UP Politics: आयोग कहे एफिडेविट मिले ही नहीं, अखिलेश बोले- जिलाधिकारी आखिर किस पर दे रहे सफाई?

UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर मतदाता सूची को लेकर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि पिछले विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में वोटर सूची से नाम काटे गए। यह मुद्दा चुनाव आयोग और जिलाधिकारियों के जवाबों के बीच फंसकर और उलझता जा रहा है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि उनकी पार्टी ने हजारों हलफनामे आयोग को दिए थे, मगर आयोग ने उन्हें स्वीकार ही नहीं किया। अब जब जिलाधिकारियों की ओर से आंशिक जवाब आ रहे हैं, तो सवाल उठ रहे हैं कि सच आखिर है कहां?

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अखिलेश का आरोप है कि यह सब योजनाबद्ध तरीके से हुआ और लोकतंत्र के अधिकारों से खिलवाड़ किया गया। उनका कहना है कि अगर आयोग को एफिडेविट नहीं मिले तो जिलाधिकारी किस आधार पर जवाब दे रहे हैं। यही विरोधाभास अब इस विवाद को और गहरा बना रहा है।

सपा का दावा- हजारों हलफनामे, गिने-चुने जवाब

पार्टी का आरोप है कि 18 हजार से ज्यादा हलफनामे चुनाव आयोग तक पहुंचाए गए थे, मगर अब तक सिर्फ 14 पर प्रतिक्रिया मिली है। सपा नेताओं का कहना है कि इतने बड़े अंतर से साफ है कि कहीं न कहीं सच्चाई छिपाने की कोशिश हो रही है।

अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र के साथ मजाक करार दिया। उन्होंने कहा कि जनता अपने अधिकारों का हिसाब मांग रही है और जिन नामों को गलत तरीके से हटाया गया, उनके परिवार अब भी जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

भाजपा और आयोग पर मिलीभगत का आरोप

समाजवादी पार्टी का कहना है कि भाजपा सरकार, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन एक गठजोड़ बनाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि यह 'हक का गणित' है जिसे अब जनता ही ठीक करेगी।

उन्होंने दावा किया कि जनता सब देख रही है और आने वाले चुनाव में इस सियासी चाल का जवाब देगी। अखिलेश का कहना है कि लोकतंत्र केवल तभी मजबूत होगा जब पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारियों की सफाई, सपा का पलटवार

जौनपुर के जिलाधिकारी ने हाल ही में कुछ शिकायतों पर सफाई दी। उनका कहना है कि जिन नामों को वोटर लिस्ट से हटाया गया, वे लोग पहले ही दिवंगत हो चुके थे। स्थानीय पुष्टि के आधार पर ही यह कार्रवाई की गई।

लेकिन सपा नेताओं ने इस तर्क को नकार दिया। उनका कहना है कि 300 से अधिक शिकायतें भेजी गई थीं, मगर तीन साल में सिर्फ पांच पर जवाब मिला है। ऐसे में प्रशासन की मंशा संदिग्ध लगती है और मामला संदेह के घेरे में आता है।

झूठ और छल का गठजोड़ टिक नहीं सकता

अखिलेश यादव ने भाजपा और आयोग पर सीधा हमला बोला। उनका कहना है कि झूठ और छल का गठजोड़ ज्यादा दिन टिक नहीं सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसी चालें चल रही है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता के विश्वास में है और वह इस बार कोई धोखा खाने वाली नहीं है। अखिलेश ने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं सुधरे तो यह मामला अदालत तक जाएगा।

समाजवादी पार्टी ने यह भी कहा कि अगर आयोग के मुताबिक कोई एफिडेविट मिला ही नहीं, तो जिलाधिकारी आखिर किस बात का जवाब दे रहे हैं। पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाए।

अखिलेश का कहना है कि वोट काटने के लिए जिन प्रमाणपत्रों का हवाला दिया जा रहा है, उनकी भी पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर सब कुछ सही था तो जवाब देने में तीन साल क्यों लग गए। यही देरी साबित करती है कि मामला गंभीर है।

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