दलित सीटों पर बसपा से सपा को हुआ फायदा, मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में वोटिंग पैटर्न कैसे बदला ? जानिए

लखनऊ, 10 मार्च: उत्तर प्रदेश चुनाव में इसबार बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों के वोट शेयर में पिछले चुनाव के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है। लेकिन, भाजपा की तुलना में सपा के वोट शेयर में भारी इजाफा हुआ है। इसीलिए सीटों के मामले में भी अखिलेश यादव की पार्टी ने अपने प्रदर्शन में काफी सुधार किया है। अलबत्ता फिर भी भाजपा को बहुत ज्यादा सीटें मिल गई हैं और वह बंपर जीत के साथ दोबारा से सत्ता पर काबिज होने के लिए तैयार है। अगर हम 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में सिर्फ मुस्लिम बहुल सीटों और दलितों के लिए सुरक्षित सीटों के वोट शेयर का विश्लेषण करें तो जाहिर हो जाता है कि समाजवादी पार्टी ने विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए अपनी स्थिति कितनी बेहतर की है। लेकिन, यह कामयाबी उसे बसपा और कांग्रेस के वोटरों की बदौलत मिलती दिख रही है।

मुस्लिम बहुल सीटों पर बसपा-कांग्रेस से सपा को फायदा

मुस्लिम बहुल सीटों पर बसपा-कांग्रेस से सपा को फायदा

सबसे पहले यूपी के मुस्लिम बहुल जिलों में वोटिंग पैटर्न में हुए बदलाव को देखते हैं। मौजूदा चुनाव में मुस्लिम बहुल सीटों पर समाजवादी पार्टी को 42.5% वोट मिले हैं। जो कि पिछले चुनाव से 15.5% अधिक है। वहीं भाजपा को 40.9% वोट आए हैं, जो पिछली बार की तुलना में 1.3% ज्यादा है। अब हम अगर बीएसपी और कांग्रेस को इन सीटों पर वोटों के हुए नुकसान को देखें तो सारा माजरा समझ में आ जाएगा। यहां मायावती की बीएसपी को इसबार सिर्फ 12.5% वोट पड़े हैं और उसे 7.9% वोटों का नुकसान हुआ है। जबकि, कांग्रेस 1% वोट ले पाई है और उसके 7.7% वोट कम हो गए हैं। मतलब, बसपा और कांग्रेस को जो नुकसान हुआ है, उसका लाभ इन सीटों पर अखिलेश यादव की पार्टी को मिलता नजर आ रहा है।

सुरक्षित सीटों पर भी बसपा-कांग्रेस से सपा को मिला लाभ

सुरक्षित सीटों पर भी बसपा-कांग्रेस से सपा को मिला लाभ

दलित सीटों पर भी बीएसपी इसबार बुरी तरह पिछड़ी है। कई एक्सपर्ट बताते थे कि बसपा, भाजपा को फायदा दिलाने के लिए सुस्ती से चुनाव लड़ रही है। लेकिन, दलित सीटों के आंकड़े कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। इन सीटों पर इस बार समाजवादी पार्टी को 36.1% वोट मिले हैं। इस तरह से उसे सीधे 15.0% वोटों का फायदा हुआ है। जबकि, इन सीटों पर बसपा के वोट लगभग आधे रह गए हैं। मसलन, उसे इसबार सिर्फ 12% वोट मिले हैं और उसके 12.1% वोट घट गए हैं। इन सीटों पर वोट शेयर बीजेपी के भी बढ़े हैं और वह 3.2% बढ़कर 44.4% हो गया है। यहां कांग्रेस को सिर्फ 4% वोट मिले हैं और उसे 3.9% का नुकसान है। मतलब, कांग्रेस और बीएसपी के जो वोटर कम हुए हैं, उन्होंने मुख्य रूप से साइकिल को पसंद किया है। कम से कम यह आंकड़े तो यही बता रहे हैं।

इस चुनाव में भाजपा को मिला सबसे ज्यादा वोट

इस चुनाव में भाजपा को मिला सबसे ज्यादा वोट

जहां तक भाजपा की बात है तो 2017 में उसे सहयोगियों के साथ मिलाकर 42% वोट मिले थे। लेकिन, मौजूदा चुनाव में वह अकेले ही करीब इतनी वोट लाती दिख रही है। वहीं समाजवादी पार्टी का वोट शेयर बढ़कर लगभग 32% हो गया है। जबकि, 2012 में सिर्फ 29% वोट लाकर उसने 224 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई थी। इस चुनाव में बसपा को सिर्फ करीब 13% वोट मिलता दिख रहा है। वहीं कांग्रेस लगभग 2% वोट शेयर तक ही सिमटती दिख रहीहै।

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