यूपी के दस लाख दिव्यांग मतदाताओं पर है राजनीतिक दलों की नजर, जानिए इनको रिझाने के लिए कौन क्या कर रहा
लखनऊ, 15 नवंबर: उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों की नजर अब यूपी के दस लाख दिव्यांग मतदाताओं पर है। दिव्यांगों को लुभाने के लिए सभी राजनीतिक दल पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनके वोटों का महत्व समझकर ही सपा ने सितम्बर माह में दिव्यांगों की बैठक बुलाई थी तो वहीं बसपा 21 नवम्बर को बैठक करने जा रही है। बीजेपी पहले ही अपने यहां दिव्यांग प्रकोष्ठ का गठन कर चुकी है जबकि योगी सरकार ने भी दिव्यांगों को लेकर काफी कदम उठाए हैं। मायावती ने भी अपने समय में यूपी की राजधानी लखनऊ में ही विकलांग विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। इसी के बहाने बीएसपी अब दिव्यांग मतदाताओं को लुभाने में जुटी है। इसकी जिम्मेदारी बीएसपी ने सतीश मिश्रा जैसे कद़दावर नेता को पकड़ाई है जो स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से इनतक पहुंचने की कवायद में जुटे हुए हैं।

पहले राजनीतिक दलों में नहीं थी दिव्यांगों की पूछ
जनतंत्र में बहुलता और एकजुटता की पूछ हर जगह होती है। पहले दिव्यांगों की पूछ राजनीतिक दलों में न के बराबर थी। लेकिन अब कांग्रेस व भाजपा दिव्यांग प्रकोष्ठ बना चुकी हैं। दिव्यांगों को दृष्टि में रखकर उप्र सरकार ने कई कार्यक्रम भी कराएं हैं। दिव्यांगों के लिए उपकरण वितरण को समारोह के रूप में हर जिले व ब्लाक मुख्यालय पर करना भाजपा का राजनीतिक स्टंट ही है। भाजपा की सरकार बनते ही विकलांग को दिव्यांग नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया था। इसका कारण था कि वे इनके महत्व को समझते थे। इसके बाद तो हर पार्टी इनके महत्व को समझने लगी।

सपा ने सितंबर में बुलाई थी दिव्यांगों की बैठक
अभी समाजवादी पार्टी भी कई बार मंथन करने के बाद सितम्बर माह में पूरे प्रदेश के दिव्यांगों की बैठक बुलाई थी। पार्टी में भी दिव्यांग प्रकोष्ठ बनाने पर चर्चा हुई। दिव्यांगों के लिए विभिन्न पहलुओं पर बात होने के बाद इनके राजनीतिक महत्व पर भी बात हुई थी। पूरी सम्भावना है कि चुनाव से पूर्व समाजवादी पार्टी दिव्यांग प्रकोष्ठ बना लेगी। बहुजन समाज पार्टी दिव्यांगों के महत्व को समझते हुए 21 नवम्बर को बैठक बुलाई है। दिव्यांग जनों की उस बैठक में मायावती के भी रहने की सम्भावना है। उस बैठक में दिव्यांगों को लुभाने के लिए घोषणा पत्र में उनके लिए किये जाने वाले विशेष कामों पर भी चर्चा हो सकती है।

योगी ने दिव्यांगों को लेकर लिया था अहम फैसला
उत्तर प्रदेश लोक सेवाओं में दिव्यांग जनों को 21 श्रेणियों में चार प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. इसके लिए नए सिरे से शासनादेश जारी होगा. बुधवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई. राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह नेए बताया कि 1996 में राज्य के अंदर दिव्यांगजनों के लिए सात श्रेणियां बनी थीं, जिसे 2016 में बढ़ाकर 21 कर दिया गया। 1996 में हर विभाग में दिव्यांगजनों को तीन प्रतिशत आरक्षण मिलता था लेकिन, 2016 में इसे बढ़ाकर चार प्रतिशत कर दिया गया। इसके बाद 2019 में राज्य सरकार ने सीधे आरक्षण के प्रावधान के लिए सभी 68 विभागों में समूह क, ख, ग और घ में किस श्रेणी के कितने पद होने चाहिए, इसके लिए एक समिति बनाई है।

बड़ा एलान कर सकती है बसपा, सतीश मिश्रा ने लिया है जिम्मा
माना जा रहा है कि मायावती स्वयं सेवी संस्थाओं और दिव्यांगों से मिलने के दौरान कोई बड़े एलान करेंगी। हो सकता है उनकी मदद करने के लिए बसपा कोई बड़ी घोषणा करे। बसपा के वरिष्ठ नेताओं और एडवाइजर्स का मानना है कि किसी भी दल ने अभी तक स्वयं सेवी संस्थाओं से जुड़कर उनके हित का काम करने की नहीं सोची है. ऐसे में बसपा का प्लान है कि पहले ही इन संस्थाओं से जुड़कर इन्हें अपनी ओर कर लिया जाए। पार्टी ने अब सतीश चंद्र मिश्रा ने स्वयं सेवाल संस्थानों को बसपा से जोड़ने का जिम्मा लिया है।

मायावती ने बनाया विकलांग विश्वविद्यालय
मायावती जब प्रदेश की मुख्यमंत्री रहते हुए लखनऊ में डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। यहां पर कई दिव्यांग लोगों को शिक्षा दी जाती है। रणनीतिकारों का प्लान है कि अब दिव्यांगजन से मिलकर उन्हें बताया जाना चाहिए कि बसपा की सरकार रहते हुए उनके लिए कई काम हुए हैं। अगर बसपा की सरकार फिर बनती है तो और काम किए जाएंगे।












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