UP: जेल में बंद अपराधियों के मामलों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगी सुनवाई, जानिए इसकी वजहें
उत्तर प्रदेश में अब सरकार अपराधियों के मामलों की सुनवाई में तेजी लाने की कवायद में जुट गई है। यूपी जेल विभाग ने एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसको मुख्यमंत्री योगी की हरी झंडी का इंतजार है।

prisoner's trial through video conferencing: उत्तर प्रदेश के खूंखार अपराधियों और गैंगस्टरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार अब जेल के अंदर से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उनके मामलों की सुनवाई शुरू करेगी। इसकी प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी। इस आशय का एक प्रस्ताव जेल एवं करागार विभाग ने मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा को सौंपा है। मुख्यमंत्री की तरफ से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
जेल विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव
अक्सर ऐसा देखा जा रहा था कि ऐसे अपराधियों को कोर्ट की तरफ से सम्मन जारी नहीं होता था जिनको एक जगह से दूसरी जगह लाने की जरूरत पड़ती हो। ऐसे अपराधियों के खिलाफ चल रहे मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए अब सरकार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई शुरू कराने को लेकर एक प्रस्ताव तैयार किया है। जल्द ही इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
232 कैदी ऐसे जिनकी एक साल से नहीं हुई पेशी
जेल प्रशासन की तरफ से पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पूरे प्रदेश में 232 कैदी अलग अलग जेलों में बंद हैं जो पिछले एक साल से ज्यादा समय से कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए हैं। इनमें से 16 अपराधी अयोध्या जोन, 55 लखनऊ से, आठ कानुपर से 10 वाराणसी से, 5 प्रयागराज से 41 मेरठ से, 24 गोरखपुर, 28 बरेली और 45 आगरा जोन से शामिल हैं। विभाग के मुताबिक इन अपराधियों को एक जगह से दूसरे जगह ट्रांसफर होने की वजह से अदालत की तरफ से एक साल से इनको नहीं बुलाया है।
मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद आई तेजी
दरअसल, हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में, मुख्यमंत्री ने न्यायिक रिमांड में अपराधियों की पेशी और मुकदमे के लिए यूपी की 72 जेलों और 73 अदालतों में से प्रत्येक में एक अतिरिक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष की आवश्यकता पर जोर दिया था और अधिकारियों को इसके निर्माण में तेजी लाने का भी निर्देश दिया।
जेल विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, राज्य में 72 ऑपरेशनल जेल हैं, जिनमें से 62 जिला और सात केंद्रीय जेल और एक-एक नारी बंदी निकेतन, आदर्श जेल और किशोर सदन हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की 73 अदालतों में विचाराधीन कैदियों की रिमांड और सुनवाई की कार्यवाही की गई।
वीडियो कांफ्रेंसिंग से मुकदमों के निपटाने में मिलेगी मदद
बताया कि वर्तमान में सभी जेलों और अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रिमांड के लिए एक-एक सेल है, लेकिन कैदियों की संख्या अधिक होने के कारण पूरा दिन रिमांड के मामलों की सुनवाई में बीत जाता है, इसलिए यूपी की सभी जेलों और अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम की मांग को लेकर सरकार को पत्र लिखा गया है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बंदियों के रिमांड और मुकदमे के शत प्रतिशत निपटारे से विचाराधीन कैदियों के भागने की घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा।












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