UP: IAS अधिकारियों का जिले में कार्यकाल Fix कर जवाबदेह बनाने की तैयारी, समझिए सरकार की मंशा
लखनऊ, 16 सितंबर: उत्तर प्रदेश में जिलाधिकारियों (DM) का औसत कार्यकाल एक दशक पहले के लगभग छह महीने से बढ़कर अब 18 महीने हो रहा है। हालांकि यह अभी भी उनके लिए दो साल के सुझाए गए कार्यकाल से कम है। एक निश्चित और लंबा कार्यकाल उन कार्यक्रमों को लागू करने का अवसर प्रदान करता है जो अधिकारी जिला मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात होने पर अपने जिलों में करना चाहते हैं। हालांकि ऐसे उदाहरण हैं जब जिला मजिस्ट्रेट पांच साल से अधिक समय तक एक जिले में तैनात रहे हैं, उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में सबसे कम कार्यकाल दिनों में हो सकता है।

डीएम को औसत कार्यकाल की कवायद में यूपी सरकार
जिलाधिकारियों और जिला पुलिस प्रमुखों के औसत कार्यकाल में वृद्धि अब सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हां, समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान लगभग साढ़े 10 महीने के मुकाबले अब हमारा औसत कार्यकाल 18 महीने का है। राज्य के गृह विभाग के घटनाक्रम से अवगत लोगों ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान एक साल के औसत के मुकाबले जिला पुलिस प्रमुखों का औसत कार्यकाल लगभग दो साल हो गया है।

आईएएस को मिलना चाहिए काम करने का मौका
पूर्व आईएएस रमा रमण कहते हैं कि, '' जिलाधिकारियों का औसत कार्यकाल 18 महीने किए जाने की बात काफी लंबे समय से चल रही है। अब सरकार अधिकारियों का एक औसत कार्यकाल फिक्स कर रही है। यह एक अच्छा कदम है। इससे अधिकारियों को अपने कामकाज के साथ तालमेल बैठाने के साथ ही प्रमुख योजनाओं के बेहतर और समयबद्ध क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। हमें उम्मद है कि अधिकारियों की औसत कार्यकाल को दो साल तक जल्द ही किया जाएगा।''

अधिकारियों ने की थी 2 साल तक फिक्स कार्यकाल की मांग
आमतौर पर ज्यादातर पदों पर कर्मचारियों और अधिकारियों को तीन साल का कार्यकाल दिया जाता है। जिलाधिकारियों के मामले में, दो साल की अवधि पर विचार किया गया था जब राज्य सरकार ने लगभग 10 साल पहले सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था। फिर भी, एक के बाद एक सरकारों ने जनहित के नाम पर विभिन्न पदों पर अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले अधिकारियों का स्थानांतरण जारी रखा जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा।

अधिकारियों पर राजनीतिक लगाम भी जरूरी
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रह चुके एस के सिंह ने बताया कि, ''अधिकांश अधिकारी औसत कार्यकाल में वृद्धि का श्रेय राजनीतिक क्षितिज पर स्थिरता को देते हैं। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है। अब भी राजनेताओं का राजनीतिक दबाव होना चाहिए नहीं तो अधिकारी बेलगाम हो जाते हैं। अब सरकार इस तरह का निर्णय ले रही है तो ये आने वाले समय के लिए एक अच्छा संकेत हो सकता है।''

अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
अधिकारियों के स्थानांतरण पर सिफारिशें करने और समय से पहले तबादलों के लिए जिम्मेदार कारकों की जांच करने के लिए लगभग एक दशक पहले एक सिविल सेवा बोर्ड की स्थापना की गई थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जिला मजिस्ट्रेट और जिला पुलिस प्रमुखों के पदों पर रहने वाले सभी अधिकारियों को दो साल का समय मिले। हालांकि इसमें रोचक यह भी है कि एक तरफ जहां औसत कार्यकाल की कवायद की जा रही है वहीं यह भी बताया जा रहा है कि अधिकारियों को जवाबदेह भी बनाया जाएगा।












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