UP में अनिवार्य सेवानिवृत्ति को लेकर विभागों की सुस्त चाल Yogi सरकार पर कैसे पड़ रही भारी, जानिए
लखनऊ, 02 सितंबर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल में विभिन्न विभागों के कामकाज में सुधार लाने की एक पहल की गई थी। इस पहल के तहत सभी विभागों से 50 साल के उपर के अधिकारियों और कर्मचारियों के अनिवार्य सेवानिवृत्ति को लेकर स्क्रीनिंग कर डिटेल भेजने को कहा गया था। यह जानकारी सभी विभागों को 15 अगस्त तक भेजने को कहा गया था लेकिन समय बीत जाने के बाद भी अभी तक किसी भी विभाग की तरफ से इससे संबंधित जानकारी शासन को नहीं भेजी गई है। हालांकि विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस मामले में दोबारा तीस सितंबर तक रिपोर्ट मांगी जाएगी। जिसके बाद आगे का कदम उठाया जाएगा।

एक भी विभाग ने नहीं मुहैया कराई अपनी रिपोर्ट
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हमें अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए कर्मचारियों या अधिकारियों की स्क्रीनिंग के बारे में किसी भी विभाग से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है या जो अब तक अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।" आलम यह है शासन इस बात के इंतजार में बैठा है कि विभागों की तरफ से इससे जुड़ी डिटले भेजी जाएगी लेकिन विभागों से जुड़े अधिकारी इस आदेश को दबाकर बैठे हुए हैं। इसको लेकर अब शासन सख्त रुख अख्तियार करेगा और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

मुख्य सचिव ने पांच जुलाई को ही भेजा था पत्र
मुख्य सचिव डीएस मिश्रा ने 5 जुलाई 2022 को आदेश जारी कर विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों एवं प्रधान सचिवों और सचिवों को स्क्रीनिंग करने के लिए समितियों का गठन करने और अपने विभागों द्वारा अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं अधिकारियों की सूची भेजने के लिए कहा था। राज्य सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए आयु की गणना के लिए कट-ऑफ तिथि के रूप में 31 मार्च तय की गई थी। आदेश के कार्यान्वयन के बारे में विवरण प्राप्त करने के लिए विभागों को एक निर्धारित प्रारूप भी भेजा गया था।

2017 में सक्रीनिंग के बाद करीब 250 कर्मचारी हुए थे जबरन रिटायर
राज्य सरकार पहले भी इसी तरह की कवायद कर चुकी है। घटनाक्रम से अवगत लोगों ने कहा कि राज्य सरकार ने 2017 में राज्य भर में स्क्रीनिंग के बाद लगभग 200 से 250 कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया था। हालांकि, अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए आईएएस और पीसीएस अधिकारियों की पहचान करने के लिए गठित स्क्रीनिंग समितियां किसी भी अधिकारी की पहचान करने में विफल रही थीं।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति योजना लापरवाह कर्मचारियों के लिए
यूपी सचिवालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्रा ने कहा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति योजना उन लोगों के लिए थी जिनकी काम में कोई दिलचस्पी नहीं थी और चेतावनी और कार्रवाई के बावजूद नियमित रूप से अपने कार्यालयों में नहीं आते थे। ऐसे आदतन अपराधियों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया जाना चाहिए। राज्य सचिवालय कुशलतापूर्वक कार्य कर रहा है। सचिवालय में हमारे पास ऐसे कर्मचारी नहीं हैं। अगर सचिवालय के बाहर ऐसे कर्मचारी हैं तो कार्रवाई की जानी चाहिए।

30 सितंबर तक दोबारा मांगी जाएगी स्क्रीनिंग रिपोर्ट
इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने कहा कि हम मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के स्तर पर भी इस आदेश के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए समीक्षा करेंगे और 30 सितंबर, 2022 तक विभागों से रिपोर्ट मांगेंगे। जल्द ही इसको लेकर कार्यवाही शुरू कराई जाएगी। जिन विभागों की तरफ से लापरवाही बरती जाएगी उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। इस आदेश को लेकर दोबारा एक सर्कुलुर जारी किया गया है। फिर भी जानकारी नहीं मिली तो उचित कदम उठाया जाएगा।












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