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UP Bypolls 2024: क्या मुस्लिम वोट छिटकने के डर से कांग्रेस ने सपा के सामने किया सरेंडर?

UP By-election News: उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 9 सीटों पर हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस शुरू से समाजवादी पार्टी पर 4 सीटों पर चुनाव लड़ने का दबाव बना रही थी। लेकिन, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने हरियाणा के परिणाम आते ही एकतरफा 6 सीटों पर नाम तय करके अपना रुख साफ कर दिया। कांग्रेस की डिमांड 3 सीटों तक आई, अखिलेश ने 2 सीटों का ऑफर दिया, और वो भी वह सीटें जो बहुत मुश्किल हैं।

एक तरफ कांग्रेस अपनी डिमांड घटाती गई और दूसरी तरफ सपा ने एक के बाद एक करके 6 के बाद 7 और फिर सभी 9 सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिए। सपा मुखिया ने दावा किया कि इंडिया ब्लॉक उनकी पार्टी के चुनाव निशान 'साइकिल' पर ही चुनाव लड़ेगा। कांग्रेस ने भी कह दिया कि यह सब सहमति से हुआ है।

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कांग्रेस ने सपा के सामने क्यों कर दिया सरेंडर?
यूपी उपचुनाव में सपा और कांग्रेस की ओर से गठबंधन को लेकर दावे जो भी किए जा रहे हों, लेकिन आमतौर पर यही महसूस किया जा रहा है कि हरियाणा की हार से निराश कांग्रेस नेतृत्व ने स्वीकार कर लिया कि न तो उसके पास यूपी में इतनी राजनीतिक हैसियत बची है कि वह समाजवादी पार्टी पर दबाव बना सके और न ही उसके संगठन में इतनी ताकत है कि अपने दम पर चुनाव मैदान में ही उतर सके।

औपचारिक तौर पर कांग्रेस का यही दावा है कि उसने चुनाव मैदान से पीछे हटने का फैसला इसलिए लिया कि बीजेपी-विरोधी वोट न बंटे और 'संविधान की रक्षा' की जाए। लेकिन, अंदरखाने कांग्रेस के नेता भी मान रहे हैं कि सपा की ओर से उनको दी जा रही सीटों पर लड़ने का मतलब क्या होने वाला था?

जिन दो सीटों का ऑफर मिला, उसको लेकर कांग्रेस को क्या डर था?
मसलन, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने माना है कि अखिलेश ने जिन दो सीटों का उसे प्रस्ताव दिया था, उसपर 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी का बहुत ही खराब प्रदर्शन रहा था। तब कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ी थी।

उनके मुताबिक, 'खैर में हमें 1,500 मिले थे और गाजियाबाद में 11,000 वोट। लेकिन, सपा के समर्थन से हमारे आंकड़े निश्चित तौर पर 60,000 को पार कर सकते थे और कार्यकर्ताओं में कम से कम यह संदेश जाता कि लड़ाई में हम भी हैं।'

कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने से क्यों हिचकी?
दरअसल, सपा ने हरियाणा में भी कांग्रेस के सामने अपने लिए सीटों का प्रस्ताव रखा था और वह महाराष्ट्र के लिए ऐसा ही कर रही है। लेकिन, जब कांग्रेस ने हरियाणा में उससे मुंह फेर लिया तो अखिलेश ने अपने तेवर दिखाकर कांग्रेस पार्टी को यूपी में उसकी जगह दिखाने का संदेश दे दिया।

यूपी में कांग्रेस के कई नेताओं का कहना है कि पार्टी आलाकमान किसी भी सूरत में एक और हार का जोखिम नहीं लेना चाहता था; और न ही वह 'गठबंधन तोड़ने' का आरोप झेलने की ही स्थिति में है।

मुस्लिम वोट छिटकने के डर से कांग्रेस ने सपा के सामने किया सरेंडर?
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पार्टी के सामने खड़े हुए संकट पर स्थिति बहुत ही सीधे तरीके से साफ की है। उन्होंने कहा, '2027 के विधानसभा चुनावों तक न तो कांग्रेस और ना ही सपा गठबंधन तोड़ने वाली स्थिति झेल सकती है, क्योंकि जो भी पार्टी गठबंधन तोड़ने के लिए जिम्मेदार दिखेगी, उसे अल्पसंख्यक (मुसलमान) वोटों का नुकसान झेलना पड़ेगा। लेकिन, इससे लगता है कि केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश इकाई को उसके भाग्य पर छोड़ दिया है। हमें मजबूती से लड़ना चाहिए था, चाहे दो ही सीटें मिल रही थीं।'

13 नवंबर को उत्तर प्रदेश की जिन 9 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव होने वाले हैं, उनमें से 2022 के असेंबली इलेक्शन में 4 सीटें- सीसामऊ, कटेहरी, कुंदरकी और करहल में सपा जीती थी। खैर, गाजियाबाद और फूलपुर सीटें बीजेपी के खाते में गई थीं और मंझवान में निषाद पार्टी और मीरापुर में राष्ट्रीय लोक दल सफल रहे थे। अब ये दोनों ही दल भाजपा के सहयोगी हैं।

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