सहसवान सीट से बाहुबली नेता डीपी यादव ने वापस लिया नामांकन, बेटे कुणाल पर लगाया दांव
सहसवान सीट से बाहुबली नेता डीपी यादव ने वापस लिया नामांकन, बेटे कुणाल पर लगाया दांव
बदायूं, 01 फरवरी: सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और राम गोपाल यादव जैसे कद्दावर नेताओं के सामने भी बाहुबली नेता धर्मपाल यादव उर्फ डीपी यादव ने कभी घुटने नहीं टेके थे। लेकिन इस बार डीपी यादव सहसवान सीट से विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है। डीपी यादव और उनकी पत्नी ने अपना नाम वापस ले लिया है। हालांकि, इस सीट पर अब डीपी यादव ने अपने बेटे कुणाल यादव पर दांव लगाया है।

डीपी यादव ने 34 साल के राजनीति सफर में पहली बार पीछे खींचे पांव
दरअसल, डीपी यादव की जगह उनके बेटे कुणाल सहसवान सीट से अपने सियासी पारी शुरू करने जा रहे है। कुणाल की सियासी पारी शुरू करने के लिए डीपी यादव ने फैसला लिया है। आपको बता दें, डीपी यादव ने अपने 34 साल के राजनीतिक जीवन में पहली बार चुनाव से कदम पीछे खींचे है। उन्होंने 25 जनवरी को बदायूं की सहसवान विधानसभा सीट से राष्ट्रीय परिवर्तन दल की तरफ से अपना नामांकन दाखिल किया था।
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डीपी यादव का बेटा कुणाल मैदान में उतरा
नामांकन दाखिल करने के महज 6 दिन बाद डीपी यादव ने अपना हलफनामा वापस ले लिया। पहले डीपी यादव के साथ उनकी पत्नी उर्मिलेश यादव और बेटे कुणाल यादव ने भी नामांकन पत्र दाखिल किया था। इसके पीछे परिवार के तर्क थे कि उनका स्वास्थ्य खराब है। लिहाजा सभी ने नामांकन किया है। लेकिन 31 जनवरी को पति-पत्नी ने अपना नाम वापस ले लिया है जबकि बेटे कुणाल को मैदान में उतारा गया है। गौरतलब है कि डीपी यादव के बेटे कुणाल का यह पहला चुनाव है और सियासत में कदम रखने से पहले वह डीपी यादव की चीनी मिल यदु शुगर में निदेशक थे।

कौन हैं डीपी यादव?
धर्मपाल यादव उर्फ डीपी यादव का जन्म नोएडा के एक छोटे से गांव शरफाबाद में एक किसान के घर में हुआ था। डीपी यादव के पिता का दूध का कारोबार था। वहीं डीपी यादव ने अपने करियर की शुरुआत दूध के कारोबार से की और उसके बाद वह चीनी मिल, पेपर मिल के मालिक बन गए। डीपी यादव वाइन किंग के नाम से भी मशहूर है। डीपी यादव का होटल, रिजॉर्ट, टीवी चैनल, पावर प्रोजेक्ट, खदान और कंस्ट्रक्शन जैसे बिजनेस में दखल है और उनके कई स्कूल-कॉलेज भी हैं। बता अगर राजनीतिक करियर की करें तो डीपी यादव 3 बार विधायक, मंत्री, लोकसभा, राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।

मुलायम के गढ़ में चुनौती देकर बनाई सियासी पकड़
वेस्ट यूपी के बुलंदशहर जिले से अपनी राजनीति शुरू करने वाले डीपी यादव का बदायूं, सम्भल और इनसे सटे यादव बाहुल्य इलाकों में काफी रसूख है। 1989 में पहली बार बुलंदशहर से विधायक चुने गए डीपी यादव ने 2007 में खुद की पार्टी 'राष्ट्रीय परिवर्तन दल' का गठन कर बदायूं जिले से ही अपनी राजनीति आगे बढ़ाई थी। उस समय बदायूं जिले को तत्कालीन सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव का गढ़ माना जाता था, लेकिन डीपी यादव ने मुलायम सिंह को उन्हीं के गढ़ में चुनौती दी। 2007 के विधानसभा चुनाव में डीपी यादव अपनी पार्टी राष्ट्रीय परिवर्तन दल के टिकट पर बदायूं जिले की सहसवान विधानसभा सीट से और उनकी पत्नी उर्मिलेश यादव बिसौली सीट से चुनाव लड़े और दोनों जीतकर विधानसभा पहुंचे।












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