आजम का भाव बढ़ाने के बाद खुद खाली हाथ रह गए शिवपाल यादव, क्या कपिल सिब्बल की एंट्री ने बिगाड़ा खेल ?

लखनऊ, 14 जून: उत्तर प्रदेश में कुछ दिन पहले आजम खां के जेल से छूटने के बाद यूपी की सियासत काफी गरम थी। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव आजम को रिसीव करने सीतापुर जेल पहुंचे थे। उसके बाद आजम ने अखिलेश यादव को लेकर कुछ ऐसे ट्विट किए जिससे ऐसा लगा कि अब उनका अखिलेश से मोहभंग हो गया है। लेकिन राज्यसभा और एमएलसी चुनाव के बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल ने ऐसे एंट्री मारी कि सारा खेल ही 360 डिग्री एंगल पर घूम गया। कुछ समय पहले तक अपनी जीत की आहट ले रहे शिवपाल यादव को एक बार फिर अखिलेश के सामने चित्त होना पड़ा। अखिलेश ने आजम की हर बात मान ली ओर उसके हिसाब से राज्यसभा और एमएलसी चुनाव में टिकट दिए जिससे शिवपाल की रणनीति कामयाब नहीं हुई और वो एकदम अलग-थलग पड़ गए।

उपचुनाव के बीच एकजुट दिखना चाहती है सपा

उपचुनाव के बीच एकजुट दिखना चाहती है सपा

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी एक बार फिर से सुलह करने और एकजुट दिखने की कोशिश कर रही है। चुनावी माहौल है। यानी लोकसभा उपचुनाव होने वाले हैं। विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में पार्टी किसी भी सूरत में नेतृत्व क्षमता में गिरावट नहीं देखना चाहेगी। आखिरी वक्त में अखिलेश यादव ने अपना रुख ढीला किया और रुख में बदलाव का संकेत दिया। लेकिन, क्या अखिलेश यादव के रवैये में ऐसा बदलाव आया? नहीं, अगर आप सभी घटनाओं के सूत्र जोड़ दें, तो आपको राज्यसभा चुनाव 2022 के नामांकन के दिन से तार जुड़ते दिखाई देंगे। समाजवादी पार्टी के टिकट पर कपिल सिब्बल के नामांकन के साथ ही जिस तरह से स्थिति बदल गई। इससे राज्य में किसी भी बड़े राजनीतिक उथल-पुथल की अटकलों पर तत्काल विराम लग गया। इस पूरी कवायद ने समाजवादी पार्टी से नाराज विधायक शिवपाल यादव का सारा गेम प्लान बिगड़ गया।

शिवपाल की रणनीति में सिब्बल बने रोड़ा

शिवपाल की रणनीति में सिब्बल बने रोड़ा

विरोधाभासों से जूझ रही समाजवादी पार्टी के लिए कपिल सिब्बल वन स्टॉप सॉल्यूशन बनकर आए हैं। 25 मई को, सिब्बल ने लखनऊ में सपा के समर्थन से एक स्वतंत्र राज्यसभा का फॉर्म भरा और पार्टी के लिए चीजें अच्छी होती दिख रही थीं। सबसे पहले अपने नामांकन को लेकर पार्टी और नेतृत्व से खासे नाराज आजम खान ने खुशी जाहिर की। मुलायम परिवार में भी प्रो. रामगोपाल यादव की नाराजगी दूर करने के लिए एक कट लगा। उन्हें जावेद अली खान के जरिए पूरा किया गया। लेकिन, इसके बाद भी आजम खान की अखिलेश से नाराजगी बनी रही। 20 मई को सीतापुर जेल से बाहर आने के बाद आजम लखनऊ आ गए। विधानसभा सदस्यता की शपथ लेने के बाद वे सीधे रामपुर गए। इस दौरान अगर कोई नेता खुश था तो वह थे शिवपाल यादव थे। लेकिन, हो सकता है कि उनका गेमप्लान अब उतना प्रभावी न रहा हो।

आजम को साधने की रणनीति में विफल हो गए शिवपाल

आजम को साधने की रणनीति में विफल हो गए शिवपाल

शिवपाल जानते हैं कि वह अकेले कुछ खास नहीं कर पाएंगे। समाजवादी पार्टी से वह 2017 में ही बाहर हो चुके थे। समाजवादी पार्टी के नेता भी इस बात को समझ चुके हैं। मुलायम को यादवलैंड में एकजुट दिखाने की कोशिश में, भले ही अखिलेश ने उन्हें यूपी चुनाव के समय टिकट दिया था। पार्टी का स्टार प्रचारक बना दिया, लेकिन भूमिका पार्टी में सोफे पर बैठे अखिलेश और मुलायम के बीच पोल पर बैठने तक ही सीमित रही। ऐसे में आजम की नाराजगी की खबर सुनकर वह सीतापुर जेल की ओर दौड़ पड़े। बाहर आकर बहुत कुछ बताया। फिर जिस दिन आजम जा रहे थे, जेल के गेट पर सिर्फ शिवपाल अपने परिवार वालों के साथ नजर आए। जिला स्तर तक का एक सपा नेता सीतापुर जेल नहीं पहुंचा। इन परिस्थितियों ने शिवपाल को आक्रमण करने का मौका दिया और वह हारे नहीं।

सिब्बल की एंट्री, शिवपाल का हाथ खाली

सिब्बल की एंट्री, शिवपाल का हाथ खाली

तमाम राजनीतिक समीकरणों के बीच शिवपाल यादव आजम खान के साथ मिलकर सपा में ही एक अलग खेमा विकसित करने की योजना तैयार कर रहे थे। इस दौरान कोई अलग संगठन बनाने की कोशिश की गई। लेकिन इस पूरे सियासी घटनाक्रम में जैसे ही कपिल सिब्बल की एंट्री हो गई और शिवपाल के हाथ खाली रह गए। शिवपाल ने 2019 का लोकसभा चुनाव अपने दम पर लड़ा था, उनकी पार्टी किसी सीट पर टिक भी नहीं पाई थी। ऐसे में एक मजबूत चेहरे के के तौर पर सिब्बल आए और उन्होंने ऐसा जाल फैलाया कि अखिलेश और आजम न सिर्फ मिले, बल्कि दो घंटे से ज्यादा बात भी की। इस घटना के बाद से ही शिवपाल का सारा खेल बिगड़ गया लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि शिवपाल यादव अब क्या करेंगे।

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