UP Politics: 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में तीसरे मोर्चे के रूप में उभरेगी BSP?
बसपा की मुखिया मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने संकेत दिए हैं कि यूपी में बसपा तीसरी ताकत के रूप में उभरेगी।
Loksabha Election 2024: देश में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले अब सभी राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव गैर बीजेपी महागठबंधन बनाने की कवायद में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर बसपा की मुखिया मायावती ने यूपी में तीसरे मोर्चे के रूप में अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने अपने एक ट्वीट में मीडिया के कुछ वर्ग में आई उन खबरों को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि लोकसभा चुनाव के लिए बसपा,भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या अन्य राजनीतिक गठबंधन के साथ गठबंधन कर सकती है। बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद ने कहा है कि पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में तीसरे मोर्चे के रूप में उभरने के लिए काम कर रही है।
तीसरे मोर्चे के रूप में बसपा को मिल रहा समर्थन
आकाश ने कहा है कि बसपा एक ऐसी पार्टी है जो कांशीराम के आदर्शों पर चल रही है जिनकी एकमात्र सोच समतामूलक समाज की स्थापना करना था। पार्टी प्रमुख मायावती के मार्गदर्शन में बसपा को राज्य की राजनीति में तीसरे मोर्चे के रूप में आम जनता का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। हमारे प्रतिद्वंद्वी निराश हैं। वे भ्रामक खबरें फैलाने के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं। हमें इस मुद्दे पर सावधान रहना चाहिए। गठबंधन को लेकर बसपा का रुख बिल्कुल स्पष्ट है।''
हालांकि यूपी की राजनीति को करीब से जानने और समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज कहते हैं कि,
बसपा यूपी में अपने लिए रास्ता बनाने में जुटी है। महागठबंधन जैसे जैसे आकार ले रहा है वैसे वैसे बसपा के भीतर बेचैनी बढ़ रही है। अभी हालांकि बसपा यूपी में तीसरे मोर्चे की बात कर रही है लेकिन जैसे जैसे समय आएगा वह देश में तीसरे मोर्चें की संभावनाओं को तलाशने से गुरेज नहीं करेगी।
2024 में अकेले चुनाव लड़ने का दावा
हालांकि बसपा की मुखिया मायावती ने पहले ही दावा किया है कि उनकी पार्टी 2024 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेगी लेकिन बसपा के सूत्रों ने कहा कि पार्टी विपक्षी दलों की चाल पर भी नजर रख रही है। चुनाव के करीब किसी भी गठबंधन पर अंतिम निर्णय ले सकती है। दरअसल, कांग्रेस समेत 15 विपक्षी दलों की पटना में हुई बैठक के बाद से ही बसपा ने 2024 के चुनाव के लिए कार्ययोजना बनाने की कवायद शुरू कर दी है।
निकाय चुनाव में फेल हुई रणनीति
हाल ही में यूपी शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में बसपा ने मुसलमानों और दलितों में पैठ बनाने के लिए सोशल इंजीनियरिंग का प्रयोग किया था। वह प्रयास विफल हो गया था क्योंकि उसके सभी 11 मुस्लिम मेयर उम्मीदवार हार गए थे।
मायावती के पास वोट ट्रांसफर करने की ताकत
बसपा के एक नेता दावे के साथ कहते हैं कि, मायावती एकमात्र नेता हैं जो वोट ट्रांसफर कर सकती हैं और अन्य पार्टियों में चले गए वोटों को वापस भी जीत सकती हैं। उनके नेतृत्व में, बसपा यूपी में एक मजबूत राजनीतिक ताकत है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।"
यूपी में बसपा चला रही गांव चलो अभियान
इस बीच, बीएसपी यूपी में ग्रामीण मतदाताओं तक पहुंचने के लिए अपना 'गांव चलो अभियान' चला रही है। इसके जरिए पार्टी अपने बूथ और सेक्टर कमेटियों की ताकत का भी आकलन कर रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यह पहली बार है जब बसपा विशेष रूप से ग्रामीण मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए कोई अभियान चला रही है।












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