Taj Corridor Scam: CBI जांच की दिशा तय करेगी BSP चीफ मायावती के 2024 का चुनावी रुख?

यूपी की पूर्व सीएम मायावती की मुश्किलें बढ़ने वाली है। सीबीआई अब ताज कॉरिडोर की फाइल दोबारा खोल रही है। हालांकि इसमें मायावती तक आंच पहुंचेंगे या नहीं यह देखना दिलचस्प होगा।

मायावती

UP News: उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित ताज कॉरिडोर घोटाला मामले में 20 साल में ताज कॉरिडोर में पहली बार अभियोजन को मंजूरी मिली है। इस मामले में हालांकि पूव सीएम मायावती का नाम सामने नहीं आया है लेकिन यदि नाम सामने आता है तो मायावती की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में मायावती का क्या रुख रहता है। राजनीतिक जानकारों और चुनावी विश्लेषकों की माने तो मायावती का रुख बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि CBI की जांच की दिशा क्या होती है।

विपक्ष के आरोप को नकारने की कोशिश

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो एक तरफ जहां मायावती विपक्ष के इस आरोप को नकारने की कोशिश करेंगी कि वह बीजेपी की बी टीम नहीं है दूसरी ओर मायावती को अपने आपको इस पूरे प्रकरण में पाक साफ निकलना होगा। यदि मायावती इस मामले से बाहर नहीं निकलती हैं तो कई राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा सकते हैं। यदि उनको क्लीन चिट मिल जाती है तो राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बीजेपी के साथ जो नजदीकी है उसपर असर पड़ सकता है।

जांच का रुख तय करेगा मायावती का रुख

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो बहुचर्चित मामले की जांच का रुख ही तय करेगा कि 2024 से पहले मायावती का रुख क्या होगा। क्या वह 2024 में अकेले चुनाव मैदान में उतरेंगी या फिर वह गैर बीजेपी के उस मोर्चे में शामिल होंगी जिसकी कवायद में बिहार के सीएम नीतीश कुमार और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव जुटे हुए हैं। हालांकि लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान नीतीश कुमार ने मायावती को लेकर पूछे गए सवाल को यह कहकर टाल दिया था कि फिलहाल वह अखिलेश से मिलने आए हैं।

गैरबीजेपी गठबंधन की कवायद में जुटे हैं बीजेपी

दरअसल बिहार के सीएम नीतीश कुमार पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी समेत कई नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। नीतीश की कोशिश 2024 से पहले देश में गैर कांग्रेसी और गैर बीजेपी गठबंधन बनाने की है। नीतीश हालांकि अपने इस मिशन में मायावती को जरूर शामिल करना चाहेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि मायावती के बिना यूपी में कोई गठबंधन सफल नहीं होगा। ऐसे समय में जब मायावती को 2012 के बाद से ही लगातार चुनावी झटके मिल रहे हैं।

मायावती के बिना यूपी में नीतीश को आएगी मुश्किल

हालांकि मायावती जब 2007 में सत्ता में आईं थीं उसके पांच साल बाद ही 2012 में उनकी कुर्सी चली गई थी। तब सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव ने सत्ता संभाली थी। इस बीच अखिलेश के शासनकाल में भी मायावती के ताज कॉरिडोर की फाइल नहीं खुली। मायावती हालांकि 2012 के बाद से ही लगातार चुनाव हार चुकी हैं। 2014 का लोकसभा चुनाव, 2017 का विधानसभा चुनाव, 2019 का लोकसभा चुनाव और फिर 2022 का विधानसभा चुनाव। हालांकि इन सबके बीच मायावती अपना वोट बैंक बचाने में कामयाब रहीं। यही वजह है कि आज भी यूपी में करीब 12 फीसदी जाटव वोट उनका पक्का वोटर है।

मायावती के सामने पाक साफ निकलने की चुनौती

वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि मायावती के लिए यह एक कठिन समय है। हालांकि अभी इस मामले में जांच की दिशा क्या होती है इसपर बहुत कुछ निर्भर करेगा। मायावती के सामने दोहरी चुनौती है। एक तो वह कोशिश करेंगी कि इस मामले में यदि उन तक आंच आए तो उनको 2024 से पहले इससे पाक साफ निकल जाएं। दूसरा यह कि अपने उपर लगातार बीजेपी की बी टीम होने का जो आरोप विपक्ष लगा रहा है उसको वो मिटा सकें।

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