अखिलेश से मिले शरद यादव, कहा- 'NDA डूबता जहाज है, गोरखपुर तो सिर्फ ट्रेलर था'

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    Sharad Yadav ने की Akhilesh Yadav से मुलाकात, NDA पर जमकर साधा निशाना । वनइंडिया हिंदी

    लखनऊ। जनता दल यूनाइटेड के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने मंगलवार को लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। शरद यादव लखनऊ में पिछड़ा, अल्पसंख्यक, दलित आदिवासी मंच द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। शरद यादव ने कहा कि एनडीए डूबता जहाज है। सभी घटक दल एक-एक कर इससे किनारा कर लेंगे। एनडीए का एजेंडा विभाजनकारी रूप ले चुका है। एक समय में एनडीए के संयोजक रहे शरद यादव ने कहा कि पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के जमाने में एनडीए का राष्ट्रीय एजेंडा था। अबका एजेंडा केवल दूसरी पार्टियों में तोड़-फोड़ का है।

    राजग में कोई नहीं बचने वाला

    राजग में कोई नहीं बचने वाला

    उन्होंने कहा कि शिव सेना के बाद तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) भी राजग से अलग हो चुकी है। उनके ख्याल से अब राजग में कोई नहीं बचने वाला। शरद यादव ने कहा, 'राजनीतिक पार्टियां चाहें वह राष्ट्रीय हों या फिर क्षेत्रीय सभी को अब साथ आने की जरूरत है। साथ आने पर गोरखपुर और फूलपुर में रिजल्ट मिल चुका है। सब साथ आएं तो बड़ा बदलाव संभव है।' शरद यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय मंदिर-मंदिर घूमते रहते हैं।

    उपचुनाव में भाजपा की हार तो महज ट्रेलर है

    उपचुनाव में भाजपा की हार तो महज ट्रेलर है

    उन्होंने कहा कि गोरखपुर के साथ फूलपुर की लोकसभा सीट पर जीत के लिए समाजवादी पार्टी और बसपा के नेताओं का अभिनंदन करता हूं। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्ष में सबसे ज्यादा असर गोरखपुर और फूलपुर के चुनाव का हुआ है। इस समय हर पार्टी से अपील करता हूं की चुनौती बड़ी है संविधान बचाने के लिए सब को एक होना होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग देश को धर्म के नाम पर बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा की हार तो महज ट्रेलर है। पिक्चर अभी बाकी है।

    अपने वोट हितों के चलते गाय को आगे कर दिया गया

    अपने वोट हितों के चलते गाय को आगे कर दिया गया

    उन्होंने कहा कि करीब 26 हजार किसान और 500 बेरोजगार नौजवानों ने आत्महत्या की है। नोटबंदी के चलते रियल स्टेट जैसा धंधा चौपट हो गया। करोड़ों लोगों की नौकरियां चली गईं। नीरव मोदी, विजय माल्या और कोठारी के चलते बैंकिंग पर बुरा असर पड़ा। अपने वोट हितों के चलते गाय को आगे कर दिया गया। जानवर खेत-खलिहान चर जा रहे हैं।

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