मुजफ्फरनगर पहुंचे अखिलेश यादव ने दाढ़ी वाले बुजुर्ग का लड्डू तो खाया, भाषण में मुसलमान का जिक्र तक नहीं आया
नई दिल्ली, 12 नवंबर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां अब सक्रिय हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी गुरुवार को पश्चिम में भी अपने अभियान की शुरुआत कर दी है। अखिलेश यादव गुरुवार को मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना पहुंचे। यहां उन्होंने कश्यप जाति के महासम्मेलन में हिस्सा लिया। अखिलेश यादव के इस पूरे कार्यक्रम और उनके भाषण में एक बात जो थोड़ी अलग रही वो थी उनकी मुसलमान नेताओं और खासतौर से मुस्लिमों की परेशानियों से किनारा रखना।

अखिलेश के भाषण में मुसलमान शब्द का जिक्र नहीं
उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के बुढ़ाने में हुए इस कार्यक्रम में कश्यपों के साथ-साथ मुस्लिमों की भी अच्छी तादाद थी। मुस्लिमों ने अखिलेश का कई जगहों पर स्वागत भी किया। इस सबके बावजूद जो बात मुस्लिमों को खली वो ये कि अखिलेश यादव अपने भाषण में बार-बार कश्यपों और पिछड़ी जातियों का धन्यवाद करते रहे। अखिलेश ने किसानों, पिछड़ों को लेकर कई बातें कहीं लेकिन मुसलमानों को लेकर कोई बड़ी घोषणा या वादा तो दूर एक बार आने के लिए धन्यवाद तक नहीं कहा।

मंच से भी नहीं बोला कोई मुस्लिम नेता, किसी के घर भी नहीं गए
अखिलेश यादव के इस कार्यक्रम के मंच पर मुजफ्फरनगर, शामली के सपा के पदाधिकारियों में शामिल कई मुस्लिम नेता शामिल थे लेकिन कोई बड़ा चेहरा इनमें नहीं था। हाल ही में बसपा से सपा में आए पूर्व सांसद कादिर राणा और कैराना विधायक नाहिद हसन भी मुख्य मंच पर नहीं दिखे। मंच पर मुस्लिम नेता के नाम पर मेरठ की सिवालखास सीट से पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद ही थे। अखिलेश यादव अपने कार्यक्रम में दो नेताओं के घर गए। एक गुर्जर जाति के चंदन चौहान और दूसरे जाट हरेंद्र मलिक। किसी मुस्लिम नेता के घर वो नहीं गए।
मंच से मुस्लिम को धक्का देने का वीडियो भी वायरल
अखिलेश यादव का मंच पर जब स्वागत किया जा रहा था तो दाढ़ी टोपी वाले एक स्थानीय सपा नेता भी मंच के बीच में आ गए। जिस पर वहां मौजूद दूसरे नेताओं ने उनको लगभग धकियाते हुए उतार दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहा है। सपा के ही कई मुस्लिम कार्यकर्ताओं ने इसको शेयर करते हुए अपमान की बात कही है।

लोग क्यों बोले- सिर्फ लड्डू खाया
अखिलेश यादव की कार्यक्रम के दौरान मुसलमानों से दूरी की ना सिर्फ सोशल मीडिया पर बल्कि स्थानीय अखबारों में भी चर्चा है। दरअसल लोग चुटकी लेते हुए ये कह रहे हैं कि अखिलेश मुसलमानों से सिर्फ लड्डू खातें हैं। इसकी वजह ये है कि जब अखिलेश का काफिला मुजफ्फरनगर से बुढ़ाना जा रहा था तो मुस्लिम बहुल खालापार में एक मुसलमान बुजुर्ग लड्डूओं की ट्रे लिए रास्ते में खड़े थे। उनको देखकर अखिलेश रुके और उनकी ट्रे से उठाकर लड्डू खाया। इसी की तस्वीर शेयर कर लोग कह रहे हैं कि मुसलमान का लड्डू तो खा लिया (वोट तो ले लेते हैं) लेकिन उसकी बात नहीं की।

इस बात की चर्चा की वजह क्या
अखिलेश यादव के मुस्लिमों का नाम ना लेकर उनको नजरअंदाज करने की बात की चर्चा मुजफ्फरगर में होने की कई वजह हैं। मुजफ्फरनगर और आसपास सपा से पिछड़ा खिसक चुका है और उसके पास वोटबैंक के नाम पर मुसलमान ही हैं। बुढ़ाना में जहां वो आए थे, वहां से भी 2012 में नवाजिश आलम सपा के टिकट से जीत चुके हैं। ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं कि जब राष्ट्रीय लोकदल और कांग्रेस के नेता लगातार मुस्लिमों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। फिर अखिलेश पहले से जुड़े वोटबैंक से दूरी क्यों बना रहे हैं। कई लोगों ने इसे अखिलेश का सॉफ्ट हिन्दुत्व कार्ड कहा है तो कई लोगों ने कहा है कि इससे सपा पश्चिम से साफ हो जाएगी और यहां राष्ट्रीय लोकदल को फायदा होगा।












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