बीएसपी सुप्रीमो मायावती के सियासी भविष्य के लिए कितना अहम है ये यूपी चुनाव
मायावती ने इस बार 99 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, वहीं दलित वोटरों को साधने के लिए हमेशा ही वो उनकी पैरोकारी करती नजर आती रही हैं।
लखनऊ। यूपी के चुनावी रण को जीतने के लिए प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो मायावती हरसंभव कवायद में जुटी हुई हैं। उनकी इस कोशिश की वजह भी है क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को करारा झटका लगा था। यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से बसपा के खाते में एक भी सीट नहीं गई। ऐसे हालात में पार्टी को मजबूत करने के लिए यूपी का ये चुनाव मायावती और उनकी पार्टी के लिए बेहद अहम है। यही वजह है कि मायावती ने यूपी चुनाव को लेकर खास रणनीति अपनाई है।
क्या फिर चलेगा मायावती के सोशल इंजीनियरिंग का दांव?
मायावती ने दलित वोटरों के साथ-साथ मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए 2007 की तर्ज पर एक बार फिर से सोशल इंजीनियरिंग का दांव चला है। मायावती ने इस बार 99 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, वहीं दलित वोटरों को साधने के लिए हमेशा ही वो उनकी पैरोकारी करती नजर आती रही हैं। यूपी के रण में जीत के लिए इन दोनों वर्गों का खास योगदान होता है।

बीएसपी को मुस्लिम और दलित वोटरों से हैं उम्मीदें
बीएसपी सुप्रीमो मायावती भी इस वोट बैंक को अपने साथ जोड़ने के लिए हर दांव खेल रही हैं। यही वजह है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने सहारनपुर में भव्य रैली की। सहारनपुर की आबादी पर नजर डालें तो यहां 42 फीसदी मुस्लिम आबादी और 22 फीसदी दलित आबादी है। लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी को जीत मिली लेकिन इस बार मायावती का पूरा जोर इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने पर है। मायावती ने 2012 के विधानसभा चुनाव इस क्षेत्र की 7 विधानसभा सीटों में से 4 पर जीत हासिल की थी।

मायावती ने यूपी चुनाव में रिकॉर्ड मुस्लिम उम्मीदवारों को बनाया है उम्मीदवार
यूपी में दलित और मुस्लिम आबादी करीब 20 करोड़ के आस-पास है। मायावती का दांव इसी वर्ग को लुभाने पर है। साथ ही पार्टी ने सवर्णों को भी अपने साथ जोड़ने के लिए उन्हें भी अच्छी संख्या में उम्मीदवार बनाया है। कुल मिलाकर मायावती का सीधा जोर यूपी का रण जीतने पर है। इसके लिए उन्होंने बीजेपी और सपा-कांग्रेस गठबंधन पर हमले का कोई मौका हाथ जाने नहीं दे रही हैं।

मायावती के निशाने पर सपा और बीजेपी
मुस्लिम मतदाताओं का वोट नहीं बंटे इसके लिए मायावती ने साफ कर दिया कि समाजवादी पार्टी दो-फाड़ दिख रही है जहां दोनों ही वर्ग एक-दूसरे के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं, जिसका उन्हें नुकसान होगा, ऐसे में उन्होंने मुस्लिम वोटरों को बीएसपी के पक्ष में वोट की अपील अपनी चुनावी सभाओं में की है। पार्टी बीजेपी पर भी हमले का मौका नहीं छोड़ रही है।

आखिर यूपी की गद्दी पर किसका होगा कब्जा?
मायावती अपनी चुनावी सभाओं में आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहती हैं कि बीजेपी इसे खत्म करना चाहती है। साथ ही पार्टी गुजरात में दलितों की पिटाई से लेकर हैदराबाद के रोहित वेमुला केस को भी यूपी चुनाव में उठाती नजर आ रही हैं। कुल मिलाकर इस बार का यूपी चुनाव मायावती की सियासी पारी के लिए बेहद अहम है, इसीलिए वो इस दांव को हर हाल में जीतने के लिए कवायद कर रही हैं।












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