अपराध से निपटने का योगी सरकार का नया फॉर्मूला
यूपी पुलिस और कानून व्यवस्था को बेहतर करने के लिए योगी आदित्यनाथ करेंगे पुलिस को डिजिटल, ऑनलाइन अपलोड करिए वीडियो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर योगी सरकार लगातार निशाने पर है, लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं के बाद जिस तरह से योगी सरकार आलोयनाओं का सामना कर रही है, उसके बाद अब मुख्मयंत्री ने प्रदेश की पुलिस को को तकनीकी रूप से मजबूत करने का फैसला लिया है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने हर स्तर पर बड़े बदलाव का बात कही है।

हाईटेक होगी यूपी पुलिस
प्रदेश की पुलिस और कानून व्यवस्था को बेहतर करने के लिए मुख्मयंत्री ने यूपी 100 योजना को और मजबूत करने का फैसला लिया है। यूपी 100 की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की थी, लेकिन अब इस योजना को योगी सरकार ने और पुख्ता करने का फैसला लिया है। अब यूपी 100 को लोगों की शिकायतों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का अधिकार दिया जाएगा, इसके साथ ही लोग अपनी शिकायतों को वीडियो के साक्ष्य के तौर पर यूपी 100 की वेबसाइट पर अपलोड करते हैं तो उसके आधार पर भी एफआईआर दर्ज करना होगा।

सड़कों पर फर्राटा भरेंगे पुलिस के वाहन
यूपी की सड़कों पर पहले से ही 3200 एसयूपी वाहनों को पेट्रोलिंग के लिए उतारा गया है, लेकिन इसके अलावा 1600 दो पहिया वाहनों की और मंजूरी दी गई है जो शहरी पुलिसिंग को मजबूत करेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि प्रदेश से अपराध का नामो निशान मिट जाए। ऐसे में जो लोग यूपी 100 को मुश्किल समय में फोन करते हैं वह अब अपराध का वीडियो बना सकते हैं और इसे यूपी 100 की वेबसाइट पर अपोलड कर सकते हैं।

वीडियो अपलोड करिए, दर्ज होगी एफआईआर
अपना वीडियो अपलोड करते समय उस नंबर को टैग करना नहीं भूले जो आपको डॉयल 100 पर शिकायत के दौरान ओटीपी के जरिए मिलता है। जिसके आधार पर शिकायतकर्ता की शिकायत को दर्ज किया जाएगा और मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी। यहां यह बात खास है कि वीडियो को पीड़ित खुद ही अपलोड करे। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि हर रोज लोगों की शिकायतें डायल 100 पर आती हैं लेकिन पुलिस उनकी एफआईआर दर्ज नहीं करती है।

पुलिस का बहाना अब नहीं चलेगा
लेकिन अब अगर आप 100 नंबर डायल करते हैं तो पुलिस आपके पास 15 मिनट में पहुंचेगी, इसके साथ ही आपकी शिकायत को संबंधित थाने पर पहुंचा दिया जाएगा यूपी पुलिस के एडिशनल डीजीपी अनिल अग्रवाल ने बताया कि यह नई शुरुआत इसलिए की गई है ताकि पुलिस को जिम्मेदार ठहराया जा सके। इसके बाद पुलिस स्टेशन को यह वेबसाइट पर डालना होगा कि संबंधित मामले में क्या कार्रवाई की गई, क्या मामले में एफआईआर दर्ज की गई है या नहीं। जो वीडियो अपलोड किया जाएगा उसे हर संबंधित पुलिस अधिकारी देख सकता है और इसे बतौर सबूत इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे में कार्रवाई नहीं करने का कोई बहाना नहीं होगा।












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