किन्नर का था 70 साल की महिला से समलैंगिक रिश्ता, राज कायम रखने के लिए किया बेटी का कत्ल
नोज को जब इस बात की जानकारी हुई कि सीमा दिमागी रूप से बीमार है और बंगाली ब्राह्मण है तो वो भी अपना टाइटिल बदलकर वहीं रहने लगा। इस जानकारी के बाद उसने अपना टाइटिल बदल यादव से तिवारी कर लिया।
वाराणसी। वाराणसी में 17 अक्टूबर 2016 को गायत्री नगर कॉलोनी की रहने वाली महिला सीमा के मर्डर का खुलासा किया गया है। मर्डर करने वाला मनोज यादव जो एक किन्नर है, सीमा के यहां किराए पर रहता था। इसने किसी को भी नहीं बताया था कि वो असल जिंदगी में किन्नर है। लंका थानाध्यक्ष राजीव सिंह ने बताया कि मनोज का 70 साल की बुजुर्ग महिला राधा के साथ समलैंगिक संबंध था और इस बात की जानकारी बेटी सीमा को हुई तो इसने अपने राज पर से पर्दा उठता देख उसकी हत्या कर दी और पुलिस को गुमराह करने के लिए खुद ही इन हत्याकांड की पैरवी भी करता था।

ब्राह्मण बनकर आया किराए का कमरा लेने, बेटी के मानसिक बीमारी का उठाना चाहता था फायदा
एसपी सिटी दिनेश सिंह ने बताया ये केस काफी ब्लाइंड था। दरसअल सीमा अपनी मां राधा के साथ रहती थी और वो LIC में टाइपिस्ट के पद पर बनारस में ही तैनात थी। मनोज को जब इस बात की जानकारी हुई कि सीमा दिमागी रूप से बीमार है और बंगाली ब्राह्मण है तो वो भी अपना टाइटिल बदलकर वहीं रहने लगा। इस जानकारी के बाद उसने अपना टाइटिल बदल यादव से तिवारी कर लिया। इसके बाद राधा से किराये पर कमरा लिया और रहने लगा। यही नहीं पुलिस ने बताया कि अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए वो राधा की सेवा करने लगा और फिर मनोज ने धीरे-धीरे सीमा की मां राधा जिसकी उम्र 70 है, उसके साथ समलैंगिक संबंध स्थापित किया।

सीमा के विरोध पर पहले गला दबाया फिर फर्श पर पटक कर दी मौत
सीमा को मनोज और मां के रिलेशन का पता चल गया था। उसने मनोज से इस बात को लेकर आपत्ति भी की थी। मनोज जानता था कि मां राधा के मरने के बाद प्रॉपर्टी सीमा के नाम हो जाएगी। मनोज ने सीमा को उस समय मारा जब मां राधा कमरे में नहीं थी। 16 तारीख को दोपहर को सीमा का पहले गला दबाया गया, जब उसने विरोध किया तो फर्श पर उसका माथा पटक दिया। जिससे उसकी मौत हो गई। मर्डर के बाद वहां से साक्ष्य मिटाकर भाग गया और रात को घर आया। फिर से मां राधा को सांत्वना देकर उसके साथ रहने लगा।

खुद ही हत्या की पैरवी करता था, पकड़े जाने पर रिश्वत की बात की
एसओ राजीव सिंह ने बताया कि मनोज अक्सर थाने में आकर पैरवी करता था कि उस पर किसी को शक न हो। जांच फिर से शुरू की गई और ट्रेस किया गया कि मर्डर के दिन आखिर मनोज कहां था। घटना के दिन उसके मोबाइल का डिटेल निकाला गया तो घटना के बाद वो भी बंद पाया गया। जबकि अन्य दिनों में ऑन पाया गया। संदेह के तहत पूछताछ किया गया तो वो पुलिस को रिश्वत देने का प्रयास करने लगा। कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने अपना जुर्म कबुल लिया। राधा बुजुर्ग होने के कारण मनोज के व्यवहार को समझ नहीं पाई। मनोज मूल रूप से प्रताप गढ़ का रहने वाला है और 12 साल पहले पिता की पुश्तैनी प्रॉपर्टी बेचकर वहां से वाराणसी आ गया था। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से इसने ग्रेजुएशन किया है और इसका असली नाम मनोज यादव है।
किन्नर होने का राज छुपाए था
मनोज ने बताया कोई नहीं जनता था कि किन्नर हूं। मुझे ऐसे परिवार की तलाश थी, जिसके साथ जीवन काट सकूं। राधा और सीमा दोनों अकेली थी। राधा से संबंध बना, पहले उसने काफी मना किया। बुजुर्ग होने की बात कहने लगी। बाद में वो सेवा के नाम पर उन्हें छूने लगा। समाज में लोग मां-बेटा समझते थे। सीमा को संबंधों की जानकारी हो गई थी। वो नापसंद करती थी और घर से जाने की बात कहती थी। इसलिए उसे रास्ते से हटा दिया।












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