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ओबीसी आरक्षण बिल के सहारे पिछड़ों को साधेगी योगी सरकार, सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशें लागू करने पर मंथन शुरू

लखनऊ, 12 अगस्त: ओबीसी आरक्षण से जुड़ा 127वां संविधान संशोधन बिल लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में पारित हो चुका है। लगभग सभी दलों ने इसका समर्थन किया था। यूपी में अगले साले होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से इस बिल की अहमियत काफी ज्यादा है। शासन में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों की माने तो अब योगी सरकार इस बात पर मंथन कर रही है कि क्या चुनाव से पहले सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशों को लागू किया जा सकता है। सरकार इसे लागू करने की गुंजाइश तलाश रही है। यदि ऐसा हुआ तो योगी सरकार एक तीर से कई निशाने साध सकती है।

योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी लंबे समय से इस रिपोर्ट को लागू करने की मांग कर रही है। सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने पिछले दिनों भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह से मुलाकात की थी। तब उन्हें आश्वासन भी मिला था कि समय रहते आपकी मांगों पर विचार किया जाएगा। लोकसभा में संशोधन बिल पास होने के साथ ही इस बात की संभावना प्रबल हो गई है कि यूपी की योगी सरकार लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी समाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को लागू कर एक तीर से कई निशाने साध सकती है। सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर ने कहा कि पार्टी ने पहले ही अपनी मांग सरकार के सामने रख दी थी। हम चाहते हैं कि यूपी में सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू होनी चाहिए और इसका लाभ दबे कुचले लोगों को मिले।

शासन एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने वन इंडिया डॉट काम को बताया कि लोकसभा में ओबीसी से जुड़ा बिल पास होने के बाद अब सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि क्या यूपी में सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशें लागू कर सकती है। हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला सीएम को ही लेना है लेकिन सरकार चुनाव से पहले लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी इस रिपोर्ट को लागू कर सकती है।

यूपी चुनाव में बीजेपी को मिल सकता है बड़ा फायदा
यूपी समेत पूरे उत्तर भारत में सियासत का पहिया जाति के आस-पास ही केंद्रित रहा है। राज्य में यादव समाजवादी पार्टी का वोट बैंक रहा है तो कुर्मी और कोइरी फिलहाल बीजेपी के पाले में है। 2017 के यूपी विधान सभा चुनाव में बीजेपी ने अति पिछड़े वर्ग और अति दलित जातियों के वोट की बदौलत ही राज्य में 14 वर्षों की सियासी वनवास खत्म किया था और सत्ता हासिल की थी।

बीजेपी के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है यह बिल
अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों खासकर उत्तर प्रदेश में पिछड़ी जाति की संख्या अधिक है। यूपी में जाट भी पिछड़ा वर्ग में आते हैं जबकि हरियाणा में यह पिछड़ा वर्ग में नहीं है। ऐसे में हरियाणा की बीजेपी सरकार जाटों खासकर किसानों को खुश करने के लिए उसे ओबीसी लिस्ट में डाल सकती है। क्योंकि फिलहाल हरियाणा में किसान आंदोलन की वजह से बीजेपी की स्थिति खस्ताहाल है। अन्य राज्यों में जहां बीजेपी की सरकारें हैं, वहां कई जातियों को लाभ दिलाने के लिए ओबीसी लिस्ट में डाला जा सकता है। इससे अति पिछड़े वर्ग का वोट बीजेपी को मिलने के आसार हैं।

यूपी में लागू हो सकती है सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशें
इस बिल के कानून बनने से उत्तर प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशें लागू कर सकती हैं। योगी सरकार ने जस्टिस राघवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में इस कमेटी का गठन किया था। इस समिति ने राज्य में ओबीसी आरक्षण को तीन वर्गों में बांटने की सिफारिश की थी। माना जाता है कि यूपी में ओबीसी आरक्षण का अधिकांश लाभ यादव, कुर्मी और जाट समुदाय के लोग उठा लेते हैं और बाकी उप जातियों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है।

लोकसभा में पास हुआ था 127वां संशोधन बिल
127वां संविधान संशोधन बिल संविधान के अनुच्छेद 342A के खंड 1 और 2 में संशोधन करेगा और एक नया खंड 3 भी जोड़ेगा। इसके अलावा यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 366 (26c) और 338B (9) में भी संशोधन कर सकेगा। 127वें संशोधन विधेयक को यह स्पष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि राज्य और केंद्रसासित प्रदेश सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) की "राज्य सूची" बनाने के लिए स्वतंत्र होंगे।

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