जीत मिली थी। कोई भी दूसरा दल उसको चुनौती देने में नाकाम रहा था। उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के लिए आंकड़ा 202 है। 2017 में भाजपा और सहयोगियों ने सवा तीन सौ सीटें जीती थीं। वहीं मुख्य विपक्षी दल सपा 60 के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सकी थी। बसपा 20 तो कांग्रेस 10 के आंकड़े को नहीं छू सकी थी। अब सर्वे को देखें तो इस बार माहौल अलग लग रहा है।

भाजपा को नुकसान, सपा को फायदा

भाजपा को नुकसान, सपा को फायदा

सर्वे में आने वाले चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को 100 से ज्यादा सीटों का नुकसान हो रहा है। भाजपा और सहयोगियों को 213 से 221 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। सपा को 152 से 160 सीटें मिलने की बात कही गई है। बीएसपी को 16 से 20 और कांग्रेस को 6 से 10 सीटें मिल सकती हैं। 2 से 6 सीटें अन्य छोटे दल जीत सकते हैं।

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    कैसे बन सकता है सपा का काम

    कैसे बन सकता है सपा का काम

    सर्वे कहता है कि यूपी में बीजेपी गठबंधन को 41 फीसदी, एसपी गठबंधन को 31 फीसदी, बीएसपी को 15 फीसदी, कांग्रेस को 9 फीसदी वोट मिलेंगे। देखा जाए तो बीजेपी और सपा के बीच वोट प्रतिशत में 10 फीसदी का फर्क है और सीटों में करीब 50 सीटों का फर्क है। देखा जाए तो ये बड़ा फर्क है लेकिन एक बात उनके हक में जाती है और वो है कांग्रेस से साथ मिलने की उम्मीद। कांग्रेस को करीब 10 फीसदी वोट मिल रहे हैं, ऐसे में अगर दोनों दलों का गठबंधनहो जाता है और पश्चिमी यूपी में सपा और रालोद का सात बना रहता है तो फिर आंकड़े बदल सकते हैं। कांग्रेस और रालोद का मदद से अखिलेश इन 50 सीटों और 10 फीसदी वोट शेयर के फर्क को पाट सकते हैं।

    सीएम की पसंद पर भी भर सकता है फर्क

    सीएम की पसंद पर भी भर सकता है फर्क

    इस सर्वे में सीएम की पसंद कौन के सवाल पर 41 फीसदी लोगों ने मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, 32 फीसदी ने अखिलेश यादव, 16 फीसदी ने मायावती, 5 फीसदी ने प्रियंका गांधी और 2 फीसदी लोग जयंत चौधरी को पसंद कर रहे हैं। यहां भी वही बात है अगर पांच फीसदी प्रियंका और 2 फीसदी जयंत को पसंद करने वालों को अखिलेश का साथ मिल जाए तो वो योगी आदित्यनाथ को एकदम सीधा मुकाबला देंगे।

    सपा के साथ रालोद और कांग्रेस के आने की उम्मीद क्यों

    सपा के साथ रालोद और कांग्रेस के आने की उम्मीद क्यों

    बीजेपी के साथ उत्तर प्रदेश में निषाद पार्टी, अपना दल (एस) जैसे दल हैं। वहीं ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल ने अभी तक सपा के साथ रहने की बात कही है। अखिलेश यादव कई बार बड़े दलों से गठबंधन ना करने की बात कह चुके हैं। इसके बावजूद सपा के साथ कांग्रेस के आने की उम्मीदें इसलिए ज्यादा हैं क्योंकि पिछला चुनाव सपा और कांग्रेस ने साथ ही लड़ा था। अखिलेश यादव के प्रियंका गांधी से अच्छे रिश्ते भी माने जाते हैं। जयंत चौधरी के भी प्रियंका गांधी से अच्छे रिश्ते हैं और अखिलेश से भी उनके संबंध बढ़िया हैं। ऐसे में हो सकता है कि भाजपा को लीड लेते देख कांग्रेस भी सपा के साथ आ जाए। ऐसे होता है तो बहुत मुमकिन है कि चुनाव ज्यादा दिलचस्प हो जाए। हालांकि असली नतीजे को वोटिंग के बाद ही सामने आएंगे, ये सब तो अभी आंकड़े हैं।

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