यूपी चुनाव में बना एक ऐसा धांसू रिकॉर्ड, जिसमें BJP के 'दोस्तों' ने कांग्रेस-BSP तक को दी पटखनी

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़े स्थानीय दलों ने सीटों से अलग एक और मामले में रिकॉर्ड कायम किया है।

नई दिल्ली, 12 मार्च: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में धमाकेदार जीत दर्ज करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने नई सरकार गठन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि योगी आदित्यनाथ रविवार को दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करेंगे। वहीं, माना जा रहा है कि यूपी में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होली के बाद हो सकता है। इस बीच यूपी चुनाव से जुड़े कुछ दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। दरअसल उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़े स्थानीय दलों ने सीटों से अलग एक और मामले में जबरदस्त रिकॉर्ड कायम किया है। इस रिकॉर्ड के मामले में भाजपा के सहयोगी दल कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी पर भी भारी पड़े।

एक भी सीट पर जब्त नहीं हुई जमानत

एक भी सीट पर जब्त नहीं हुई जमानत

दरअसल चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दल- निषाद पार्टी और अपना दल (सोनेलाल) कुल 27 सीटों पर चुनाव लड़े थे, और इनमें से एक भी सीट ऐसी नहीं है, जहां उनके प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त हुई हो। वहीं, यूपी में अगर राष्ट्रीय दलों की बात करें, कांग्रेस ने 399 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें से 387 सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है। कांग्रेस को इनमें से महज 2 ही सीटों पर जीत मिली।

बसपा 403 सीटों पर लड़ी, 290 पर जब्त हुई जमानत

बसपा 403 सीटों पर लड़ी, 290 पर जब्त हुई जमानत

इसके अलावा मायावती की बहुजन समाज पार्टी यूपी की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ी, लेकिन 290 सीटों पर उसके प्रत्याशी जमानत तक नहीं बचा पाए। बीएसपी को यूपी में केवल एक सीट पर जीत मिली है। वहीं, प्रचंड जीत हासिल करने वाली भाजपा ने 376 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से तीन सीटों पर जमानत जब्त हुई है। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी 347 सीटों पर चुनाव लड़ी और 6 सीटें ऐसी रहीं, जहां उनके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई।

सपा के सहयोगी दलों ने कितनी सीटों पर गंवाई जमानत

सपा के सहयोगी दलों ने कितनी सीटों पर गंवाई जमानत

कुछ ऐसा ही हाल समाजवादी पार्टी के सहयोगी दलों का भी रहा। ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अपना दल (कामेरावादी) को कुल 25 सीटें चुनाव लड़ने के लिए मिली थीं, जिनमें से 8 सीटों पर इन दलों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल ने गठबंधन के तहत 33 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, लेकिन 3 सीटों पर उनके उम्मीदवार जमानत नहीं बचा पाए।

एक और मामले में RLD से पिछड़ी कांग्रेस

एक और मामले में RLD से पिछड़ी कांग्रेस

यूपी चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन एक और मामले में भी क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय लोकदल से खराब रहा। दरअसल, 399 सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस को यूपी में महज 2.4 फीसदी वोट शेयर मिला, जबकि 33 सीटों पर चुनाव लड़ी राष्ट्रीय लोकदल ने 2.9 फीसदी वोट शेयर हासिल किया। सीटों के लिहाज से भी राष्ट्रीय लोकदल कांग्रेस से बेहतर साबित हुई।

कब जब्त होती है जमानत

कब जब्त होती है जमानत

आपको बता दें कि किसी भी चुनाव में चुनाव आयोग, प्रत्याशियों से एक निश्चित धनराशि जमानत के तौर पर जमा कराता है। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, अगर कोई उम्मीदवार उसके निर्वान क्षेत्र में डाले गए कुल वोटों में से कम से कम छठा हिस्सा हासिल नहीं कर पाता, तो उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है। यूपी चुनाव में इस बार कुल 4442 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, जिनमें से 3522 उम्मीदवार यानी 80 फीसदी अपनी जमानत राशि नहीं बचा पाए।

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