अखिलेश-जयंत में दोस्ती पक्की तो ये जोर आजमाइश क्यों, ताकत दिखाने का चल रहा खेल
नई दिल्ली, 13 नवंबर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने समाजवादी पार्टी को ही सबसे बड़ा खिलाड़ी माना जा रहा है। अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव को लेकर कहा है कि वो बड़े दलों (कांग्रेस की ओर इशारा) से गठबंधन नहीं करेंगे बल्कि छोटे दलों के साथ चुनाव में जाएंगे। पूर्वी यूपी में उन्होंने कुछ दलों को जोड़ा है तो पश्चिम में राष्ट्रीय लोकदल उनके साथ है। अखिलेश ये ऐलान कर चुके हैं कि वो जयंत चौधरी के नेतृत्व वाले रालोद के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। जयंत ने भी सपा के साथ जाने की बात बार-बार कही है। दोनों दलों के प्रमुख नेताओं के ये कहने के बावजूद एक दिलचस्प जोर आजमाइश दोनों पार्टियों में दिख रही है।

साथ-साथ हैं तो ये दूरी क्यों
2019 का लोकसभा चुनाव राष्ट्रीय लोकदल और सपा ने साथ लड़ा था। गठबंधन में बसपा भी थी, जो नतीजों के बाद अलग हो गई थी। चुनाव के बाद भी सपा और जयंत लगातार कहते रहे कि वो साथ हैं। विधानसभा चुनावों को लेकर भी दोनों ने साथ लड़ने का ऐलान किया है। बीते दिनों से दोनों दलों में कुछ खींचतान की बात सामने आई है। कहा जा रहा है कि सीटों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। इसका असर बड़े नेताओं की बैठकों में तो दिखा ही पश्चिम यूपी में जमीन पर भी दिख रहा है।

सभाओं से दिखा रहे दम
जयंत चौधरी ने हाल के दिनों में लगातार पश्चिम यूपी के दौरे किए हैं। खास बात ये है कि जयंत ने उन सीटों पर भी सभाएं कीं, जिन पर सपा का भी दावा है। जयंत ने कुछ दिन पहले सहारनपुर कि गंगोह में सभा की थी और इशारे में नोमान मसूद को कैंडिडेट भी घोषित कर दिया था। गंगोह पर सपा के कैराना से विधायक नाहिद हसन भी दावा करते हैं, जो इस सीट पर अपनी बहन को लड़ाना चाहते हैं। जयंत ने हाल ही में शामली के थानाभवन में सभा की और वहां कई नेताओं ने कहा कि यहां से रालोद ही लड़ेगी।

अखिलेश के दौरे के बाद दबाव की राजनाति
इस सबके बीच सबसे दिलचस्प बात अखिलेश यादव के मुजफ्फरनगर दौरे के बाद सामने आई है। गुरुवार को अखिलेश यादव मुजफ्फरनगर आए थे और बुढ़ाना में सभा की थी। इसके सााथ-साथ वो हाल ही में पार्टी में आए हरेंद्र मलिक और पंकज मलिक के घर भी पहुंचे थे। अखिलेश के घर आकर खाना खाने से हरेंद्र मलिक और पंकज का कद बढ़ा है। मामला ये है कि पंकज मलिक मुजफ्फरनगर की चरथावल सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। वो इसी विधानसभा में सक्रिय हैं। अखिलेश के उनके घर जाने के बाद उनका टिकट पक्का होने की चर्चा है।
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जयंत भी आएंगे चरथावल
मुजफ्फरनगर की चरथावल सीट पर रालोद का भी दावा है, पार्टी के कई नेता इस सीट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। अखिलेश के मुजफ्फरनगर से जाने के 24 घंटे के अंदर ही रालोद की ओर से चरथावल में जयंत चौधरी की सभा का ऐलान कर दिया गया है। जिसको लेकर रालोद के नेता मीडिया में तो कह रहे हैं कि ये सभा पहले से प्रस्तावित थी लेकिन दबी जुबान में कई नेता मान रहे हैं कि चरथावल पर दावा मजबूत करने के लिए है। गंगोह और चरथावल ही नहीं सिवालखास और बुढ़ाना जैसी कई सीटें हैं, जिन पर दोनों पार्टी अड़ी हैं। साफ है कि कैमरे और मीडिया में भले दोस्ती पक्की है लेकिन पर्दे के पीछे जोर आजमाइश जारी है।
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जयंत ने प्रियंका से मिलकर भी बनाया था दबाव!
हाल ही में जयंत चौधरी ने प्रियंका गांधी से भी मुलाकात की थी। इसे एक शिष्टाचार भेंट कहा गया था लेकिन राजनीति के जानने वाले जानते हैं कि ये भी उनका अखिलेश यादव पर दबाव डालने का तरीका था। इसका असर दिखा भी था और अखिलेश ने इस मुलाकात के बाद कहा था कि रालोद से उनका गठबंधन कंफर्म है।












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