मोदी सरकार के 3 साल: पीएम के गोद लिए गांव जयापुर के लोग क्यों हैं खफा?

नरेंद्र मोदी सरकार का तीन साल पूरा हो चुका है। उनके गोद लिए गए गांव जयापुर के ग्रामीण एक तरफ हुए विकास से खुश हैं तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार की वजह से पीएम के दूत से खफा हैं।

वाराणसी। 16वें लोकसभा चुनाव के बाद देश की सांस्कृतिक राजनधानी वाराणसी में परिवर्तन की बयार तेजी से चलनी शुरू हो गयी और यहां के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गयी विकासकारी योजनाओं से उनका संसदीय क्षेत्र भी लाभान्वित होना शुरू हो गया। इन सभी योजनाओं के बीच 7 नवम्बर 2014 को पीएम द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के ही जयापुर गांव को आदर्श ग्राम योजना की शुरूआत करते हुए गोद लिया गया। लगभग चार हजार की आबादी वाले इस गांव में उस समय मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पानी व सड़क तक की भी समस्या थी पर पीएम द्वारा गोद लिये जाने के बाद धीरे-धीरे गांव की तस्वीर ही बदलती गयी लेकिन लोग पीएम के दूत सांंसद सीआर पाटिल से खफा हैं और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं।

पीएम के दूत पर छलावा करने के आरोप

पीएम के दूत पर छलावा करने के आरोप

गांव में जहां सोलर एनर्जी के माध्यम से बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया तो वहीं पानी व सड़क की व्यवस्था भी दुरूस्त की गयी और इन सबकी जिम्मेदारी गुजरात के भाजपा सांसद सीआर पाटिल को सौंपी गयी। 26 मई को मोदी सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल पूरे हो गए और ऐसे में सरकार अपनी उपलब्धियों को गिनाने के लिए जगह-जगह कार्यक्रम भी आयोजित कर रही है लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है जिसकी बानगी पीएम के आदर्श ग्राम जयापुर में ही देखने को मिल रही है। यहां ग्राम प्रधान नारायण पटेल सहित ग्रामीणों का भी यही मानना है कि विकासकारी योजनाओं के नाम पर उनके साथ पीएम मोदी के दूत सांसद सीआर पाटिल ने छलावा करने का काम किया है।

पीएम के दूत पर ग्राम प्रधान के हैं कई आरोप

पीएम के दूत पर ग्राम प्रधान के हैं कई आरोप

यही नहीं जयापुर गांव के ग्राम प्रधान नारायण पटेल ने बताया कि पीएम मोदी द्वारा आर्दश ग्राम योजना के तहत जयापुर को गोद लिये जाने के बाद सर्वप्रथम गांव में बिजली,पानी और सड़क की व्यवसथा को दुरूस्त करने का काम किया गया जिसमें वर्तमान में सड़क की स्थिति ऐसी है कि जिस मार्ग को गुजरात के सांसद सी.आर.पाटिल के निर्देश पर गुजरात की ही कंपनी द्वारा बनाया गया था वो आज पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है और कंक्रीट वाली सड़कों पर चलने के लिए ग्रामीण विवश हैं।हलांकि ग्राम प्रधान नारायण पटेल के अनुसार अब इसका काम पी.डब्ल्यू.डी. ने अपने हाथों में ले लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में इसके लिए सांसद सी.आर.पाटिल के ऊपर आरोप लगाते हुए कहा कि कमीशनखोरी के चक्कर में पाटिल ने ग्रामीणों को छलने का काम किया है। इससे इतर अब बात की जाये पानी की तो गांव में इसकी व्यवस्था के लिए सांसद पाटिल के द्वारा ही दो सबमर्सिबल लगवाया गया और पानी की पाइप गांव भर में दौड़ायी गयी जो आज पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और सबमर्सिबल भी बंद हो चुका है। इसके लिए भी प्रधान नारायण पटेल द्वारा सांसद पाटिल पर ही आरोप मढ़ा।

गांव का हुआ विकास लेकिन सांंसद ने की कमीशनखोरी

गांव का हुआ विकास लेकिन सांंसद ने की कमीशनखोरी

इसके विपरीत गांव की दशा को बदलने के लिए मोदी सरकार द्वारा किये गये कार्यों की लोगों ने प्रशंसा भी की। ग्राम प्रधान नारायण पटेल ने बताया कि गोद लिये जाने के पूर्व गांव की दशा काफी खराब थी लेकिन इसके बाद गांव में जहां बच्चों के लिए 'नंद घर' बनाया गया तो वहीं सिडिंकेट बैंक सहित कुल दो बैंको की शाखा भी खोल दी गयी। किसानों के लिए जैविक खाद की उपलब्धता के लिए भंडारण खुलने के साथ ही समय-समय पर कृषि वैज्ञानिक गांव में कैम्प लगाकर किसानों को अच्छी फसल पैदा करने के गुर भी बताते हैं। इसके साथ ही किसानों के उत्पादन को सीधा ग्राहक तक पहुंचाने के लिए भी गेहूं क्रय केन्द्र की व्यवस्था की गयी है जिससे बिचौलियों की मध्यस्थता समाप्त हो गयी है। आज जो समस्याएं गांव में थी वो बहुत हद तक खत्म हो गयी हैं। पीएम की सोच है कि 2022 तक ऐसे ही हर गांव का निर्माण करना है और जनता की सोच भी है कि ऐसा होगा। प्रधान ने कहा कि सूरत के सांसद सी.आर.पाटिल ने यहां जो भी काम किये उसमें काफी कमी रही। सांसद पाटिल के साथ गांव के कुछ अवांछनीय तत्व मिलकर कमीशनखोरी के चक्कर में ग्रामीणों के साथ छलावा करने का काम किया। गुणवत्तायुक्त काम नहीं किया गया जिसकी बानगी शौचालय से लेकर सड़क तक देखने को मिल जायेगी।

20 रुपये महीने पर इस गांव में मिलती है बिजली

20 रुपये महीने पर इस गांव में मिलती है बिजली

जिस गांव में दो चार घंटे बिजली रहना मुश्किल होता था, आज जयापुर गांव में 24 घंटे बिजली मिलती है। इस बात से गांव के लोग बेहद खूश है। उन्हें ये लगता ही नहीं है कि वे गांव में रहते है। गांव में बिजली रहने का कारण है कि एक तो प्रदेश में सरकार बदलने के बाद जो पहले सपा सरकार इस गांव से भेदभाव करती थी अब वह खत्म हो गया है जिसके चलते गांव में ज्यादा से ज्यादा बिजली रहती है और कभी कट भी जाती है तो गांव पीएम के द्वारा लगाये गये सोलर सिस्टम से शाम को छह बजे से सुबह छह बजे तक सोलर प्लांट से बिजली सप्लाई होती है। इस बिजली के लिए गांव के लोगों को महज 20 रुपया महीना ही देना होता है। उसके बावजूद गांव के कुछ लोग दबंगई करके ये 20 रुपया महीना भी नहीं देते हैं। बिजली की व्यवस्था ही एक मात्र गांव में ऐसी है जिससे ग्रामीण संतुष्ट हैं क्योकि सोलर एनर्जी का प्रयोग कर गांव में आज बिजली लगभग 20 से 22 घंटे तक रह रही है।

सूबे की नई सरकार से जयापुर को कई उम्मीदें

सूबे की नई सरकार से जयापुर को कई उम्मीदें

गांव के ही राजेश ने बताया कि इस गांव को पीएम ने गोद का क्या लिया जैसे इस गांव की तकदीर ही बदल गयी। गांव में अचानक से अधिकारियों का दौरा होने लगा और गांव में विकास योजनाओं की एक के बाद एक बरसात होने लगी लेकिन गांव के विकास का जिम्मा जिस गुजरात के सांसद सी आर पाटिल को दिया गया था उन्होंने पीएम के विकास योजनाओं की आड़ में इतनी कमीशनखोरी की कि सड़क, शौचालय, पानी सारी सुविधाओं की शुरुआत होते ही सब दो महीने में ही बर्बाद हो गया। गांव के लोग पीएम से तो बेहद खूश है लेकिन सीआर पाटिल से इतने नाराज हैं कि वे कहते है कि वे उनको गांव में घुसने नहीं देंगे। उन्होने पीएम मोदी के साथ ही इस गांव की जनता को धोखा दिया है। अब प्रदेश में सरकार आने के बाद राजेश का कहना है कि जो विकास के कार्य पाटिल की वजह से ध्वस्त हो चुके थे अब उसमें नये सिरे से तेजी आयी है और दोबारा काम शुरू हो रहा है।

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