अनोखा मंदिर जहां जमीन में काफी अंदर तक धंसा है हनुमान जी का एक पैर!

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    Uttar Pradesh के Sultanpur में है Hanuman जी का अनोखा मंदिर । वनइंडिया हिंदी

    सुल्तानपुर। यूं तो हर धाम और मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। लोग अक्सर अपनी मनोकामना पूरी करवाने मंदिर जाते हैं। कई सिद्ध मंदिर हैं जहां जाने मात्र से बिगड़े काम बन जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर राम की नगरी अयोध्या से सटे जिले में मौजूद है। मंदिर का नाम है विजेथुवा महावीरन धाम, जो बड़ी आस्था का केंद्र है। बताया जाता है कि यहां हनुमान जी की मूर्ति का एक पैर जमीन में धंसा है। यही नहीं यहां पर एक ऐसा तालाब है, जहां हनुमान जी ने कालनेमि के वध से पहले स्नान किया था।

    कादीपुर तहसील में बना है विजेथुवा महावीरन धाम

    कादीपुर तहसील में बना है विजेथुवा महावीरन धाम

    जिले के कादीपुर तहसील में बने विजेथुवा महावीरन धाम का जिक्र पुराणों में है। वो इस तरह कि इस स्थान पर हनुमान जी ने कालनेमि राक्षस का वध किया था। आज भी यहां पर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है जिसका एक पैर जमीन में धंसा हुआ है, जिसकी वजह से मूर्ति थोड़ी तिरछी है। यहां के निवासी एवं पत्रकार श्याम चंद्र श्रीवास्तव की माने तो पुजारियों ने मूर्ति को सीधा करने के लिए खुदाई तक किया था लेकिन 100 फिट से अधिक खुदाई कराने के बाद भी मूर्ति के पैर का दूसरा सिरा नही मिल सका था।

    मकरी कुंड तालाब जहां नहाने से दूर होते हैं पाप

    मकरी कुंड तालाब जहां नहाने से दूर होते हैं पाप

    इस प्राचीन धाम में आज भी वो तालाब मौजूद है जिसमें हनुमान जी ने स्नान किया था। श्याम चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि आज इस तालाब का नाम मकरी कुंड है, और लोग मंदिर में दर्शन करने के पूर्व इस कुंड में स्नान करते हैं। ये भी कहा जाता है कि इस कुंड में स्नान करने से लोगों के पाप कट जाते हैं।

    ऐसा है यहां का इतिहास

    ऐसा है यहां का इतिहास

    रामायण में इस स्थान का जिक्र है कि जब श्रीराम और रावण के बीच चल रहे युद्ध में लक्ष्मण जी को बाण लगा और वो मूर्छित हो गए तो वैद्यराज सुषेण के कहने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय की तरफ चले। हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने में असफल हो जाएं इसके लिए रावण ने अपने एक मायावी राक्षस कालनेमि को भेजा, ताकि वो रास्ते में ही हनुमान जी का वध कर दे। कालनेमि मायावी था और उसने एक साधु का वेश धारण कर रास्ते में राम-राम का जाप करना शुरू कर दिया। थके-हारे हनुमान जी राम-राम धुन सुन कर वहीं रुक गए। रामायण के अनुसार साधू के वेश में कालनेमि ने हनुमान जी से उनके आश्रम में रुक कर आराम करने का आग्रह किया। हनुमान जी उसकी बात में आ गए और उसके आश्रम में चले गए। उसने हनुमान जी से आग्रह किया कि वह पहले स्नान कर लें उसके बाद भोजन की व्यवस्था की जाए। हनुमान जी स्नान के लिए तालाब में गए जहां कालनेमि ने मगरमच्छ बनकर हनुमान जी पर हमला किया था।

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