इंसाफ ना मिला तो मेरे पास खुदकुशी ही रास्ता: उन्नाव रेप पीड़िता

लखनऊ। भाजपा विधायक पर रेप का आरोप लागने वाली उन्नाव की लड़की का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर उसके कमरे को जेल बनाकर रखा गया है। लड़की का कहना है 'उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मेरी मांग इंसाफ की है, विधायक और उसके भाई ने मेरे साथ रेप किया है और उसे सजा मिलनी चाहिए।' लड़की ने कहा 'जिला मजिस्ट्रेट ने उसे एक होटल के कमरे में रखा है। स्टाफ यहां खाना और पानी तक नहीं दे रहा है और ना ही मुझे बाहर जाने की इजाजत दी जा रही है। मैं गुनाहगारों की सजा की मांग कर रही हूं, उल्टे मुझे ही जेल की तरह से रखा जा रहा है।

सीबीआई करे इस मामले की जांच

सीबीआई करे इस मामले की जांच

पीड़िता का कहना है कि ये केस सीबीआई को दिया जाना चाहिए क्योंकि प्रशासन का रवैया देख उन्हें इंसाफ की उम्मीद नहीं है। पीड़िता ने कहा, 'योगी जी ने वादा किया था कि वो प्रदेश से क्राइम को साफ कर देंगे लेकिन हकीकत में उल्टा ही हो रहा है। वो सिर्फ अच्छे लगने वाली बातें कहते हैं लेकिन मैं योगी जी से पूछना चाहती हूं कि क्या यही इंसाफ है?'

इंसाफ ना मिला तो खुदकुशी करूंगी

इंसाफ ना मिला तो खुदकुशी करूंगी

रविवार को सीएम आवास के सामने खुदकुशी की कोशिश कर चुकी पीड़िता का कहना है कि वो इंसाफ के लिए लड़ रही है लेकिन अगर सरकार ने उनकी मदद ना की और विधायक को गिरफ्तार ना किया गया तो मैं आत्महत्या कर लूंगी। पीड़िता के पिता की सोमवार को हिरासत में मौत के बाद लड़की और उसके परिवार को प्रशासन ने एक होटल में रखा है। ऐसा प्रशासन ने परिवार की सुरक्षा के लिए करने की बात कही है।

 मामले में हो चुकी हैं पांच गिरफ्तारियां

मामले में हो चुकी हैं पांच गिरफ्तारियां

लड़की का आरोप है कि एक साल पहले विधायक उसके भाई और उसके साथियों ने उससे रेप किया लेकिन उसकी शिकायत पुलिस ने नहीं सुनी। रविवार को उसने सीएम आवास पर आत्महत्या की कोशिश की तो मामला मीडिया में आया। इसके बाद सोमवार को युवती के पिता की न्यायिक हिरासत में संदिग्ध मौत हो गई। इस मौत के लिए भी युवती ने विधायक और उसके भाई को जिम्मेदार बताया है।

इस प्रकरण की जांच के लिए मंगलवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट में भी मामले को लेकर याचिका दायर की गई है, जो स्वीकार कर ली गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खुद ही मामले पर संज्ञान लेते हुए यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस दिया है। इस मामले में पांच गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। हालांकि इस सबके वाबजूद आरोपी विधायक का नाम एफआईआर में नहीं रखा गया है।

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