UP Panchayat: सीटों पर आरक्षण से उलटफेर तय, किन वर्गों को मिलेगा फायदा और कौन होंगे प्रभावित?
UP Panchayat Elections 2026: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर तैयारियां रफ्तार पकड़ चुकी हैं। पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन का काम पूरा कर लिया है। अब अगला चरण सीटों के आरक्षण निर्धारण का है, जिस पर मंथन शुरू हो गया है।
पुनर्गठन के बाद प्रदेश की कुल ग्राम पंचायतों की संख्या घटकर 57,695 हो गई है। पिछली बार की तुलना में 504 पंचायतें कम हो गई हैं। इससे पंचायत प्रतिनिधियों की सीटों की संख्या में भी कमी आएगी, खासकर ग्राम प्रधानों की सीटें घटेंगी।

आरक्षण प्रक्रिया को लेकर विभागीय स्तर पर योजना बननी शुरू हो गई है। हालांकि, अधिकारिक प्रक्रिया सितंबर या अक्टूबर में शुरू होने की संभावना है। आरक्षण निर्धारण पुरानी नियमावली और 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा।
ओबीसी आरक्षण के लिए आयोग का इंतजार
पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन अनिवार्य है। आयोग को काम शुरू करने के बाद आरक्षण निर्धारण में कम से कम तीन महीने का समय लगेगा।
सरकार की ओर से आयोग गठन की प्रक्रिया अभी लंबित है। यह विलंब आरक्षण प्रक्रिया की समयसीमा को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सितंबर-अक्टूबर तक ही प्रक्रिया के शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
बदलेगा आरक्षित सीटों का नक्शा
सूत्रों की मानें तो इस बार पंचायत चुनाव में आरक्षित सीटों का भूगोल काफी हद तक बदल जाएगा। आरक्षण का निर्धारण तय मानकों के अनुसार किया जाएगा, जिससे कई नए चेहरे सामने आ सकते हैं।
इस बार ओबीसी के लिए 27%, एससी के लिए 20.69% और एसटी के लिए 0.56% सीटें आरक्षित होंगी। आरक्षित सीटों में संबंधित वर्ग की महिलाओं के लिए 33% आरक्षण अनिवार्य रूप से लागू होगा।
मतदाता सूची का नवीनीकरण जारी
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूचियों के नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्य दिसंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
इसके अलावा, वार्डों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी। वार्ड निर्धारण के लिए आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।












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