UP nikay chunav 2023: 2024 से पहले मायावती को लगा बड़ा झटका, काम न आया मुस्लिम कार्ड
UP nikay chunav 2023: यूपी में निकाय चुनाव के परिणाम आ गए हैं। बीजेपी ने नगर निगम की सभी 17 सीटों पर परचम लहराया है वहीं बसपा नया दांव खेलने के बावजूद एक भी सीट नहीं जीत पाई है।

UP Nikay Chunav Result 2023 Updates: उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव का मतदान सम्पन्न हो गया है। बीजेपी ने इस चुनाव में जहां सभी 17 सीटें जीतकर 2024 से पहले अपनी ठोस तैयारियों के संकेत दे दिए हैं वहीं दूसरी ओर बसपा ने 17 मेयर सीटों में से 11 पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारने का दांव खेलने के बावजूद एक भी नगर निगम की सीट नहीं जीत पाई। बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की मुखिया मायावती ने 2024 से पहले ये दलित-मुस्लिम गठजोड़ का प्रयोग किया था लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसका उल्टा असर ये हुआ कि पिछले चुनाव में जीती गई मेरठ व अलीगढ़ की सीट भी गवां बैठी।
2024 की राह मायावती के लिए कठिन
बसपा की मुखिया मायावती ने निकाय चुनाव में सवर्णों से दूरी बनाकर जो नया फार्मूला लागू किया था वह सफल नहीं हुआ। मायावती 2007 में सवर्णों के सहयोग से ही सरकार बनाने में कामयाब हुईं थीं लेकिन इस बार मायावती ने उनको अपनी रणनीति से दूर ही रखा। यूपी की 17 सीटों में 11 मुस्लिम, दो दलित और चार ओबीसी उम्मीदवार उतारकर बसपा ने नया गेम खेला था लेकिन निकाय चुनाव में जनता ने बसपा की इस रणनीति को पूरी तरह से नकार दिया।
मायावती ने निकाय चुनाव प्रचार से बनाई दूरी
एक तरफ जहां बीजेपी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी निकाय चुनाव में पूरी ताकत झोंके हुए थे वहीं मायावती ने घर से बाहर निकलने की जहमत नहीं उठाई। योगी ने निकाय चुनाव में जहां 13 दिनों में 50 जिलों में जनसभाएं की वहीं मायावती अन्य जिलों में तो दूर लखनऊ में एक रैली करने के लिए बाहर नहीं निकलीं। मायावती की इस रणनीति को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने के लिए आपको घर से निकलना ही होगा। घर में बैठक आप जनता से कनेक्ट नहीं हो सकते। ये मायावती की सबसे बड़ी चूक है।
2024 से पहले किया था नई रणनीति का लिटमस टेस्ट
बसपा अध्यक्ष मायावती ने पहले ही पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से निकाय चुनावों को 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले गंभीरता से लेने को कहा था। मायर्टी को अपने मूल मतदाताओं दलितों, मुस्लिमों और पिछड़ों की रणानीति पर काम कर रही हैं। जानकारों का कहना है कि बसपा मुख्यतौर पर दलित कैडर वाली पार्टी है और इस चुनाव में दलित ही उनकी लिस्ट से बाहर हैं। आप स्वयं देखिए कि 17 सीटों में कितने दलितों को टिकट दिया था पार्टी ने। किसी एक समुदाय पर भरोसा करने से उसका उल्टा असर भी पड़ता है।
मुस्लिम कार्ड पर आंखमूदकर भरोसा महंगा पड़ा
निकाय चुनाव का रिजल्ट यह बता रहा है कि बसपा की मुखिया ने 11 मुस्लिम को टिकट देकर जो दांव खेला था वह नहीं चला। राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन कहते हैं कि,
किसी भी चीज पर आंखमूदकर भरोसा करना काफी हानिकारक होता है। आप सोचिए कि यूपी की 17 सीटों में से 11 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारकर कितना बड़ा दांव खेला था। उनको लगा था कि यूपी का 20 फीसदी वोट उनकी झोली में आ जाएगा लेकिन ठीक इसका उल्टा हुआ। बसपा ने पहली लिस्ट में 10 मेयर सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की थी, जिनमें से छह अल्पसंख्यक समुदाय से थे। वहीं बसपा दूसरी लिस्ट में मेरठ, शाहजहाँपुर, अयोध्या, गाजियाबाद, अलीगढ़ और बरेली में महापौर सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की थी जिनमें से 5 मुस्लिम थे।












Click it and Unblock the Notifications