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UP Nikay Chunav: ओवैसी ने सपा की साइकिल पंक्चर की, कितना हुआ नुकसान? जानिए

UP Nikay Chunav result: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी धीरे-धीरे राज्य में गंभीर प्लेयर बनती जा रही है। उनकी पार्टी का जो जनाधार है, वही सपा का भी है। लिहाजा अखिलेश यादव के लिए अच्छी स्थिति नहीं कही जा सकती।

UP Nikay Chunav Asaduddin Owaisis AIMIM

UP Nikay Chunav Asaduddin Owaisi's AIMIM result: उत्तर प्रदेश में जिस तरह से आहिस्ता-आहिस्ता हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम मुसलमानों के बीच अपना जनाधार बढ़ाती जा रही है, वह समाज पार्टी के लिए बहुत ही चिंताजनक स्थिति पैदा करती है।

यूपी में अपना जनाधार बढ़ा रही है ओवैसी की पार्टी
अपने भाषणों में लगातार समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को निशाने पर लेने वाले ओवैसी को जो लोग यह सोचकर नजरअंदाज करने की गलती कर रहे हैं कि अभी हैदराबाद के सांसद के लिए लखनऊ बहुत दूर है, तो वह जान लें कि पिछले विधानसभा चुनाव में इनकी पार्टी को प्रदेश में करीब 3.4 लाख वोट मिले थे।

अब नगर निकाय चुनावों के जो परिणाम आए हैं, उसके बाद ओवैसी की पार्टी के लोग यहां तक कहने लगे हैं कि सपा की वजह से कई जगहों पर बीजेपी जीती है। अभी जल्दबाजी जरूर है, लेकिन यह बातें बेवजह नहीं हैं। इसके पीछे कारण नजर आ रहे हैं।

सपा के लिए क्यों है खतरे की घंटी?
ओवैसी की पार्टी ने 17 नगर निगमों में 10 पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारे थे। नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भी इसके प्रत्याशियों की लंबी लिस्ट है। आज उत्तर प्रदेश में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन के 5 नगर पालिका परिषद अध्यक्ष और 75 निगम पार्षद हो गए हैं।

मेरठ मेयर के चुनाव में चौंकाने वाला परिणाम
समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव के लिए सबसे बड़ी चिंता की वजह मेरठ में हुए मेयर पद के चुनाव का परिणाम हो सकता है। यहां एआईएमआईएम का उम्मीदवार मोहम्मद अनस न सिर्फ दूसरे नंबर पर रहा, बल्कि उसे 1,28,547 वोट मिले।

यह सीट भाजपा उम्मीदवार हरिकांत अहलूवालिया ने करीब 1.19 लाख वोटों के अंतर से जीती है। लेकिन, सपा उम्मीदवार सीमा प्रधान सिर्फ करीब 1.15 लाख वोट लाकर तीसरे नंबर पर खिसक गईं। ओवैसी की पार्टी का ट्रेंड रहा है कि वह आमतौर पर मुस्लिम उम्मीदवार को ही टिकट देती है और मुसलमान ही उसके टारगेट वोटर होते हैं।

यहां भी ओवैसी की पार्टी ने जीत दर्ज की
इस नतीजे के बाद ओवैसी की पार्टी की ओर से कहा जाने लगा है कि सच तो ये है कि कई सीटों पर समाजवादी पार्टी की वजह से उसके उम्मीदवार बीजेपी से पिछड़ गए। ओवैसी के उम्मीदवारों ने संभल, हाथरस, कानपुर, मुरादाबाद और बरेली जिलों में भी नगर पंचायतों और नगर पालिका परिषदों की सीटें जीती हैं।

युवा मुसलमानों में है ओवैसी का क्रेज
2017 के यूपी नगर निकाय चुनाव में यह पार्टी सिर्फ एक नगर पालिका अध्यक्ष की सीट जीती थी और उसके 32 पार्षद चुनकर आए थे। समाजवादी पार्टी का कोर वोट बैंक एमवाई समीकरण है। ओवैसी जिस तरह से उसमें सेंध लगा रहे हैं, उससे उसकी मजबूती कमजोर हो रही है। खासकर युवा मुसलमानों में हैदराबाद के सांसद के प्रति बहुत ही ज्यादा क्रेज देखा जाता है।

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    ओवैसी के भाषणों में एक बात बहुत गौर करने वाली होती है। वह यूपी में अक्सर कहते हैं कि मुसलमान अखिलेश के लिए दरी बिछाना छोड़ दें। उनका राजनीतिक संदेश स्पष्ट है। वह अपनी पार्टी को मुसलमानों का एकमात्र प्रतिनिधि बनाना चाहते हैं। अगर इसमें वह यूं ही कामयाब होते रहे तो प्रदेश के राजनीतिक समीकरण में नए सिरे से बदलाव आ सकता है।

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